“दिल्ली हाईकोर्ट UAPA जमानत” मोहम्मद साकिब को मिली जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट UAPA जमानत दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार के खिलाफ कथित तौर पर साजिश रचने और आतंकवाद से जुड़े एक मामले में लगभग आठ वर्षों से जेल में बंद आरोपी मोहम्मद साकिब उर्फ साकिब इफ्तिखार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले के लंबे ट्रायल और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को कड़ी शर्तों के साथ जमानत प्रदान की है।
यह आदेश 14 सितंबर को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने पटियाला हाउस कोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए जारी किया, जिसमें याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।
मामला और NIA के आरोप
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने वर्ष 2018 में एफआईआर (RC-38/2018/NIA/DLI) दर्ज की थी। साकिब पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
आरोप: एनआईए का दावा था कि आरोपी ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ नामक आईएस-समर्थित समूह का हिस्सा था। उस पर हथियारों की खरीद-फरोख्त में मदद करने और जैश-ए-मोहम्मद के विचारकों के संपर्क में रहने के आरोप लगाए गए थे।
बरामदगी: 26 दिसंबर 2018 को हुई गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके घर से तीन मोबाइल फोन और एक टैबलेट जब्त किया था।
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हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
अदालत ने आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए माना कि ट्रायल के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं दिखती।
धीमी विचारण प्रक्रिया: अभियोजन पक्ष के कुल 120 गवाहों में से केवल 40 से ही पूछताछ हो सकी है। हालांकि एनआईए ने 39 गवाहों को हटाने की बात कही, फिर भी मामले के निस्तारण में लंबा समय लगने की आशंका है।
अनुच्छेद 21 का महत्व: पीठ ने UAPA की धारा 43D(5) की पाबंदियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा को लंबे समय तक बिना फैसले के जेल में रखकर प्रभावित नहीं किया जा सकता।
साक्ष्यों का मूल्यांकन: अदालत ने पाया कि कश्मीर दौरे से संबंधित मुख्य गवाहों के बयान ऐसे नहीं हैं जो आरोपी की आगे की कस्टडी को जरूरी ठहरा सकें।
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जमानत के लिए तय की गई सख्त शर्तें
दिल्ली हाईकोर्ट ने साकिब को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कई कड़ी पाबंदियां भी लगाई गई हैं:
क्षेत्रीय सीमाएं: आरोपी को हापुड़ स्थित अपने घर में रहने का निर्देश दिया गया है। वह केवल सुनवाई के दौरान दिल्ली आ सकता है।
हाजिरी और पासपोर्ट जमा करना: साकिब को हर दो सप्ताह में एक बार लखनऊ स्थित एनआईए कार्यालय में रिपोर्ट करना होगा और अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा कराना होगा।
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संचार साधनों पर प्रतिबंध: आरोपी पूरे ट्रायल के दौरान केवल एक मोबाइल और/या लैंडलाइन फोन का ही उपयोग कर सकता है।
सोशल मीडिया पर रोक: कोर्ट ने साकिब को किसी भी तरह की “देश-विरोधी सामग्री” (Anti-National Material) को सोशल मीडिया या अन्य साधनों से पोस्ट या शेयर करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। हाल ही में एक चर्चित याचिका पर सुनवाई करते हुए आया दिल्ली हाईकोर्ट UAPA जमानत से जुड़ा फैसला न्यायशास्त्र और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।
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