भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता में INS उदयगिरि और हिमगिरि शामिल
“भविष्य की दृष्टि से हमारे सशस्त्र बलों को मज़बूत करना” – इस मंत्र को साकार करते हुए भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापत्तनम में दो अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS उदयगिरि और INS हिमगिरि को नौसेना में शामिल किया।
यह मील का पत्थर न केवल भारत की बढ़ती नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम भी है।
पहली बार दो शिपयार्ड से एक साथ युद्धपोत
- INS उदयगिरि : मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में निर्मित
- INS हिमगिरि : कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में निर्मित
यह पहली बार है जब दो अलग-अलग शिपयार्डों से बने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत एक साथ नौसेना में शामिल हुए।
आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक फैसला
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि अब भारत अपनी नौसेना के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि INS तमाल भारतीय नौसेना का अंतिम विदेशी ऑर्डर था।
यह कदम भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता के युग की शुरुआत का प्रतीक है।
शक्ति प्रदर्शन नहीं, सुरक्षा का संकल्प
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में कहा:
- भारत ने कभी भी विस्तारवादी नीति नहीं अपनाई।
- लेकिन जब भी सुरक्षा को चुनौती मिलेगी, भारत निर्णायक जवाब देगा।
- उद्देश्य केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री सीमाओं की रक्षा है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोत
ये दोनों युद्धपोत शिवालिक श्रेणी के उन्नत संस्करण हैं।
इनकी विशेषताएँ:
- स्टील्थ डिज़ाइन जो रडार, इन्फ्रारेड और चुंबकीय संकेत कम करता है।
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें, टॉरपीडो लांचर और अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली।
- 75% उपकरण भारतीय कंपनियों, विशेषकर MSMEs, से प्राप्त।
- INS उदयगिरि, नौसेना के युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया 100वां जहाज़।
हिंद महासागर में भारत की भूमिका
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की सुरक्षा भारत की ऊर्जा और आर्थिक आवश्यकताओं से जुड़ी है।
INS उदयगिरि और हिमगिरि के शामिल होने से नौसेना की क्षमता में ये बड़े बदलाव आएंगे:
- समुद्री डकैती, तस्करी और आतंकवाद से सुरक्षा
- प्राकृतिक आपदाओं में राहत और बचाव कार्य
- हिंद महासागर से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक सतत गश्त
- चीन और पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों का जवाब
राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि नौसेना की तैनाती क्षमता अब वैश्विक मानकों पर है।
विरासत का सम्मान और नया युग
INS उदयगिरि और हिमगिरि के नाम उन युद्धपोतों पर रखे गए हैं जिन्होंने तीन दशकों से अधिक देश की सेवा की थी।
नए जहाज़ उनकी विरासत का सम्मान करते हैं और नौसेना की नई क्षमताओं का प्रतीक हैं।
राजनीतिक और सामरिक विश्लेषण
यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है।
- चीन की नौसैनिक ताकत का तेजी से विस्तार।
- पाकिस्तान की समुद्री रणनीति और ग्वादर बंदरगाह का उपयोग।
- अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भारत की साझेदारी।
इन जहाज़ों का शामिल होना भारत की सामरिक स्वायत्तता और भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता दोनों का प्रमाण है।
INS उदयगिरि और हिमगिरि का नौसेना में शामिल होना केवल दो युद्धपोतों का जुड़ना नहीं है।
यह भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता, सामरिक दृष्टि और समुद्री सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग है।
अब भारतीय नौसेना न केवल हिंद महासागर में, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक सशक्त और आत्मनिर्भर ताकत के रूप में उभर रही है।



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