“CJP दूसरा आंदोलन” ‘हमारी भलमनसाहत को कमजोरी न समझे केंद्र’,
CJP दूसरा आंदोलन देश के युवाओं, छात्रों और नीट (NEET-UG) अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर एक बार फिर दिल्ली की सियासत में उबाल आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेते समय सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने में टाल-मटोल न की जाए।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने अपना रुख नहीं बदला तो देश भर में फिर से शांतिपूर्ण ‘आंदोलन 2.0’ (Protests 2.0) शुरू किया जा सकता है।
सोमवार को CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें केंद्र सरकार की अब तक की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति की समीक्षा की जाएगी।
‘सद्भावना से वापस लिया था आंदोलन, विश्वासघात न करे सरकार’
शनिवार को नई दिल्ली में एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए CJP नेतृत्व ने कहा कि 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सरकार के लिखित व मौखिक आश्वासनों के बाद ही राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन स्थगित किए गए थे।
पार्टी ने अपने बयान में प्रमुख बातें रखीं:
निर्णय को कमजोरी न समझें: CJP ने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सद्भावना के तहत आंदोलन वापस लिया गया था। सरकार इसे संगठन की कमजोरी समझने की भूल न करे।
युवाओं से छलावा: सरकार की ओर से अभी तक वादों को लागू करने की कोई औपचारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। वादों को टालने या उनका सम्मान न करने की कोशिश को देश की युवा पीढ़ी के साथ “विश्वासघात” माना जाएगा।
आंदोलन की तैयारी: पार्टी ने अपने समर्थकों, छात्रों और स्वयंसेवकों को आपातकालीन स्थिति और नए सिरे से आंदोलन के लिए तैयार रहने को कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केंद्र की हिचकिचाहट पर सवाल
यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट की उस सुनवाई के बाद और गहरा गया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने देश भर में छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) की एक एकीकृत सूची मांगी थी। अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को रद्द करने पर विचार कर रही है।
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने केंद्र सरकार के रवैये पर कड़ा एतराज जताया है।
सौरव दास ने कहा:
“जब सुप्रीम कोर्ट खुद सरकार से उन सभी FIRs की सूची मांग रहा है जिन्हें रद्द किया जाना है, तो सरकार इसे सौंपने में हिचकिचाहट क्यों दिखा रही है? हमारे साथ टाल-मटोल का खेल न खेला जाए, हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। निर्दोष छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।”
CJP की प्रमुख मांगें: जिन पर सरकार ने दिया था आश्वासन
पार्टी का आरोप है कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान जिन मुख्य बिंदुओं पर सहमति जताई थी, उन पर अमल करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं:
छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करना: जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान छात्रों व प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले बिना किसी शर्त के वापस लिए जाएं।
दंडात्मक कार्रवाई पर रोक: भविष्य में किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी या छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने की गारंटी दी जाए।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा: मई में NEET-UG पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को उचित वित्तीय मुआवजा दिया जाए।
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संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई का पृष्ठभूमि इतिहास
इस पूरे विवाद की जड़ें 20 जुलाई को हुए उस घटनाक्रम से जुड़ी हैं, जब जंतर-मंतर पर कई हफ्तों से चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद CJP समर्थकों और छात्रों ने संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई: मध्य दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था।
दिल्ली पुलिस का हलफनामा: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दावा किया था कि उन्होंने न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए अधिकतम संयम बरता।
अपराधिक रिकॉर्ड का दावा: पुलिस के मुताबिक, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई थी जिनका पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड था। हालांकि, CJP का कहना है कि पुलिस अपराधियों के बहाने आम बेकसूर छात्रों को निशाना बना रही है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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सोमवार की बैठक पर टिकीं देश के युवाओं की निगाहें
सोमवार को होने वाली CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बेहद निर्णायक मानी जा रही है। इस बैठक में तय होगा कि पार्टी सरकार को और समय देगी या फिर दिल्ली समेत पूरे देश में दोबारा सड़कों पर उतरकर ‘आंदोलन 2.0’ का बिगुल फूंकेगी। नागरिक समाज के समर्थन और राष्ट्रव्यापी रणनीतियों के बाद जानें सीजेपी दूसरा आंदोलन की पूरी इनसाइड स्टोरी सामाजिक न्याय की मांगों और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के बीच शुरू हुआ सीजेपी दूसरा आंदोलन नागरिक समाज के समर्थन और राष्ट्रव्यापी रणनीतियों के बाद जानें CJP दूसरा आंदोलन की पूरी इनसाइड स्टोरी
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