“लखनऊ कोर्ट अतिक्रमण आदेश” इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त रुख:
लखनऊ कोर्ट अतिक्रमण आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में बने अवैध निर्माणों और अतिक्रमण पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रशासनिक और नगर निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिला अदालत परिसर और सार्वजनिक मार्गों पर बने शेष सभी अवैध ढांचों को कानून के अनुसार जल्द से जल्द हटाया जाए।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने 10 सितंबर 2026 को यह आदेश लखनऊ जिला एवं सत्र अदालत परिसर और आसपास की सरकारी जमीनों पर हुए कथित अवैध कब्जों से जुड़ी दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
अब तक 71 अवैध कब्जे ध्वस्त, लेकिन कार्रवाई जारी रहेगी
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश की:
शुरुआती कार्रवाई: कोर्ट के पिछले निर्देशों के अनुपालन में शुरुआती चरण में 14 अवैध ढांचों को गिराया गया था।
दूसरे चरण की ड्राइव: इसके बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए 57 और अवैध कब्जों को जमींदोज किया गया।
तस्वीरों के साथ रिपोर्ट जमा: लखनऊ नगर निगम के ज़ोन-1 के ज़ोनल अधिकारी ने 8 सितंबर 2026 की विस्तृत रिपोर्ट और हटाए गए अतिक्रमणों की फोटोग्राफ्स खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत कीं।
हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल काफी हद तक काम पूरा हो जाने का मतलब यह नहीं है कि कार्रवाई खत्म हो गई है। पीठ ने अधिकारियों से कहा कि शेष बचे सभी अवैध कब्जों को हटाने का कार्य संभव हो तो अगले पांच हफ्तों के भीतर पूरी तरह समाप्त किया जाए।
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72 कब्जाधारियों को दिया गया था विधिक मौका
अदालत ने अपने 7 अप्रैल 2026 के पुराने आदेश का संदर्भ देते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोगिता की भूमि और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा करके बनाए गए चैंबरों और दुकानों के 72 कथित कब्जाधारियों को अंतिम अवसर दिया गया था।
अंतिम नोटिस प्रक्रिया: कब्जाधारियों से कहा गया था कि वे या तो स्वयं स्थान खाली कर दें या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना वैध अधिकार साबित करें।
अखबारों में प्रकाशन: कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन मामलों में व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील नहीं हो सके, उन्हें एक प्रमुख हिंदी और एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित कराया जाए ताकि प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 10 दिनों का समय मिल सके।
बेदखली की कार्रवाई: यदि वे वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो उन गैर-कानूनी ढांचों को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
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कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासनिक समन्वय का आदेश
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए हाई कोर्ट ने शीर्ष अधिकारियों को तालमेल बैठाने का निर्देश दिया है:
प्रशासनिक तालमेल: लखनऊ के जिलाधिकारी (DM), पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) और नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) को आपस में समन्वय स्थापित करने को कहा गया है।
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पर्याप्त बल की तैनाती: नगर निगम के दस्ते को तोड़फोड़ और बेदखली की कार्रवाई के दौरान पर्याप्त प्रशासनिक सुरक्षा और पुलिस बल उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।
मामले की गंभीरता और प्रशासनिक प्रगति को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई की तिथि 26 अक्टूबर 2026 तय की है। हाल ही में शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों और सरकारी जमीनों को मुक्त कराने के संबंध में आए लखनऊ कोर्ट अतिक्रमण आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की टीमों ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
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