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“बांद्रा गरीब नगर तोड़फोड़” में 400 अवैध झुग्गियां जमींदोज,

बांद्रा गरीब नगर तोड़फोड़

बांद्रा गरीब नगर तोड़फोड़ मुंबई के उपनगरीय रेलवे नेटवर्क के सबसे व्यस्त केंद्रों में से एक, बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन और बांद्रा टर्मिनस से सटे ‘गरीब नगर’ इलाके में मंगलवार को भारी सुरक्षा बंदोबस्त और चीख-पुकार के बीच एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू हुआ।

बॉम्बे हाई कोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद वेस्टर्न रेलवे (WR), मुंबई पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल ने संयुक्त रूप से पांच दिवसीय महा-तोड़फोड़ अभियान का आगाज किया। अभियान के पहले ही दिन इस घनी आबादी वाली झुग्गी बस्ती में चार जेसीबी (JCB) मशीनों और भारी क्रेन के जरिए करीब 400 अवैध और अस्थायी रिहायशी ढांचों को जमींदोज कर दिया गया।

इस कार्रवाई के चलते रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर रेलवे की लगभग 5,200 वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन को अतिक्रमणकारियों के कब्जे से मुक्त करा लिया गया है। हालांकि, कड़कती धूप और भीषण गर्मी के बीच अचानक बेघर हुए सैकड़ों परिवारों के आंसुओं और हताशा ने इस पूरी कानूनी कार्रवाई के मानवीय पहलू पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्राउंड जीरो पर भावुक दृश्य: ‘वोट सबने मांगा, पर आशियाना उजड़ने पर सब गायब’

जैसे ही मंगलवार सुबह ठीक 10 बजे भारी पुलिस अमले और बुलडोजर ने गरीब नगर की तंग गलियों में प्रवेश किया, पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। ‘भारत24by7’ सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए ग्राउंड जीरो के दृश्यों में महिलाएं अपने ढहे हुए आशियानों के मलबे पर बैठकर बिलखती नजर आईं।

बेबस निवासियों को आनन-फानन में अपना घरेलू सामान—बर्तन, बिस्तर और कपड़े—बचाकर पास के फुटपाथों पर भागते देखा गया।

प्रशासनिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए एक पीड़ित महिला ने रोते हुए कहा, “हमें बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस के बेघर कर दिया गया। चिलचिलाती गर्मी में हमारे छोटे-छोटे बच्चे बिना भोजन और पानी के सड़क पर बैठे हैं। सरकार को अगर हटाना ही था, तो पहले रहने के लिए घर के बदले घर देना चाहिए था।

” एक अन्य बुजुर्ग महिला ने नेताओं के चुनावी ढोंग पर गुस्सा निकालते हुए कहा, “चुनाव के वक्त सब हाथ जोड़कर झुग्गियों में वोट मांगने आते हैं। हम लोगों ने मिलकर सालों मेहनत करके इस दलदल और कीचड़ वाली जमीन को रहने लायक बनाया था, और आज जब हमारा घर तोड़ा जा रहा है, तो कोई राजनीतिक दल या नेता हमारी सुध लेने नहीं आया।”

सुरक्षा का कड़ा चक्रव्यूह: 1000 जवानों की तैनाती के बीच चला ऑपरेशन

स्थानीय स्तर पर संभावित हिंसक विरोध प्रदर्शन, पत्थरबाजी या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बेहद पुख्ता तैयारी की थी। वेस्टर्न रेलवे ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF), गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) और अपने वरिष्ठ इंजीनियरों सहित लगभग 1,000 कर्मियों का दस्ता तैनात किया था।

इसके साथ ही, कानून-व्यवस्था को नियंत्रित रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मुंबई पुलिस के 400 से अधिक चुनिंदा जवानों, दंगा नियंत्रण वाहनों, वज्र वाहनों और एम्बुलेंस को घटना स्थल के चारों तरफ सुरक्षा घेरे के रूप में खड़ा किया गया था। कड़े सुरक्षा घेरे के कारण झुग्गीवासियों का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप नहीं ले सका और भारी मशीनरी ने निर्बाध रूप से अवैध निर्माणों को गिराने का काम जारी रखा।

