ऑनलाइन खतरा: ई-कॉमर्स पर आतंकी कैसे खरीदते हथियार?
वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने ई-कॉमर्स पर आतंकी गतिविधियों को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनकी नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि आतंकवादी समूह हमलों के वित्तपोषण और उन्हें अंजाम देने के लिए डिजिटल तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। यह नई प्रवृत्ति वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। वैश्विक आतंकवादी वित्तपोषण निगरानी संस्था FATF ने कई केस स्टडीज का हवाला दिया है। ये बताती हैं कि कैसे आतंकवादियों ने पैसे की हेराफेरी की।
- FATF की रिपोर्ट में ई-कॉमर्स के दुरुपयोग पर प्रकाश डाला गया।
- आतंकवादी वित्तपोषण में ऑनलाइन भुगतान सेवाएं शामिल हैं।
- डिजिटल तकनीकें आतंकियों को छुपाने में मदद करती हैं।
मुख्य बिंदु :
1. FATF ने ई-कॉमर्स के जरिए आतंकी फंडिंग पर गहरी चिंता जताते हुए वैश्विक चेतावनी जारी की।
2. आतंकवादी अब डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर हमलों की योजना और वित्तपोषण में तेजी से माहिर हो रहे हैं।
3. पुलवामा हमले में ऑनलाइन शॉपिंग के माध्यम से विस्फोटक सामग्री की खरीद गंभीर खतरों को उजागर करती है।
4. गोरखनाथ हमले में PayPal और VPN का प्रयोग कर संदिग्ध विदेशी लेनदेन को छिपाया गया था।
5. FATF रिपोर्ट बताती है कि आतंकी अब सोशल मीडिया और गेमिंग से माइक्रोफंडिंग कर रहे हैं।
6. मानवीय सहायता के धन का आतंकी समूहों द्वारा दुरुपयोग वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती है।
7. FATF ने राज्य प्रायोजित आतंकवाद और संदिग्ध डिजिटल व्यवहारों के विश्लेषण की सिफारिश की है।
पुलवामा हमला: ऑनलाइन खरीद का खतरनाक उदाहरण
2019 का पुलवामा हमला इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। विस्फोटक उपकरण में इस्तेमाल हुआ मुख्य घटक, एल्युमीनियम पाउडर, कथित तौर पर अमेज़न से खरीदा गया था। इस सामग्री ने विस्फोट के प्रभाव को बढ़ाया था। जम्मू-कश्मीर में हुए इस आत्मघाती बम विस्फोट में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए।
- हमले का श्रेय जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को दिया गया था।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 19 लोगों पर आरोप लगाए।
- भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन पर सवाल उठाए हैं।
भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को पनाह दी है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान को FATF की “ग्रे लिस्ट” में रखा जाए।
गोरखनाथ हमला: डिजिटल लेनदेन की पड़ताल
2022 के गोरखनाथ मंदिर हमले में भी डिजिटल साधनों का इस्तेमाल हुआ। हमलावर ने ISIL के समर्थन में विदेशी संस्थाओं को ₹6.69 लाख PayPal के जरिए भेजे। उसने अपनी पहचान और IP पते को छिपाने के लिए VPN सेवाओं का उपयोग किया। आरोपी को एक विदेशी स्रोत से ₹10,323.35 भी मिले थे।
- PayPal ने संदिग्ध लेनदेन के कारण खाता निलंबित कर दिया।
- वित्तीय जांच में 44 अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन सामने आए।
- 69% न्यायक्षेत्रों में आतंकी वित्तपोषण जांच में कमी है।
यह मामला दिखाता है कि कैसे ऑनलाइन भुगतान सेवाएं कम पारदर्शिता देती हैं। इससे आतंकवादियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
आतंकवादियों की नई रणनीति: अकेला कलाकार और डिजिटल माध्यम
FATF की रिपोर्ट विकेंद्रीकृत अभियानों की ओर बदलाव पर जोर देती है। अकेले व्यक्ति, अक्सर युवा, अब माइक्रोफाइनेंसिंग कर रहे हैं। वे छोटे-मोटे अपराधों और ऑनलाइन गेमिंग से धन जुटाते हैं। सोशल मीडिया और क्राउडफंडिंग भी इसमें शामिल हैं। ये तरीके अधिकारियों के लिए पता लगाने में कठिनाई पैदा करते हैं। ऑनलाइन भुगतान सेवाएं कम लागत और तेज समाधान प्रदान करती हैं। ये छद्म नाम या नकली खातों के माध्यम से अस्पष्टता बढ़ाती हैं।
- यूरोपोल ने सभी आतंकी समूहों में इन सेवाओं का उपयोग पाया।
- P2P भुगतान से सैन्य उपकरण और रसायन खरीदे जाते हैं।
- चरमपंथी समूह ऑनलाइन सामान बेचकर राजस्व कमाते हैं।
मानवीय सहायता का दुरुपयोग और राज्य प्रायोजित आतंकवाद
रिपोर्ट में संघर्ष क्षेत्रों में मानवीय सहायता के डायवर्जन पर चिंता है। आतंकवादी समूह नागरिक राहत के संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं। FATF सरकारों से जोखिम-आधारित उपाय अपनाने का आग्रह करता है। यह आतंकवादी नेटवर्क के शोषण को रोकने में मदद करेगा।
- FATF ने जोखिम के व्यावहारिक संकेतक प्रदान किए हैं।
- असामान्य भुगतान गतिविधि, संदिग्ध डिजिटल व्यवहार शामिल हैं।
- 80 से अधिक क्षेत्रों से डेटा रिपोर्ट में शामिल है।
FATF ने यह भी बताया कि कुछ आतंकी संगठनों को राज्य सरकारों से सहायता मिलती है। यह आतंकवाद को राज्य प्रायोजित करने का एक तरीका है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक खतरा है। 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम हमले की FATF ने निंदा की थी। उन्होंने “आतंकवादी वित्तपोषण का व्यापक विश्लेषण” जारी किया है। ई-कॉमर्स पर आतंकी गतिविधियों को रोकना अब एक वैश्विक प्राथमिकता है।



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