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 “पालघर अस्पताल हमला मामला” में विधायक पुत्र समेत 17 पर केस

पालघर अस्पताल हमला मामला

पालघर अस्पताल हमला मामला महाराष्ट्र के पालघर स्थित रिलीफ अस्पताल में शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि को इलाज के बिल और डिस्चार्ज को लेकर भारी हंगामा खड़ा हो गया। शिवसेना (शिंदे गुट) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और डराने-धमकाने की घटना को अंजाम दिया।

घटना का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पालघर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थानीय विधायक के बेटे और शिवसेना के शहर प्रमुख सहित कम से कम 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस वारदात के बाद मेडिकल जगत और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश है।

डिस्चार्ज और ₹19,866 के मेडिकल बिल से शुरू हुआ विवाद

यह विवाद जन्माष्टमी पर ‘दही हांडी’ उत्सव के दौरान घायल हुए एक ‘गोविंदा’ के इलाज और अस्पताल के बिल को लेकर शुरू हुआ। माहिम हाईवे के पास दही हांडी पिरामिड से गिरकर एक गोविंदा के सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी, जिसे रिलीफ अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार:

सीटी स्कैन की सलाह: डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर चोट को देखते हुए सीटी स्कैन (CT Scan) कराने की सलाह दी थी।

बिल का विवाद: अस्पताल ने कुल इलाज का बिल ₹19,866 बनाया था, जिसमें से ₹10,000 जमा करा दिए गए थे।

बकाया राशि पर हंगामा: बकाया बिल चुकाने और मरीज को डिस्चार्ज करने की बात पर शिवसेना कार्यकर्ता और गोविंदा पाठक के सदस्य उग्र हो गए।

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सीसीटीवी में कैद हुई गुंडागर्दी: आईसीयू में जबरन घुसे कार्यकर्ता

अस्पताल कर्मचारियों द्वारा सौंपी गई शिकायत और सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात, कुंदन सांखे और स्थानीय विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित अन्य समर्थकों के साथ अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में घुस गए।

बहस के दौरान नेताओं ने अस्पताल के कर्मचारियों पर हमला कर दिया। फुटेज में राहुल घरात एक पुरुष कर्मचारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। जब बीच-बचाव करने के लिए रिसेप्शनिस्ट और एक अन्य महिला कर्मचारी आगे आई, तो उन्हें भी गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियाँ दी गईं।

इसके अलावा, कार्यकर्ता अस्पताल के अति-संवेदनशील आईसीयू (ICU) वार्ड में जबरन घुस गए और बिना चिकित्सा अनुमति के मरीज की आईवी ड्रिप (IV Drip) निकालकर उसे ले गए।

विधायक पुत्र और पार्टी पदाधिकारियों समेत 17 लोगों पर FIR

अस्पताल कर्मचारी कुंदन सांखे की शिकायत पर पालघर पुलिस ने सख्त कानूनी कदम उठाए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

इसके साथ ही, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए विशेष कानून—महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस-पर्सन एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशन एक्ट, 2010 की धारा 3 और 4 भी लगाई गई हैं। इन धाराओं में गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होना, मारपीट करना, शासकीय कार्य में बाधा डालना और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शामिल है।

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राजनीतिक प्रतिक्रिया और मेडिकल बिरादरी में रोष

घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंधे पाटिल ने कहा, “यह महायुति के नेताओं की खुली गुंडागर्दी है। जब सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता ही डॉक्टरों और महिला स्वास्थ्य कर्मियों को पीटेंगे, तो कानून-व्यवस्था का क्या होगा?”

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वहीं, पालघर की मेडिकल बिरादरी ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी ठाणे में एक महिला डॉक्टर पर हमला करने वाले शिवसेना पार्षद की जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने वालों को किसी भी सूरत में राहत नहीं मिलनी चाहिए।

फिलहाल पालघर पुलिस सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। पालघर अस्पताल हमला मामला ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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