धर्मस्थल केस में कर्नाटक सरकार बनाम भाजपा: सियासी घमासान,
धर्मस्थल मामले में कर्नाटक सरकार बनाम भाजपा की राजनीतिक तकरार और गहराती जा रही है। एक तरफ, सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पर भरोसा जता रही है, तो दूसरी तरफ, विपक्षी भाजपा लगातार इस मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग कर रही है। यह पूरा विवाद एक पूर्व सफाई कर्मचारी सीएन चिन्नय्या उर्फ़ चेन्ना के आरोपों से शुरू हुआ था, जिन्होंने दावा किया था कि उन्हें 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। इनमें महिलाओं और स्कूली छात्राओं के शव भी शामिल थे, जिन पर यौन उत्पीड़न के निशान थे।
चिन्नय्या, जो इस मामले में ‘मुखौटाधारी मुखबिर’ के रूप में सामने आए थे, को बाद में झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि एसआईटी की जांच में उनके द्वारा पेश किए गए सबूत झूठे पाए गए। फॉरेंसिक जांच से पता चला कि उन्होंने अदालत में जो खोपड़ी पेश की थी, वह एक पुरुष की थी, जबकि उन्होंने उसे एक युवती की खोपड़ी बताया था। एसआईटी ने 17 चिन्हित स्थलों पर खुदाई भी की, लेकिन सामूहिक दफन के दावों का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। इसके बावजूद, भाजपा इस मामले में कांग्रेस सरकार पर निशाना साध रही है।
ईडी ने शुरू की विदेशी फंडिंग की जांच
इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले से जुड़े कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की विदेशी फंडिंग की जांच शुरू करने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धर्मस्थल के खिलाफ “साजिश” के लिए कुछ गैर सरकारी संगठनों से कथित फंडिंग की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों ने कहा, “विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले एनजीओ जांच के घेरे में होंगे। ईडी ने पुलिस से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।” विदेशी फंडिंग नियमों के कथित उल्लंघन के लिए ओडानाडी और संवाद एनजीओ पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अधिकारियों को संदेह है कि इस धन का इस्तेमाल धर्मस्थल के खिलाफ अभियान या गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया होगा। बैंकों से खातों का विवरण और लेनदेन की जानकारी भी मांगी गई है। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईडी अपनी जांच करने के लिए स्वतंत्र है और वे इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
सरकार का रुख और भाजपा की मांग
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने मामले की एनआईए जांच से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि एसआईटी अपना काम कर रही है और मामले को किसी और एजेंसी को सौंपने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने भाजपा पर जांच में बाधा डालने का आरोप भी लगाया। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी भाजपा पर धर्मस्थल मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने भाजपा की ‘धर्मस्थल चलो’ रैली को “राजनीतिक यात्रा” करार दिया। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब एसआईटी का गठन हुआ था, तब भाजपा ने एनआईए जांच की मांग क्यों नहीं की थी। उन्होंने कहा कि शव न मिलने के बाद ही भाजपा ने केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग शुरू की। सिद्धारमैया ने यह भी याद दिलाया कि धर्मस्थल के पट्टाधिकारी डी. वीरेंद्र हेगड़े ने एसआईटी के गठन का स्वागत किया था, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जांच को पूरी छूट दी है। इस मामले में कर्नाटक सरकार बनाम भाजपा की राजनीतिक लड़ाई स्पष्ट रूप से दिख रही है, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
सौजन्या मामले की राजनीति
इस विवाद में सौजन्या मामले को भी घसीटा जा रहा है। 2012 में हुई 17 वर्षीय छात्रा सौजन्या की बलात्कार और हत्या के मामले में भाजपा दोबारा जांच की मांग कर रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि इस मामले की जांच पहले ही सीबीआई कर चुकी है और रिपोर्ट सौंप दी गई है। उन्होंने भाजपा पर सौजन्या के परिवार को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए उकसाने का आरोप लगाया। सिद्धारमैया ने आश्चर्य व्यक्त किया कि एक तरफ भाजपा हेगड़े के पक्ष में नारे लगा रही है और दूसरी तरफ सौजन्या के परिवार को उकसा रही है। यह दिखाता है कि यह मामला अब केवल कर्नाटक सरकार बनाम भाजपा के बीच का राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
एसआईटी प्रमुख प्रणब मोहंती ने गृह मंत्री से मुलाकात कर मामले की प्रगति की जानकारी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि एक महिला ने सौजन्या के अपहरण को देखने का दावा किया है और एसआईटी उसके दावों की भी जांच करेगी। मुख्यमंत्री ने इस पर कहा कि अगर किसी ने सच्चाई छुपाई है तो यह भी एक अपराध है। इस मामले में कर्नाटक सरकार बनाम भाजपा की लड़ाई लगातार जारी है,



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