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दिल्ली में निर्भया जैसी दरिंदगी: प्राइवेट स्लीपर बस में महिला से गैंगरेप,

दिल्ली बस गैंगरेप

दिल्ली बस गैंगरेप देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर ‘रेप कैपिटल’ के उस कलंक से जूझ रही है, जिसे धोने की कोशिशें पिछले एक दशक से जारी थीं। 12 मई की रात रानी बाग इलाके में एक प्राइवेट स्लीपर बस के भीतर जो हुआ, उसने 2012 के ‘निर्भया कांड’ की उन खौफनाक यादों को ताज़ा कर दिया है जिसे पूरा देश भूलना चाहता था।

एक कामकाजी महिला, जो अपने बच्चों के पास घर लौटने की उम्मीद में बस स्टैंड पर खड़ी थी, उसे हवस का शिकार बनाकर बस से बाहर फेंक दिया गया।

वारदात की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, पीड़िता सरस्वती विहार के बी-ब्लॉक बस स्टैंड पर खड़ी थी। वह एक फैक्ट्री में काम खत्म करके घर लौट रही थी। उसने वहां खड़ी एक प्राइवेट स्लीपर बस के पास मौजूद व्यक्ति से समय पूछा। आरोपी ने मदद करने के बजाय उसे खींचकर बस के अंदर कर लिया।

बस की खिड़कियों पर अवैध रूप से ‘टिंटेड ग्लास’ (काले शीशे) लगे थे, जिसके कारण बाहर से कुछ भी देख पाना नामुमकिन था। बस के भीतर ड्राइवर और कंडक्टर ने मिलकर महिला के साथ गैंगरेप किया और उसे नांगलोई ले जाकर सड़क पर फेंक दिया।

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कानूनी शिकंजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने रानी बाग थाने में ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:

धारा 64(1): बलात्कार के लिए सज़ा।धारा 70(1): सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) के विरुद्ध कठोर प्रावधान।धारा 3(5): साझा इरादे के साथ अपराध करना।

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों—ड्राइवर और कंडक्टर—को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल की गई स्लीपर बस को ज़ब्त कर लिया गया है और उसका फोरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है ताकि अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाई जा सके।

सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस बस में यह घिनौना कृत्य हुआ, उसमें सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। बस में न केवल प्रतिबंधित टिंटेड ग्लास थे, बल्कि उसमें कोई ‘इमरजेंसी एग्जिट‘ (आपातकालीन निकास) भी नहीं था। यह उस प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है जिसकी वजह से अपराधी इतने बेखौफ हो जाते हैं।

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एक मां का दर्द और समाज के सवाल

पीड़िता तीन बच्चों की मां है। इस घटना ने न केवल उस महिला के आत्मसम्मान को चोट पहुँचाई है, बल्कि उन हजारों कामकाजी महिलाओं के मन में फिर से डर पैदा कर दिया है जो रात के समय दिल्ली की सड़कों पर सफर करती हैं।

समाज और सरकार से यह बड़ा सवाल है कि निर्भया कांड के बाद बने कड़े कानूनों और ‘निर्भय फंड’ जैसी योजनाओं के बावजूद, दिल्ली की बसें महिलाओं के लिए असुरक्षित क्यों बनी हुई हैं?

जांच के अगले चरण

दिल्ली पुलिस अब इस बात की पुष्टि कर रही है कि क्या वारदात के वक्त बस चल रही थी और क्या उसमें कोई अन्य यात्री या चश्मदीद मौजूद था।

पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और उसका बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को ‘फास्ट ट्रैक’ पर रखकर अपराधियों को फांसी के फंदे तक पहुँचाने की कोशिश करेंगे।

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संपादकीय टिप्पणी:

यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि हमारे सिस्टम की विफलता का प्रमाण है। जब तक सड़कों पर गश्त और बसों की रैंडम चेकिंग जैसे कदम सख्ती से नहीं उठाए जाते, तब तक कानून की किताबें केवल कागज़ी शेर बनी रहेंगी।: दिल्ली बस गैंगरेप ने दहलाया देश ।

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