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क्यों जरूरी था यह तोड़फोड़ अभियान? वेस्टर्न रेलवे की मेगा योजना

रेलवे अधिकारियों और नगर नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, बांद्रा टर्मिनस और बांद्रा स्टेशन के पास की इस जमीन को खाली कराना मुंबई के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहद अनिवार्य हो चुका था। उच्च न्यायालय ने भी माना कि सार्वजनिक उपयोगिता की जमीनों पर लंबे समय तक अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इस खाली कराई गई 5,200 वर्ग मीटर जमीन का उपयोग निम्नलिखित बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा:

बांद्रा टर्मिनस का विस्तार: यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टर्मिनस के प्लेटफॉर्म्स और यार्ड का आधुनिकीकरण।उपनगरीय कनेक्टिविटी में सुधार: रेलवे लाइनों के विस्तार और नए ट्रैक बिछाने के लिए अतिरिक्त जगह की उपलब्धता।

नई ट्रेनों का संचालन: मुंबई से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए शुरू होने वाली लगभग 50 नई ट्रेनों (सुपरफास्ट और एक्सप्रेस) के रैक और टर्मिनेशन की व्यवस्था को सुचारू करना।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने अप्रैल 2026 के आदेश में यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिकारी विकास के नाम पर मानवाधिकारों की अनदेखी न करें।

कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया है कि वर्ष 2021 में किए गए आधिकारिक बायोमेट्रिक सर्वे के आधार पर जो भी झुग्गी-झोपड़ी वाले वैध और पुनर्वास (Rehabilitation) के पात्र पाए गए हैं, उनके अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें नियमानुसार वैकल्पिक आवास मुहैया कराए जाएं।

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सियासी पारा चढ़ा: कांग्रेस ने कहा- ‘हिम्मत है तो वर्ली के अमीर अवैध निर्माणों पर चलाओ बुलडोजर’

गरीब नगर में चले इस कड़े प्रशासनिक हंटर के बाद मुंबई की राजनीति में भी उबाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने इस अतिक्रमण विरोधी अभियान की टाइमिंग और तौर-तरीकों पर तीखा हमला बोला।

दलवाई ने आरोप लगाया कि बिना किसी व्यापक सामाजिक सर्वेक्षण और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था के गरीब परिवारों को सड़क पर फेंक देना सरासर अन्याय है।

सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कड़े लहजे में कहा:

“यह सरकार पूरी तरह से गरीब विरोधी है। रेलवे और नगर निगम केवल लाचार और असहाय लोगों की झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाना जानते हैं। अगर राज्य सरकार और प्रशासन में वाकई थोड़ी भी हिम्मत है, तो वे मुंबई के रसूखदार और अमीर इलाकों में बने अवैध निर्माणों पर हाथ लगाकर दिखाएं।

खासकर वर्ली (Worli) जैसे वीआईपी इलाकों में बड़े पैमाने पर बिल्डरों और अमीरों ने अवैध निर्माण किए हैं, लेकिन वहां प्रशासनिक अधिकारियों को सांप सूंघ जाता है और सारा कानून केवल गरीब नगर के मजदूरों के लिए लागू होता है।”

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संपादकीय दृष्टिकोण:

बांद्रा का गरीब नगर विध्वंस मामला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब कोई महानगर ‘ग्लोबल सिटी’ बनने की दौड़ में अपनी रफ्तार बढ़ाता है, तो उसका खामियाजा अक्सर समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को उठाना पड़ता है।

बुनियादी ढांचे का विकास और ट्रेनों की संख्या बढ़ाना निश्चित रूप से सार्वजनिक हित में है, और रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटना भी कानूनी रूप से सही है। लेकिन, राज्य और रेलवे कूटनीति की असली परीक्षा इस बात में है कि क्या वे 2021 के सर्वे के तहत पात्र परिवारों को तत्काल छत मुहैया करा पाते हैं या नहीं।

जब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित नहीं होगी, तब तक विकास की हर ऐसी कंक्रीट नींव के नीचे मानवीय कंदन की गूंज सुनाई देती रहेगी। बांद्रा गरीब नगर तोड़फोड़: भारी सुरक्षा के बीच शुरू हुई बांद्रा गरीब नगर तोड़फोड़

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