थरूर की आडवाणी तारीफ: कांग्रेस में थरूर का भविष्य खतरे में
कांग्रेस में थरूर का भविष्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा भाजपा के संस्थापक स्तंभों में से एक लालकृष्ण आडवाणी की प्रशंसा करना, कांग्रेस पार्टी के भीतर एक गहरे वैचारिक और संगठनात्मक संकट को जन्म दे चुका है।
यह पहली बार नहीं है जब थरूर ने पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया हो, लेकिन इस बार उनका बयान सीधा पार्टी की मूल विचारधारा और राजनीतिक विरोध की बुनियाद पर चोट करता दिख रहा है।
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“कम्युनलिज्म के डिजाइनर” की तारीफ ने बढ़ाई बेचैनी
तिरुवनंतपुरम के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने लालकृष्ण आडवाणी को ‘सच्चा राजनेता’ बताते हुए उनकी सार्वजनिक सेवा की प्रशंसा की।
हालाँकि, आलोचकों का एक वर्ग, जो आडवाणी को ‘कम्युनलिज्म के डिजाइनर’ और ‘नरेंद्र मोदी के क्रिएटर’ के रूप में देखता है, इस प्रशंसा को पार्टी के सिद्धांतों के साथ विश्वासघात मान रहा है।
इस वर्ग का मानना है कि आडवाणी के कार्यों ने देश को लगभग बर्बाद कर दिया है, और ऐसे व्यक्ति की तारीफ करना कांग्रेस की विचारधारा से पूरी तरह से दिग्भ्रमित होना है। यह बयान कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं को असहज कर रहा है जो हमेशा से आडवाणी की राजनीति का विरोध करते आए हैं।
दिग्भ्रमित शशि थरूर पर कांग्रेस कब दिखाएगी सख्ती?
जिस भाषा में थरूर ने आडवाणी का महिमामंडन किया, उसने कांग्रेस के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या थरूर जानबूझकर पार्टी को असहज कर रहे हैं या यह सचमुच उनका दिग्भ्रमित विचार है।
थरूर ने अपनी टिप्पणी को सही ठहराते हुए तर्क दिया था कि किसी भी राजनेता के संपूर्ण करियर का आकलन किसी एक घटना से नहीं किया जा सकता, ठीक वैसे ही जैसे पंडित नेहरू के करियर को चीन की विफलता से और इंदिरा गांधी के करियर को सिर्फ आपातकाल से नहीं आंका जा सकता।
पार्टी के भीतर एक बड़ा खेमा सवाल पूछ रहा है कि ऐसे लगातार विवादास्पद बयान देने वाले दिग्भ्रमित शशि थरूर को कांग्रेस कब बाहर का रास्ता दिखाएगी?
वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि थरूर के ऐसे बयानों के कारण पार्टी का केंद्रीय विरोध का रुख कमजोर होता है और भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस पर पलटवार करने का मौका मिल जाता है।
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कांग्रेस में थरूर का भविष्य: क्या कार्रवाई से डरती है पार्टी?
यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर कांग्रेस में थरूर का भविष्य क्या होगा, जब वह लगातार पार्टी लाइन के विपरीत जा रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व के लिए थरूर एक असहज सच्चाई बन गए हैं।
एक तरफ, वह पार्टी के सबसे वाक्पटु और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त चेहरों में से एक हैं, जो केरल में पार्टी का एक महत्वपूर्ण चेहरा हैं। दूसरी ओर, वह अक्सर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ विचार व्यक्त करते रहे हैं, चाहे वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार का समर्थन करना हो या अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ चुनौती देना।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि थरूर पर कोई भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पार्टी को केरल की राजनीति में बड़ा नुकसान हो सकता है, जहां वह एक मजबूत और लोकप्रिय चेहरा हैं। इसलिए, कांग्रेस नेतृत्व एक धर्म संकट में है – सख्ती दिखाने पर थरूर के पार्टी छोड़ने का खतरा है, और ढील देने पर पार्टी के वैचारिक आधार का क्षरण।
थरूर के बयान पर कांग्रेस का आधिकारिक किनारा
विवाद बढ़ने के तुरंत बाद, कांग्रेस ने थरूर के बयान से आधिकारिक तौर पर किनारा कर लिया। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि शशि थरूर के विचार उनकी व्यक्तिगत हैसियत के हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके हालिया बयान से खुद को अलग रखती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीडब्ल्यूसी सदस्य के रूप में थरूर का ऐसा करना कांग्रेस की विशिष्ट लोकतांत्रिक और उदारवादी भावना को दर्शाता है।
हालांकि, यह स्पष्टीकरण केवल पार्टी के अंदरूनी कलह को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास मात्र माना जा रहा है। इस बयान के बाद भी, जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज़ है कि कांग्रेस में थरूर का भविष्य अब अनिश्चितता के भंवर में है।
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नेहरू-इंदिरा से आडवाणी की तुलना पर सियासी तूफान
थरूर ने आडवाणी की लंबी सेवा को सिर्फ ‘रथ यात्रा’ जैसे एक प्रकरण तक सीमित न करने की अपील करते हुए, उनकी तुलना नेहरू और इंदिरा गांधी से की थी।
उनका तर्क था, “नेहरूजी के संपूर्ण करियर का आकलन चीन की विफलता से नहीं किया जा सकता, न ही इंदिरा गांधी के करियर का आकलन सिर्फ आपातकाल से किया जा सकता है। मेरा मानना है कि हमें आडवाणीजी के प्रति भी यही शिष्टाचार दिखाना चाहिए।”
इस तुलना ने कांग्रेस और भाजपा, दोनों को नाखुश कर दिया है। जहाँ कांग्रेस के भीतर इसे गांधी परिवार के सम्मान पर आघात के रूप में देखा गया, वहीं भाजपा के एक खेमे ने आडवाणी को नेहरू के समकक्ष रखने को भी स्वीकार नहीं किया।
भाजपा को मिला कांग्रेस पर तंज कसने का मौका
थरूर के बयान ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कांग्रेस की असहिष्णुता पर तंज कसने का सुनहरा अवसर प्रदान कर दिया है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कांग्रेस की असहिष्णुता की भावना को दर्शाता है, जिसके लिए कोई भी प्रतिद्वंद्वी दुश्मन जैसा है। उन्होंने कांग्रेस की प्रतिक्रिया को ‘इंदिरा नाज़ी कांग्रेस’ की असहिष्णुता तक बता दिया। इस तरह, थरूर का यह कदम जाने-अनजाने भाजपा के नैरेटिव को मजबूत कर रहा है।
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क्या थरूर को निष्कासित करेगी कांग्रेस?
मौजूदा राजनीतिक हालात में, कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं है। थरूर का लगातार बागी तेवर, उनका कद और केरल की राजनीति में उनकी उपयोगिता, पार्टी को उन्हें निष्कासित करने से रोक रही है।
हालाँकि, यदि पार्टी इस बार कोई सख्त संदेश नहीं देती है, तो इससे अन्य नेताओं को भी पार्टी लाइन से भटकने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
इसलिए, यह देखना होगा कि कांग्रेस इस ‘दिग्भ्रमित’ नेता के साथ कैसे पेश आती है और किस तरह कांग्रेस में थरूर का भविष्य तय किया जाता है। पार्टी को अपने वैचारिक आधार को बचाए रखने के लिए जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेना होगा, जिससे देश लगभग बर्बाद होने की बहस करने वाले आलोचकों को भी जवाब दिया जा सके।



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