ठाणे के शाहपुर स्थित स्कूल में छात्राओं की जबरन मासिक धर्म जांच
ठाणे जिले के शाहपुर स्थित रतनबाई दमानी स्कूल में छात्राओं की जबरन मासिक धर्म जांच का शर्मनाक मामला सामने आया है। शौचालय में खून के धब्बे मिलने के बाद, कक्षा 6 से 10 तक की लगभग 125 छात्राओं को अपनी वर्दी उतारने पर मजबूर किया गया। इस घटना ने न केवल छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है, बल्कि पूरे इलाके में भारी हंगामा भी मचा दिया है।
- स्कूल स्टाफ ने शौचालय की दीवार पर लगे खून से फिंगरप्रिंट लिए।
- शौचालयों में पानी की कमी भी इस घटना का एक बड़ा कारण बनी।
- अभिभावकों ने प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई की मांग की है।
अभिभावकों का कहना है कि उनकी बेटियों को इस अमानवीय व्यवहार से गहरा आघात पहुँचा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना की तुरंत जांच के आदेश दिए हैं।
शर्मनाक घटना का खुलासा
यह घटना मंगलवार को हुई जब स्कूल के शौचालय में खून के धब्बे देखे गए। प्रिंसिपल माधुरी गायकवाड़ ने तुरंत कक्षा 5 से 10 तक की कई लड़कियों को पूछताछ के लिए बुलाया। आरोप है कि कुछ छात्राओं से मासिक धर्म के बारे में पूछा गया।
- कुछ लड़कियों को अपने अंडरवियर उतारने पर मजबूर किया गया।
- यह जबरन मासिक धर्म जांच छात्राओं के लिए भयावह अनुभव था।
- इस घटना ने स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया।
कुल 125 छात्राओं को इस अमानवीय जांच से गुजरना पड़ा। यह छात्राओं के गरिमा का गंभीर उल्लंघन था।
मुख्य बिंदु :
1. 125 छात्राओं से जबरन जांच, कपड़े उतरवाकर मासिक धर्म पुष्टि की कोशिश ने आक्रोश भड़काया।
2. स्कूल की लापरवाही उजागर, शौचालय में पानी की कमी के चलते छात्राओं पर फोकस किया गया।
3. प्रिंसिपल समेत आठ आरोपी नामजद, पोक्सो एक्ट समेत बीएनएस की धाराएं लगाई गईं।
4. महाराष्ट्र महिला आयोग सक्रिय, स्कूल मान्यता रद्द और मानसिक परामर्श सुनिश्चित करने की मांग।
5. अभिभावकों का प्रदर्शन उग्र, थाने में धरना देकर न्याय और जवाबदेही की मांग की गई।
6. मुख्यमंत्री फडणवीस के निर्देश पर जांच तेज़, विधानसभा में गरमागरम बहस और कार्रवाई की घोषणा।
7. स्कूल फिलहाल बंद, 14 जुलाई को बैठक के बाद पुनः खुलने की संभावना, सुरक्षा पर रहेगा ज़ोर।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पुलिस ने इस मामले में कुल आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें प्रिंसिपल माधुरी गायकवाड़ और चार शिक्षिकाएं शामिल हैं। दो ट्रस्टी और एक महिला कर्मचारी (आया) भी आरोपित हैं।
- प्रिंसिपल और महिला अटेंडेंट को बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया गया।
- चार में से तीन आरोपी शिक्षकों को गुरुवार को हिरासत में लिया गया।
- कुल पांच लोगों को 15 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
80 वर्ष से अधिक उम्र के दो ट्रस्टियों को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस बाकी तीन लोगों से भी गहन पूछताछ कर रही है।
दर्ज धाराओं और कानूनी प्रावधान
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और 76 के तहत मामला दर्ज हुआ है। इन धाराओं में महिला का शील भंग करने और कपड़े उतारने का इरादा शामिल है। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम भी लागू किया गया है।
- पोक्सो अधिनियम की धारा 11 यौन उत्पीड़न से संबंधित है।
- धारा 12 यौन उत्पीड़न के लिए सजा का प्रावधान करती है।
- धारा 21 मामले की रिपोर्ट न करने पर सजा निर्धारित करती है।
इस घटना के बाद कानून का सख्त पालन सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है। यह मामला न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।
महिला आयोग का हस्तक्षेप
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकनकर ने गुरुवार को शाहपुर का दौरा किया। उन्होंने अभिभावकों से मुलाकात की और पुलिस व शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी जुटाई। चाकनकर ने कहा कि शिक्षा विभाग स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्यवाही करेगा।
- छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।
- पुलिस को जांच में तेजी लाने और आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश मिला।
- स्कूल में शिकायत निवारण और सखी सावित्री समितियां अनुपस्थित पाई गईं।
यह जबरन मासिक धर्म जांच पूरी तरह अस्वीकार्य है, चाकनकर ने स्पष्ट किया। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई।
प्रशासनिक कार्रवाई और सिफारिशें
इस गंभीर घटना के आरोपी प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भेजा है। चाकनकर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
- शिक्षा अधिकारी को सोमवार से स्कूल का स्वतंत्र संचालन शुरू करने का निर्देश।
- प्रभावित लड़कियों को बाल कल्याण समिति से परामर्श देने की सलाह मिली।
- यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों को मानसिक सहायता भी प्राप्त हो।
ये कदम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाए जा रहे हैं। प्रशासन जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्कूल का भविष्य और आगामी बैठक
स्कूल बुधवार से बंद है और शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक होनी है। इस बैठक में पुलिस, शिक्षा विभाग और सीडब्ल्यूसी के प्रतिनिधि अभिभावकों के साथ मौजूद रहेंगे। बैठक के नतीजों के आधार पर, शिक्षा विभाग 14 जुलाई को स्कूल को फिर से खोलने की योजना बना रहा है।
- यह बैठक मामले की आगे की दिशा तय करने में सहायक होगी।
- सभी हितधारकों की उपस्थिति में समाधान ढूंढा जाएगा।
- स्कूल के पुनः खुलने की तारीख 14 जुलाई तय की गई है।
यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि छात्राएं सुरक्षित महसूस करें। न्याय और पुनर्वास के प्रयास जारी रहेंगे।
अभिभावकों का तीव्र विरोध
छात्राओं ने घर लौटकर अपने अभिभावकों को पूरी घटना रोते हुए बताई। इस घटना से स्तब्ध और क्रोधित अभिभावक बुधवार सुबह स्कूल में इकट्ठा हुए। उन्होंने प्रिंसिपल से बहस की और तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की।
- अभिभावकों ने प्रिंसिपल के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करने को कहा।
- उन्होंने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी भी की।
- प्रिंसिपल के जवाब न देने पर अभिभावक थाने में धरने पर बैठे।
यह आक्रोश घटना की गंभीरता को दर्शाता है। अभिभावक अपनी बेटियों के लिए न्याय चाहते थे।
राजनीतिक हस्तक्षेप और सरकार का रुख
कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने यह मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में उठाया था। उन्होंने कहा, “इस घटना ने पूरे राज्य को शर्मसार कर दिया है।” जवाब में, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने सदन को जानकारी दी।
- मुख्यमंत्री फडणवीस ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।
- यह सरकार की गंभीरता और त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
विधानसभा में इस मुद्दे पर गरमागरम बहस हुई। सरकार ने त्वरित न्याय का आश्वासन दिया।
स्कूल की लापरवाही और उत्पीड़न के आरोप
अभिभावकों ने स्कूल के शौचालयों में पानी की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को भी शौचालय में पानी नहीं था, जिससे स्वच्छता संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ। बुधवार को एक टैंकर का इंतजाम तभी किया गया जब अभिभावकों ने प्रिंसिपल के कार्यालय पर धावा बोला।
- स्कूल प्रशासन को बुनियादी स्वच्छता की कोई परवाह नहीं थी।
- लगभग 10 लड़कियों को शारीरिक जांच के लिए कपड़े उतारने पर मजबूर किया गया।
- एक अभिभावक ने इसे “जानबूझकर किया गया उत्पीड़न” बताया।
एक छात्रा को अनुचित व्यवहार पर सवाल उठाने के लिए निशाना बनाया गया। यह जबरन मासिक धर्म जांच स्कूल की घोर लापरवाही का परिणाम थी।



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