विदेश सचिव संसदीय समिति ब्रीफिंग आज, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर जानकारी
विदेश सचिव संसदीय समिति ब्रीफिंग आज, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार रखेगी पक्ष
आज शाम 4 बजे विदेश सचिव विक्रम मिस्री संसद की स्थायी समिति को ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ और भारत-पाकिस्तान तनाव के हालात पर विदेश सचिव संसदीय समिति ब्रीफिंग देंगे। यह ब्रीफिंग ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक जवाबी हमला किया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सैन्य बलों ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था।
■ समिति की बैठक में होंगे रणनीतिक सवाल
यह ब्रीफिंग विदेश मंत्रालय की पहल पर हो रही है ताकि सांसदों को सरकार की कार्रवाई और नीति की पूरी जानकारी मिल सके। ब्रीफिंग की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक डॉ. शशि थरूर करेंगे। समिति में विभिन्न दलों के कुल 31 सदस्य हैं, जो इस विषय पर सवाल पूछ सकते हैं।
प्रमुख सदस्य:
- रविशंकर प्रसाद (BJP)
- दीपेंद्र हुड्डा (Congress)
- सुधांशु त्रिवेदी (BJP)
- अभिषेक बनर्जी (TMC)
- असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM)
- जॉन ब्रिटास (CPIM)
संसदीय समिति की इस गोपनीय बैठक का उद्देश्य सरकार की पाकिस्तान नीति, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर विमर्श करना है। उम्मीद है कि विपक्षी दल सरकार से सीधे और तीखे सवाल पूछेंगे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि: 22 अप्रैल का हमला
7 मई को हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की जवाबी कार्रवाई थी, जो 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद शुरू की गई। इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। हमला उस समय हुआ जब पर्यटकों और प्रवासी श्रमिकों से भरा वाहन निशाना बना। हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) नामक आतंकी संगठन ने ली थी।
TRF के संबंध:
- माना जाता है कि TRF, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की छाया इकाई है।
- यह संगठन जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों की उपस्थिति का विरोध करता है।
- भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार TRF को पाकिस्तान की आईएसआई का संरक्षण प्राप्त है।
23 मिनट की सटीक कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर:
पहल्गाम हमले के दो सप्ताह बाद, भारतीय वायुसेना और थलसेना ने संयुक्त रूप से एक उच्चस्तरीय सैन्य अभियान चलाया जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। इस कार्रवाई में केवल 23 मिनट में 9 आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया गया।
ऑपरेशन की विशेषताएं:
- समय: 7 मई, सुबह के घंटे
- स्थान: पाकिस्तान और PoK के आतंकी शिविर
- तकनीक: आकाश मिसाइल, सुसाइड ड्रोन, और सटीक निर्देशित हथियार
- समन्वय: वायुसेना और सेना की संयुक्त योजना
- उद्देश्य: पहलगाम हमले के दोषियों और उनके संरक्षकों को खत्म करना
यह ऑपरेशन भारत की सैन्य तकनीक और क्षमताओं का एक महत्वपूर्ण उदाहरण था। इसे सीमित समय में बिना किसी भारतीय हानि के सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
विदेश सचिव समिति ब्रीफिंग में चर्चा के संभावित बिंदु
आज की ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री निम्नलिखित पहलुओं को समिति के सामने रख सकते हैं:
1. सैन्य कार्रवाई का विवरण:
- ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति, लक्ष्य, और तकनीकी संसाधनों का उल्लेख।
- इसमें सेना की भूमिका, चुनौतियां और सफलता की दर की जानकारी दी जा सकती है।
2. पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव:
- पाकिस्तान को FATF, UNSC जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की रणनीति।
- कूटनीतिक माध्यम से सहयोगी देशों से समर्थन प्राप्त करना।
- भारतीय राजदूतों द्वारा प्रमुख देशों को जानकारी देना।
3. भारत की भविष्य की रणनीति:
- सीमापार आतंकवाद को रोकने के लिए मजबूत नीति निर्माण।
- अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आत्मरक्षा का अधिकार और भारत का पक्ष।
- क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बहुपक्षीय संवाद।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की कूटनीति
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। अमेरिका, फ्रांस और रूस ने आतंक के खिलाफ भारत के रुख को समझा और संयम बरतने की अपील की। पाकिस्तान ने भारत पर “आक्रामकता” का आरोप लगाया, लेकिन भारत ने इसे आत्मरक्षा में की गई वैध कार्रवाई बताया।
विदेश मंत्रालय ने इस ऑपरेशन को पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का वैधानिक उत्तर बताया। मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई केवल आतंकियों और उनके प्रशिक्षण शिविरों पर केंद्रित थी, जिसमें नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष ने मांगा पारदर्शिता
जहां सरकार ने सैन्य कार्रवाई को साहसिक कदम बताया, वहीं विपक्षी दलों ने पारदर्शिता और संसद को विश्वास में लेने की मांग की। कांग्रेस, वामपंथी दल और TMC ने प्रधानमंत्री से इस पर संसद में बयान देने की मांग की थी। अब यह विदेश सचिव संसदीय समिति ब्रीफिंग विपक्ष की जानकारी की मांग को आंशिक रूप से पूरा करेगी।
शशि थरूर ने कहा कि समिति का दायित्व है कि वह सरकार से कड़े प्रश्न पूछे और सुनिश्चित करे कि नीति निर्णय संविधान और राष्ट्रीय हित के दायरे में हों।
क्या उम्मीद की जा रही है
आज की विदेश सचिव संसदीय समिति ब्रीफिंग भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, सैन्य रणनीति, और विदेश नीति के समन्वय का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे संसद और जनप्रतिनिधियों को सरकार की नीति और कार्रवाई की आंतरिक जानकारी प्राप्त होगी।
यह ब्रीफिंग न केवल पहल्गाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर की समीक्षा है, बल्कि भारत की भविष्य की सुरक्षा नीति और पाकिस्तान से निपटने की दिशा भी तय कर सकती है। इसमें उठाए गए सवाल और दिए गए उत्तर आने वाले सत्रों और राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित करेंगे।



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