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CJI सूर्यकांत की टिप्पणी ‘युवा कॉकरोच जैसे एक्टिविस्टों वकीलों को फटकार

CJI सूर्यकांत की टिप्पणी

CJI सूर्यकांत की टिप्पणी देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को एक ऐसी सुनवाई हुई, जिसकी गूँज कानूनी गलियारों से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुँच गई है।

‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा पाने की होड़ में लगे एक वकील को फटकार लगाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न केवल याचिकाकर्ता के आचरण पर सवाल उठाए, बल्कि बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्टों के एक वर्ग की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” (Parasites) से कर दी।

यह मामला तब सामने आया जब जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच वकील संजय दुबे की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट पदनाम देने में हो रही देरी को ‘कोर्ट की अवमानना’ बताया गया था।

“सम्मान माँगा नहीं, कमाया जाता है”

सुनवाई शुरू होते ही बेंच ने याचिकाकर्ता के आक्रामक रुख पर नाराज़गी जताई। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसके पीछे भागा जाए या जिसे कानूनी दबाव बनाकर हासिल किया जाए।

उन्होंने पूछा, “क्या यह पद अब सिर्फ एक ‘स्टेटस सिंबल’ बनकर रह गया है? यह सम्मान न्याय प्रणाली में आपके योगदान के लिए दिया जाता है, दिखावे के लिए नहीं।”

बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “पूरी दुनिया शायद सीनियर बनने के योग्य हो सकती है, लेकिन कम से कम आप (याचिकाकर्ता) तो इसके हकदार बिल्कुल नहीं हैं।”

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फर्जी डिग्रियों और बार काउंसिल पर तंज

सुनवाई के दौरान CJI ने कानूनी पेशे में बढ़ती गंदगी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चिंता जताई कि आज अदालतों में “काले चोगे” पहनकर घूमने वाले हज़ारों लोगों की डिग्रियां संदेहास्पद हैं।

CBI जाँच का संकेत: अदालत ने कहा कि वह एक उपयुक्त मामले का इंतज़ार कर रही है ताकि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को फर्जी लॉ डिग्रियों के राष्ट्रव्यापी रैकेट की जाँच करने का निर्देश दिया जा सके।

बार काउंसिल की लाचारी: CJI ने तंज कसते हुए कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) इन फर्जी वकीलों पर कार्रवाई नहीं करेगी क्योंकि “उन्हें अपने वोटों की चिंता रहती है।”

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अनुशासन का पाठ और याचिका की वापसी

CJI ने याचिकाकर्ता को अनुशासन का महत्व समझाते हुए कहा, “अगर आप लोग आपस में एक-दूसरे का सम्मान नहीं करेंगे, तो समाज आपकी इज्ज़त क्यों करेगा?” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें यह दर्जा दे भी देता है, तो उनके वर्तमान आचरण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर सकता है।

बेंच के कड़े रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता संजय दुबे ने अपनी गलती स्वीकार की, अदालत से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अर्जी मंजूर करते हुए मामला बंद कर दिया।

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एक बड़ा संदेश

CJI सूर्यकांत की इन टिप्पणियों ने जहाँ एक ओर न्यायिक अनुशासन और वकीलों के पेशेवर आचरण पर बड़ा संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर ‘बेरोजगारों’ और ‘एक्टिविस्टों’ के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों ने सार्वजनिक विमर्श में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

यह मामला याद दिलाता है कि न्यायपालिका केवल कानूनी तर्कों पर ही नहीं, बल्कि मर्यादा और शालीनता के मानदंडों पर भी कड़ी नज़र रखती है। CJI सूर्यकांत की टिप्पणी रिपोर्ट से मचा हड़कंप।

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