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“PM मोदी भजन क्लबिंग”की तारीफ भक्ति का यह मॉडर्न सांस्कृतिक रहा

PM मोदी भजन क्लबिंग

PM मोदी भजन क्लबिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे ‘भजन क्लबिंग’ (Bhajan Clubbing) के ट्रेंड की जमकर सराहना की है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और आधुनिक जीवनशैली का एक सुंदर और अर्थपूर्ण मेल बताया, जो आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं का यह नया अंदाज यह साबित करता है कि आधुनिकता के बीच भी भारतीय परंपराओं की पवित्रता और गहराई को पूरी निष्ठा के साथ संजोया जा सकता है।

परंपरा और आधुनिक लाइव कॉन्सर्ट का अनोखा तालमेल

‘मन की बात’ में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भजन और कीर्तन सदियों से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का मुख्य हिस्सा रहे हैं, जिन्हें आमतौर पर मंदिरों, धार्मिक कथाओं और सामुदायिक सभाओं में गाया जाता रहा है। लेकिन आज के युवा भक्ति भावना को अपनी दिनचर्या और लाइफस्टाइल में नए तरीकों से शामिल कर रहे हैं।

ग्लोबल कॉन्सर्ट जैसा माहौल: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज इन आयोजनों में भव्य स्टेज, डायनामिक लाइट्स और साउंड सिस्टम होते हैं। इनका माहौल किसी बड़े संगीत कॉन्सर्ट से कम नहीं होता, लेकिन जो भी गाया जाता है, वह पूरी लगन और भक्ति से सराबोर होता है।”

पवित्रता से कोई समझौता नहीं: पीएम मोदी ने खुशी जताते हुए कहा कि युवा इस फॉर्मेट में भजनों की गरिमा और शब्दों की पवित्रता का पूरा सम्मान रख रहे हैं और भक्ति को हल्के में नहीं ले रहे हैं।

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दिल्ली से अमेरिका तक फैल रहा नया सांस्कृतिक ट्रेंड

भजन क्लबिंग का यह चलन भारत के प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली, कोलकाता और बेंगलुरु से शुरू होकर अब अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय देशों तक पहुंच गया है।

नो-अल्कोहल और कम्युनिटी स्पेस: इन क्लबिंग इवेंट्स में डीजे और लाइव बैंड पारंपरिक भजनों को नए संगीत नोट्स और बीट्स के साथ पेश करते हैं। सबसे खास बात यह है कि यह माहौल पूरी तरह से शराब-मुक्त (Alcohol-Free) होता है, जहां हर उम्र के लोग सुरक्षित और सकारात्मक माहौल में एकत्र होते हैं।

युवा बैंड्स की बढ़ती लोकप्रियता: ‘बैकस्टेज सिबलिंग्स’ और ‘केशवम’ जैसे कई युवा भक्ति संगीत समूहों ने इस प्रारूप को अपनाया है। ये बैंड मंदिर के पारंपरिक माहौल से हटकर स्टेज पर ऊर्जावान धुनों के साथ भजन प्रस्तुत करते हैं, जो युवाओं को खूब आकर्षित कर रहे हैं।

ऑफलाइन जुड़ाव की नई जगह: आज की डिजिटल दुनिया में, जहां ज्यादातर सोशल इंटरेक्शन ऑनलाइन हो गए हैं, भजन क्लबिंग युवाओं को व्यक्तिगत रूप से मिलने और एक साथ भक्ति संगीत का आनंद लेने का शानदार प्लेटफॉर्म दे रही है।

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    ‘हनुमान अंश’ की टीम ने साझा किया अपना अनुभव

    प्रधानमंत्री द्वारा भजन क्लबिंग का उल्लेख किए जाने पर ‘हनुमान अंश‘ के अभिनेता शोभिनव सत्या और निर्माता रागिनी सोना ने भी अपनी खुशी व्यक्त की।

    उन्होंने हाल ही में एक भजन-क्लबिंग कार्यक्रम में पीएम मोदी की उपस्थिति और डफली बजाते हुए संगीत का आनंद लेने के क्षण को यादगार बताया। रागिनी सोना ने कहा कि जिस तरह से युवाओं की भीड़ भजनों पर झूमती है, वह हर पल रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव होता है।

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    भजन क्लबिंग ने यह साबित कर दिया है कि समय बदलने के साथ यदि प्रस्तुति का तरीका बदला जाए, तो भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर नई पीढ़ी के दिलों में अपनी जगह बनाए रख सकती है।

    युवाओं के बीच पारंपरिक भक्ति संगीत को नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की पहल PM मोदी भजन क्लबिंग के प्रयोगों के रूप में सामने आई है, जिसने आध्यात्मिक संगीत को डिजिटल युग की पीढ़ी से जोड़ने का काम किया है।

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