TCS नासिक POSH रिपोर्ट एक्ट’ की धज्जियां उड़ने का खुलासा
TCS नासिक POSH रिपोर्ट टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में चल रहे कथित उत्पीड़न के मामले ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर के निर्देश पर तैयार इस 50 पन्नों की रिपोर्ट को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंप दिया गया है। रिपोर्ट में नासिक दफ्तर के माहौल को “बेहद परेशान करने वाला और ज़हरीला” बताया गया है, जहाँ न केवल महिला सुरक्षा के नियमों (POSH Act) की अनदेखी हुई, बल्कि व्यवस्थित रूप से धार्मिक उत्पीड़न भी किया गया।
आरोपियों का ‘कब्ज़ा’ और कमज़ोर लड़कियों को निशाना
NCW की फैक्ट-फाइंडिंग टीम, जिसमें रिटायर्ड जस्टिस साधना जाधव और पूर्व DGP BK सिन्हा जैसे अनुभवी सदस्य शामिल थे, ने पाया कि नासिक ऑफिस पर दानिश शेख, तौसीफ अत्तार और रज़ा मेमन नाम के तीन आरोपियों का पूरी तरह नियंत्रण था। रिपोर्ट के अनुसार, इस तिकड़ी को वरिष्ठ अधिकारी अश्विनी चैनानी का संरक्षण प्राप्त था।
ये आरोपी कथित तौर पर कम उम्र की और ‘जेनरेशन Z’ की उन लड़कियों को निशाना बनाते थे जो पेशेवर रूप से कमज़ोर थीं। इन लड़कियों का यौन, भावनात्मक और मानसिक उत्पीड़न किया गया और विरोध करने पर नौकरी से निकालने या तबादले की धमकी दी गई।
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धार्मिक भावनाओं के अपमान का गंभीर मुद्दा
रिपोर्ट में सबसे संवेदनशील खुलासा धार्मिक उत्पीड़न को लेकर हुआ है। महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि आरोपी हिंदू मान्यताओं, परंपराओं और पौराणिक कथाओं का मज़ाक उड़ाते थे।
आरोपियों ने कथित तौर पर एक धर्म विशेष को दूसरे से बेहतर दिखाने की कोशिश की और कार्यस्थल पर “धर्म-विरोधी” टिप्पणियां करके दबाव का माहौल बनाया।
समिति ने इसे “व्यवस्थित उत्पीड़न” और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 का स्पष्ट उल्लंघन माना है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित है।
POSH एक्ट का नामोनिशान नहीं: ‘कानून की सीधी अवमानना’
NCW ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि TCS नासिक में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ (POSH Act) का बिल्कुल भी पालन नहीं हो रहा था। जाँच में पाया गया कि:
पुणे और नासिक के लिए एक ही ‘साझा आंतरिक समिति’ (IC) थी, जो कानूनन गलत है।आंतरिक समिति के किसी भी सदस्य ने कभी नासिक ऑफिस का दौरा नहीं किया।
ऑफिस में कहीं भी समिति के सदस्यों के नाम या संपर्क विवरण वाले पोस्टर नहीं थे।हैरानी की बात यह है कि ऑफिस में लगे CCTV कैमरे भी खराब पाए गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखी।
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महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम और कानूनी पेंच
इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ (धर्मांतरण विरोधी कानून) को लेकर उठा। महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सरकार ने सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया है, लेकिन चूंकि इसे अभी राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए इसे इस मामले में पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत ही मुकदमा चलेगा, जिसमें छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराएं शामिल हैं।
NCW की प्रमुख सिफारिशें और चेतावनी
महिला आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए 25 से अधिक सुझाव दिए हैं:
कठोर दंड: POSH एक्ट की धारा 19, 25 और 26 का कड़ाई से पालन हो और उल्लंघन पर मिसाल कायम करने वाली सज़ा दी जाए।
सक्रिय IC समिति: आंतरिक समितियों को केवल कागज़ी ढांचा होने के बजाय सक्रिय रूप से कार्यस्थल का निरीक्षण करना चाहिए।
गवाह संरक्षण: पुलिस को ‘गवाह संरक्षण अधिनियम, 2017’ के तहत शिकायतकर्ताओं और गवाहों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।
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TCS प्रबंधन का रुख
हालांकि, TCS के CEO के. कृतिवासन और कंपनी के अन्य सूत्रों ने इन दावों को खारिज करने की कोशिश की है। प्रबंधन का कहना है कि उनके आंतरिक रिकॉर्ड में ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी और उनके ऑफिस में सुरक्षा के सभी मानक पूरे थे। लेकिन आयोग की रिपोर्ट ने इन दावों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
यह मामला केवल एक कॉर्पोरेट विवाद नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का हनन है। NCW की रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि रसूखदार संगठनों को भी कानून के ऊपर होने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। अब सबकी नज़रें महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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