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गंभीर वायु प्रदूषण शहरों में बढ़ता ज़हर, सेहत और पर्यावरण पर गहरा असर

गंभीर वायु प्रदूषण

देश की राजधानी दिल्ली में रविवार की सुबह बेहद डरावनी रही, जहाँ गंभीर वायु प्रदूषण ने पूरी दिल्ली को अपनी आगोश में ले लिया। इंडिया गेट के पास कर्तव्य पथ पर लोग धुंध की मोटी चादर के बीच चलते हुए दिखाई दिए। रविवार सुबह 6 बजे शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 391 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के बिल्कुल मुहाने पर था।

हालाँकि, सुबह 8 बजे तक यह बढ़कर 392 हो गया। शुक्रवार को यह 332 था, जो लगातार गिरते तापमान और हवाओं की धीमी गति के कारण बिगड़ता चला गया। सैटेलाइट तस्वीरों से स्पष्ट हुआ है कि भारत-गंगा के मैदानों में कोहरे की एक मोटी परत जमी हुई है, जिसने प्रदूषण के कणों को सतह के पास ही रोक दिया है।

दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार, नोएडा की हालत बेहद खराब

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के समीर ऐप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 40 में से 20 स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शादीपुर (447) और आनंद विहार (445) रहे। इसके अलावा जहांगीरपुरी में 430, वज़ीरपुर में 443, अशोक विहार में 429, बवाना में 423, चांदनी चौक में 418 और आरके पुरम में 409 AQI रिकॉर्ड किया गया।

दिल्ली के साथ-साथ पड़ोसी शहरों में भी स्थिति चिंताजनक है; नोएडा में प्रदूषण का स्तर 443 (गंभीर) तक पहुँच गया है, जबकि गुरुग्राम में 355, गाजियाबाद में 304 और फरीदाबाद में 288 दर्ज किया गया। शहर में स्मॉग छाया हुआ है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं।

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IGI एयरपोर्ट पर कोहरे का साया और 150 से ज्यादा उड़ानें लेट

मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि रविवार सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी गिरकर 500 मीटर तक रह गई। हालाँकि कुछ अन्य स्टेशनों जैसे पठानकोट, अमृतसर, आगरा, ग्वालियर और कानपुर में विजिबिलिटी शून्य तक गिर गई थी, लेकिन दिल्ली में हल्का कोहरा होने के बावजूद हवाई यातायात पर बुरा असर पड़ा।

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के अनुसार, कम विजिबिलिटी के कारण IGI एयरपोर्ट पर 150 से अधिक उड़ानें देरी से चल रही थीं। सुबह 4:30 से 8:30 बजे के बीच कोहरे का सबसे ज्यादा असर देखा गया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

न्यूनतम तापमान में गिरावट और मौसम विभाग का येलो अलर्ट

राजधानी में सर्दी का सितम भी बढ़ रहा है। रविवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 6.3°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम है। एक दिन पहले शनिवार को यह 7.8°C था। मौसम विभाग ने मौजूदा स्थितियों को देखते हुए दिल्ली-NCR के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें घने कोहरे और शीतलहर की स्थिति की चेतावनी दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में उत्तर भारत को प्रभावित करने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्रदूषण का स्तर ऊंचा ही रहेगा। 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की उम्मीद है, जिससे नए साल के स्वागत के दौरान भी लोगों को जहरीली हवा से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

GRAP-4 के तहत दिल्ली सरकार के बड़े फैसले और स्थायी प्रतिबंध

गंभीर वायु प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)-4 के तहत दो प्रमुख प्रतिबंध अब स्थायी रहेंगे। अब दिल्ली में बिना वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट’ (PUCC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ का यह नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके अलावा, दिल्ली के बाहर से आने वाले ऐसे वाहनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है जो भारत स्टेज VI (BS6) उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि निवासियों को बार-बार होने वाली प्रदूषण की कठिनाइयों से बचाया जा सके।

प्रदूषण के मुख्य कारणों का खुलासा: वाहनों का सबसे बड़ा योगदान

एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के डेटा ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। शनिवार को दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का था, जो कुल हिस्सेदारी का 16.2 प्रतिशत रहा।

इसके बाद औद्योगिक उत्सर्जन का हिस्सा 8.5 प्रतिशत, आवासीय उत्सर्जन 4 प्रतिशत और बायोमास जलाने का योगदान 1.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। शांत हवाओं और गिरते तापमान ने इन प्रदूषकों को वायुमंडल में फैलने से रोक दिया, जिससे शहर एक गैस चैंबर में तब्दील हो गया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक हवा की गति नहीं बढ़ती, यह स्थिति बनी रहेगी।

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इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पर फोकस: जल निकायों और ई-वेस्ट पार्क को मंजूरी

प्रदूषण के खिलाफ इस लंबी लड़ाई को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिए हैं। कैबिनेट ने दिल्ली के जल निकायों के कायाकल्प के लिए 100 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। राजधानी के लगभग 1,000 जल निकायों में से 160 सीधे दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

इसके अतिरिक्त, होलंबी कलां में 11.5 एकड़ में दिल्ली का पहला ‘ई-वेस्ट इको-पार्क’ स्थापित किया जाएगा। यह भारत की पहली ऐसी अत्याधुनिक सुविधा होगी जो ज़ीरो-वेस्ट मॉडल पर काम करेगी और पानी को पूरी तरह रीसायकल करेगी, जिससे पर्यावरणीय गवर्नेंस में सुधार होगा।

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कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य चेतावनी और एहतियाती कदम

दिल्ली की हवा लगातार ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणियों के बीच झूल रही है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। गंभीर वायु प्रदूषण के इस दौर में विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी (जैसे अस्थमा) से पीड़ित लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम के समय बाहर जाने से बचें।

लोगों से मास्क पहनने और बाहरी गतिविधियों को सीमित करने का आग्रह किया गया है। AQI के मानकों के अनुसार, 400 से ऊपर की रेटिंग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। सरकार ने एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन के जरिए स्टेज III के तहत निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर भी कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं ताकि धूल और धुएं पर नियंत्रण पाया जा सके।

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शहरों में गंभीर वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है। बढ़ते वाहन, निर्माण कार्य और औद्योगिक धुएं से सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर वायु प्रदूषण सबसे बड़ा खतरा बन चुका है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

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