जोधपुर साध्वी सुसाइड नोट और मौत का सच: क्या है रहस्य?
राजस्थान के जोधपुर में मशहूर कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। 25 वर्षीय आध्यात्मिक उपदेशक की मौत के बाद तब गहरा सस्पेंस बन गया जब उनके सोशल मीडिया पर जोधपुर साध्वी सुसाइड नोट जैसा एक पोस्ट सामने आया।
बोरानाडा पुलिस ने बॉडी को कब्जे में लेकर MGH मॉर्चरी में रखवाया है, जहाँ मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। ACP (वेस्ट) छवि शर्मा के अनुसार, साध्वी पिछले दो दिनों से बीमार थीं और बुधवार को आश्रम में एक व्यक्ति द्वारा दिए गए इंजेक्शन के बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
बुखार का इंजेक्शन और रहस्यमयी बेहोशी
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की कहानी बुधवार शाम से शुरू होती है। उनके पिता, जो खुद भी एक धार्मिक उपदेशक हैं, उन्होंने बताया कि प्रेम बाईसा लंबे समय से सर्दी और खांसी से परेशान थीं। बुधवार को बुखार बढ़ने पर एक कंपाउंडर को इंजेक्शन लगाने के लिए आश्रम बुलाया गया।
जैसे ही कंपाउंडर ने उन्हें इंजेक्शन दिया, वह कुछ ही मिनटों में बेहोश हो गईं। आनन-फानन में उनके पिता और एक सहयोगी उन्हें पाल रोड स्थित प्रेक्षा अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन-डेड’ घोषित कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, जब उन्हें लाया गया तब उनकी जान जा चुकी थी।
इसे भी पढ़े :-सोनम वांगचुक पर NSA और लद्दाख में गहराता संवैधानिक संकट
मौत के 4 घंटे बाद सोशल मीडिया पर ‘अग्नि परीक्षा’ पोस्ट
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब साध्वी की मौत के करीब चार घंटे बाद, रात 9:30 बजे उनके इंस्टाग्राम हैंडल से एक पोस्ट शेयर किया गया। जोधपुर साध्वी सुसाइड नोट के रूप में देखे जा रहे इस पोस्ट ने पुलिस की जांच की दिशा बदल दी है।
इस पोस्ट में “अग्नि परीक्षा”, “गुडबाय” और “जस्टिस” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। साध्वी ने लिखा, “मैं इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह रही हूँ, फिर भी मुझे भगवान और पूज्य संतों पर पूरा भरोसा है।
अगर मुझे जीते जी इंसाफ नहीं मिला, तो जाने के बाद जरूर मिलेगा।” पुलिस अब इस तकनीकी पहलू की जांच कर रही है कि क्या यह पोस्ट पहले से शेड्यूल था या किसी और ने अकाउंट एक्सेस करके इसे अपलोड किया है।
पिता की हिचकिचाहट और संदिग्ध व्यवहार
पुलिस की जांच में परिवार, खासकर साध्वी के पिता का व्यवहार भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट के अनुसार, पिता ने शुरू में पुलिस शिकायत करने या पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति देने में काफी हिचकिचाहट दिखाई थी। इतना ही नहीं, जब अस्पताल ने शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस का ऑफर दिया, तो पिता ने उसे ठुकरा दिया और अपनी पर्सनल गाड़ी में बॉडी को वापस आश्रम ले गए।
इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर के खिलाफ भी परिवार ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। हालांकि, पुलिस ने कस्टडी की चेन बनाए रखने के लिए मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराना अनिवार्य कर दिया ताकि इंजेक्शन रिएक्शन या किसी अन्य साजिश का पता चल सके।
पुराने वीडियो विवाद और ब्लैकमेलिंग का एंगल
जांच के दौरान एक पुराना विवाद भी सामने आया है। करीब छह महीने पहले साध्वी प्रेम बाईसा ने अपने पुराने स्टाफ पर ब्लैकमेलिंग और बदनामी का आरोप लगाया था। आरोप था कि जोगेंद्र उर्फ जोगाराम नाम का व्यक्ति, जो प्रवचनों में साउंड सिस्टम लगाता था, उसने एक ‘डॉक्टर्ड’ (एडिटेड) वीडियो के जरिए साध्वी को बदनाम करने की कोशिश की थी और 20 लाख रुपये की मांग की थी।
उस समय पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर फिर से वीडियो सर्कुलेट करना शुरू कर दिया। जोधपुर साध्वी सुसाइड नोट में भी इसी मानसिक प्रताड़ना और ‘चरित्र हनन’ की ओर इशारा किया गया है।
इसे भी पढ़े :-जयपुर ट्रक हादसा: नशे में धुत ड्राइवर ने 5 KM तक रौंदा, 19 की मौत
इंस्टाग्राम पोस्ट से गहराया साजिश का शक
साध्वी के इंस्टाग्राम पर 7.05 लाख फॉलोअर्स थे और उनकी मौत के बाद आए पोस्ट ने उनके समर्थकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने आदि जगद्गुरु शंकराचार्य और महान संतों को पत्र लिखकर अपनी शुद्धता साबित करने के लिए “अग्नि-परीक्षा” की मांग की थी।
भक्तों का आरोप है कि साध्वी पर ऑनलाइन ट्रोलिंग और गाली-गलौज के कारण बहुत ज्यादा मानसिक दबाव था। कुछ थ्योरी यह भी कहती हैं कि पूरी घटना को आत्महत्या दिखाने के लिए रचा गया था, क्योंकि जोधपुर साध्वी सुसाइड नोट के आने के बाद सुसाइड और हत्या के दावों के बीच जंग छिड़ गई है।
आश्रम में हंगामा और CCTV फुटेज का गायब होना
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की खबर फैलते ही आरती नगर स्थित उनके साधना कुटीर आश्रम के बाहर भारी संख्या में भक्त जमा हो गए। समर्थकों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नारेबाजी की। भक्तों का गंभीर आरोप है कि आश्रम से कुछ महत्वपूर्ण CCTV फुटेज गायब कर दिए गए हैं ताकि सच को दबाया जा सके।
कुछ लोगों ने उनके पिता की भूमिका पर भी संदेह जताया है। प्रदर्शनकारियों के दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कंपाउंडर को हिरासत में ले लिया है और उसके मेडिकल उपकरण जब्त कर लिए हैं ताकि यह पता चल सके कि इंजेक्शन में कौन सी दवा थी।
इसे भी पढ़े :-सोनम वांगचुक हिरासत पर SC में नया मोड़: लद्दाख प्रदर्शन हिंसा NSA
पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार पर विवाद
गुरुवार को महात्मा गांधी अस्पताल (MGH) में मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम संपन्न हुआ, लेकिन विवाद थमा नहीं। शव को सौंपने के समय संत समुदाय और परिवार के बीच मतभेद पैदा हो गए। संत समुदाय के सदस्य चाहते हैं कि सनातन परंपरा के अनुसार साध्वी को समाधि दी जाए, जबकि उनके पिता शव को अपने घर ले जाना चाहते थे।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की सच्चाई, सोशल मीडिया ट्रोलिंग और ब्लैकमेलिंग समेत सभी कड़ियों को जोड़कर जल्द ही इस रहस्यमयी मौत का पर्दाफाश किया जाएगा।
इसे भी पढ़े :-लद्दाख हिंसा के बाद सोनम वांगचुक NSA गिरफ्तारी, और सियासी घमासान



Post Comment