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अजित पवार प्लेन क्रैश: मौत से पहले पायलट के आखिरी शब्द थे ‘ओह शिट’

पायलट के आखिरी शब्द

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बुधवार का दिन एक गहरे शोक की लहर लेकर आया, जब बारामती एयरस्ट्रिप के पास हुए एक भीषण विमान हादसे में डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार का दुखद निधन हो गया। पायलट के आखिरी शब्द “ओह शिट…” (Oh Shit…) थे, जो कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) की शुरुआती जांच में सामने आए हैं। यह चार्टर्ड लियरजेट विमान पुणे से लगभग 100 किमी दूर बारामती में लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अजित पवार के साथ-साथ दो पायलट, एक फ्लाइट अटेंडेंट और एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) की भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना से वाकिफ सूत्रों के अनुसार, बारामती एयरस्ट्रिप पर ग्राउंड कंट्रोल का संचालन निजी फ्लाइंग स्कूलों—रेडबर्ड एविएशन और कार्वर एविएशन के कैडेट्स संभालते हैं, जो क्रू के साथ संपर्क का अंतिम जरिया थे।

हादसे का खौफनाक मंजर: रनवे की दहलीज से पहले आग का गोला बना विमान

घटनाक्रम के अनुसार, 16 साल पुराना यह लियरजेट विमान रनवे की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही जमीन से टकरा गया। हालांकि क्रैश साइट अभी भी एयरस्ट्रिप के दायरे में ही थी, लेकिन विमान में टकराते ही भीषण आग लग गई। मरने वालों में 66 वर्षीय अजित ‘दादा’ पवार, उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर विदिप दिलीप जाधव, उनके अटेंडेंट और दो क्रू मेंबर—पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर और फर्स्ट ऑफिसर शांभवी पाठक शामिल थे। VT-SSK के रूप में पंजीकृत इस विमान ने लैंडिंग की पहली कोशिश नाकाम होने के बाद दोबारा लैंड करने के लिए चक्कर लगाया था। विमान के जमीन से टकराने के कुछ सेकंड पहले पायलट के आखिरी शब्द “ओह शिट” रिकॉर्ड किए गए, जो उस समय के अचानक पैदा हुए खतरे और दहशत को दर्शाते हैं।

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ब्लैक बॉक्स से हुआ बड़ा खुलासा: नहीं मिली थी कोई मेडे कॉल

हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की एक स्पेशल टीम बुधवार शाम को ही बारामती क्रैश साइट पर पहुंच गई। टीम ने विमान के मलबे से ब्लैक बॉक्स (FDR और CVR) बरामद कर लिया है। DGCA सूत्रों के मुताबिक, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से पता चलता है कि पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को कोई ‘मेडे’ (Mayday) या संकट का संदेश (Distress Call) नहीं भेजा था। CVR में चीखने-चिल्लाने की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कैप्टन सुमित कपूर को इम्पैक्ट से महज कुछ सेकंड पहले ही गलत लैंडिंग अप्रोच का अहसास हो गया था। इसी अफरा-तफरी के बीच पायलट के आखिरी शब्द हवा में गूंज कर रह गए।

विजिबिलिटी की समस्या और बारामती एयरफील्ड की चुनौतियां

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अनुसार, क्रू को पायलट की मर्जी से विजुअल मौसम की स्थिति (VMC) में नीचे उतरने की सलाह दी गई थी। उस समय हवा शांत थी और विजिबिलिटी लगभग 3,000 मीटर थी, जिसे लैंडिंग के लिए पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, बारामती एयरफील्ड एक ‘अनकंट्रोल्ड’ श्रेणी में आता है, जहां कोई इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) नहीं है। यह सिस्टम खराब विजिबिलिटी के दौरान विमान को गाइड करने में मदद करता है। मंत्रालय ने बताया कि गो-अराउंड (लैंडिंग रद्द कर दोबारा प्रयास) के बाद विमान को लैंडिंग की इजाजत दे दी गई थी, लेकिन क्रू ने एटीसी को कोई ‘रीड-बैक’ या जवाब नहीं दिया। संभवतः पायलटों को पतले रनवे को खोजने में दिक्कत हो रही थी, जिसके कारण अंततः यह भीषण दुर्घटना हुई।

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टाइमलाइन: मुंबई से बारामती तक के आखिरी 33 मिनट

FlightRadar24 के डेटा और मंत्रालय की रिलीज के अनुसार, आठ सीटों वाला यह लियरजेट 45 सुबह 8:10 बजे मुंबई एयरपोर्ट से उड़ा और दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ा। विमान ने समुद्र तल से 19,000 फीट की ऊंचाई तक चढ़ाई की और वेस्टर्न घाट को पार किया। सुबह 8:18 बजे विमान ने बारामती एयरपोर्ट से पहला संपर्क किया। कैप्टन सुमित कपूर, जिन्हें 15,000 घंटे से ज्यादा का अनुभव था, और को-पायलट शांभवी पाठक (1,500 घंटे का अनुभव) ने मौसम की जानकारी ली। सुबह 8:43 बजे विमान को रनवे 11 पर लैंडिंग के लिए क्लियर किया गया था। लेकिन इसके तुरंत बाद पायलट के आखिरी शब्द रिकॉर्ड हुए और 8:44 बजे एटीसी ने रनवे के पास आग की लपटें देखीं।

अजित ‘दादा’ पवार: एक युग का दुखद अंत

अजित पवार, जिन्हें लोग प्यार से ‘अजित दादा’ कहते थे, उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के राहुरी में हुआ था। वे बारामती में एक पब्लिक रैली में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वे महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक (अलग-अलग कार्यकाल में छह बार) डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की कैबिनेट में काम किया। सहकारी संगठनों, मिल्क यूनियन और चीनी फैक्ट्रियों के प्रबंधन में उनका योगदान अतुलनीय था। पवार का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके पैतृक निवास कटेवाड़ी लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

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राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

एनसीपी नेता अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में किया जाएगा। यह वही संस्थान है जिसे पवार परिवार ने शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए बनाया था। अंतिम यात्रा सुबह 9 बजे गदीमा (विद्या प्रतिष्ठान कैंपस) से शुरू होकर शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरेगी। इस बीच, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने अपील की है कि उनके भतीजे की मौत को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह एक दुर्घटना थी और इसमें राजनीति नहीं लानी चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे भी अंतिम संस्कार में शामिल होने बारामती पहुंच चुके हैं।

जांच की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल

AAIB और DGCA की टीमें घटनास्थल पर बारीकी से फोरेंसिक जांच कर रही हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाएगी। विमान का ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है और मलबा कई मीटर दूर तक बिखरा हुआ है, केवल पिछला हिस्सा (Tail Fin) ही सही-सलामत बचा है। इस हादसे ने छोटे और अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड्स पर सुरक्षा मानकों और वहां कैडेट्स द्वारा मैनेज किए जाने वाले ग्राउंड कंट्रोल पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, सतारा में अजित पवार के पीएसओ विदिप जाधव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में कर दिया गया है, जहां उनके छोटे बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी।

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