“BAPS एफिल टावर विवाद” महंत स्वामी महाराज के दौरे से क्यों छिड़ा विवाद?
स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख संगठन ‘बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था’ (BAPS) के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज की हालिया पेरिस यात्रा एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद में बदल गई है। 5 सितंबर को BAPS प्रतिनिधिमंडल के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटाने और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देशों के बाद फ्रांस में भारी जनाक्रोश देखा गया।
इस घटना के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार (Strike) कर दिया, जिसके कारण स्मारक को अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा। फ्रांस के श्रमिक संगठनों, राजनेताओं और मानवाधिकार समर्थकों की तीखी आलोचना के बाद BAPS को आधिकारिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?
BAPS के 92 वर्षीय आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज पेरिस के पास बुस्सी-सेंट-जॉर्जेस में फ्रांस के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर के उद्घाटन के सिलसिले में यूरोप दौरे पर थे। उद्घाटन समारोह के बाद 5 सितंबर को BAPS के लगभग 100 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने पेरिस के लैंडमार्क एफिल टावर का दौरा किया।
विवाद तब शुरू हुआ जब एफिल टावर की संचालन कंपनी (SETE) ने BAPS प्रतिनिधिमंडल के आग्रह पर कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को महंत स्वामी महाराज और साधुओं के मार्ग से हटने या अन्य विभागों में स्थानांतरित होने के निर्देश जारी किए। BAPS संप्रदाय के मुख्य नियमों के अनुसार, उनके संन्यासी/साधु महिलाओं के सीधे संपर्क, बातचीत या दर्शन से पूरी तरह परहेज करते हैं।
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कर्मचारियों की हड़ताल और फ्रांस में तीखी प्रतिक्रिया
8 सितंबर को फ्रांस के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन ‘कन्फेडरेशन जनरल डू ट्रैवेल’ (CGT) के नेतृत्व में एफिल टावर के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया:
कर्मचारियों का अपमान: यूनियन प्रतिनिधि डायने डेवोइन ने मीडिया को बताया कि लिंग (Gender) के आधार पर महिला कर्मचारियों को साइडलाइन करना और उनकी जगह पुरुषों को तैनात करना पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक था।
पेरिस के डिप्टी मेयर की प्रतिक्रिया: पेरिस के पूर्व डिप्टी मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से “अस्वीकार्य” करार दिया और मामले की विस्तृत प्रशासनिक जांच की घोषणा की।
फ्रांस की मंत्री का सख्त बयान: फ्रांस की लैंगिक समानता मंत्री औरोर बर्ग ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश देते हुए लिखा, “फ्रांस में, हम महिलाओं से खुद को मिटाने या अदृश्य होने के लिए नहीं कहते हैं।”
कानूनी उल्लंघन: फ्रांस के श्रम वकीलों ने उल्लेख किया कि ‘कोड डू ट्रैवेल’ (फ्रांस लेबर कोड) के अनुच्छेद L.1132-1 और L.1142-1 के तहत कार्यस्थल पर लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव या कार्य आवंटन गैर-कानूनी है।
BAPS की सफाई और विदेश मंत्रालय का रुख
विवाद बढ़ने के बाद BAPS संस्था ने एक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की और माफी मांगी:
BAPS का स्पष्टीकरण: संस्था ने कहा कि यह दौरा पहले से तय था और इसका उद्देश्य स्मारक के सामान्य संचालन में बाधा न डालना था। BAPS ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी के साथ लैंगिक भेदभाव करने का नहीं था और यदि इस स्थिति से किसी को ठेस पहुंची है तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) का जवाब: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पेरिस में BAPS मंदिर के उद्घाटन की जानकारी सरकार को है, लेकिन एफिल टावर का मुद्दा संबंधित संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन के बीच का विषय है।
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बीएपीएस (BAPS) की परंपरा और पूर्व विवाद
स्वामीनारायण संप्रदाय की BAPS शाखा की स्थापना 1907 में हुई थी। दुनिया भर में इसके 1500 से अधिक मंदिर हैं। BAPS के 800 से अधिक साधु कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और महिलाओं से दूरी बनाए रखने के नियम का पालन करते हैं।
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हालाँकि, इस घटना पर लोकप्रिय हस्तियों, जैसे गायिका चिन्मयी श्रीपदा, ने भी सवाल उठाए हैं। यह पहली बार नहीं है जब BAPS अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया है; 2021 में अमेरिका के न्यू जर्सी में BAPS मंदिर निर्माण स्थल पर FBI ने श्रम मानकों और वेतन से जुड़ी शिकायतों के आधार पर जांच की थी।
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