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मोदी-आनंद मुलाकात: भारत-कनाडा ने व्यापार, AI सहयोग पर खींची रूपरेखा।

मोदी-आनंद मुलाकात

13 अक्टूबर को रिश्तों में आई मधुरता के बीच कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत आईं, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मुलाकात की। 5ऑन न्यूज़ के अनुसार, 13 अक्टूबर को 7 बजे, तान्या दत्ता ने शाम की सबसे महत्वपूर्ण सुर्खियाँ प्रस्तुत कीं, जिनमें कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद का नई दिल्ली दौरा प्रमुख था।

इस मुलाकात का उद्देश्य भारत-कनाडा के तनावपूर्ण संबंधों को फिर से पटरी पर लाना था। मुलाकात के दौरान व्यापार, सुरक्षा तथा प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने अपनी भारत यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और द्विपक्षीय साझेदारी में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

इस “रचनात्मक साझेदारी” को भारत-कनाडा के भविष्य की एक साहसिक रूपरेखा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की एक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के अपने समकक्ष मार्क कार्नी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और भविष्य की मुलाकातों के लिए उत्सुकता व्यक्त की।

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और लोगों के बीच संबंधों में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग के महत्व पर ध्यान दिलाया।

आनंद का स्वागत करते हुए, प्रधानमंत्री ने ज़ोर दिया कि उनकी यात्रा भारत-कनाडा द्विपक्षीय साझेदारी में “नई गति” लाएगी। उन्होंने जून 2025 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी कनाडा यात्रा को भी याद किया, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री कार्नी के साथ “बेहद उपयोगी बैठक” की थी, जिसने विस्तारित सहयोग की नींव रखी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के विदेश मंत्री के साथ अपनी बैठक की घोषणा भी की। पोस्ट में लिखा है, “कनाडा की विदेश मंत्री सुश्री अनीता आनंद का स्वागत किया। आपसी विकास और समृद्धि के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, कृषि और लोगों के बीच आदान-प्रदान में सहयोग को मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की।”

जयशंकर-आनंद की ‘रचनात्मक चर्चा’ और सहयोग का महत्वाकांक्षी रोडमैप

इससे पहले दिन में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कनाडा के विदेश मंत्री से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने “हमारी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तंत्रों को बहाल करने और पुनर्जीवित करने के लिए रचनात्मक चर्चा की।”

दोनों नेताओं ने सहयोग के लिए एक व्यापक योजना पर भी सहमति व्यक्त की, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को फिर से स्थापित करने की प्रक्रिया का मार्गदर्शन करेगी।

विदेश मंत्री जयशंकर ने X पर एक पोस्ट में कहा, “आज नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद का स्वागत करते हुए मुझे खुशी हुई। हमारी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तंत्रों को पुनर्स्थापित और पुनर्जीवित करने हेतु रचनात्मक चर्चा हुई।

वैश्विक घटनाक्रमों और साझा चुनौतियों के प्रति हमारी प्रतिक्रियाओं पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। हम एक महत्वाकांक्षी सहयोग रोडमैप पर भी सहमत हुए और हमारे सहयोग के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ताकि यह हमारे नेताओं की अपेक्षाओं और हमारे लोगों के हितों को पूरा करे।”

इसके अलावा, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भी ट्वीट किया, “आज, मंत्री @DrSJaishankar और मैंने अपने देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना पर सहमति व्यक्त की। हम अपनी चल रही कानून प्रवर्तन वार्ता और ऊर्जा, व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों सहित बढ़ती आर्थिक साझेदारी के अवसरों पर आधारित एक रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।”

कनाडा सरकार ने एक विज्ञप्ति में बताया कि आनंद कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए 12 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक भारत, सिंगापुर और चीन की राजनयिक यात्रा पर हैं। वह रविवार को भारत पहुँचीं।

मोदी-आनंद मुलाकात के बाद आनंद ने कहा कि इस भू-राजनीतिक माहौल में एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक खिलाड़ी के साथ एक स्थिर संबंध होना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश संबंधों को मजबूत करने के रोडमैप पर सहमत होने के बाद व्यापार वार्ता शुरू करेंगे।

सोमवार को आनंद और जयशंकर द्वारा एक संयुक्त बयान जारी कर इसकी घोषणा की गई। बयान में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर “शीघ्र” मंत्रिस्तरीय चर्चा शुरू करने और 2026 की शुरुआत में एक वरिष्ठ-स्तरीय व्यापार मिशन के साथ-साथ कनाडा-भारत सीईओ फोरम को फिर से शुरू करने की योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ: अमेरिकी राजदूत से मुलाकात और उपचुनावों की घोषणा

इसी बीच, ट्रम्प के करीबी सहयोगी और अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने टैरिफ तनाव के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। वहीं, चुनाव आयोग ने ओडिशा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर की पाँच विधानसभा सीटों के लिए 11 नवंबर को उपचुनावों की घोषणा की, जिनकी मतगणना 14 नवंबर को होगी।

भारत-कनाडा संबंधों का नया चरण: ट्रूडो युग के तनावों से आगे

जस्टिन ट्रूडो युग के तनावों को पीछे छोड़ते हुए, भारत-कनाडा संबंधों ने सुधार के एक नए चरण की शुरुआत की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एआई, महत्वपूर्ण खनिजों और व्यापार में कनाडा के साथ सहयोग की पुष्टि की है। मोदी-आनंद मुलाकात को भी संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

जयशंकर ने संकेत दिया है कि कनाडा एआई, महत्वपूर्ण वस्तुओं के व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करेगा। ऐसा माना जा रहा है कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में कनाडा को एक वैकल्पिक विकल्प के रूप में देख रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की कनाडाई प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत एक सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ना चाहता है और कनाडा को एक सकारात्मक साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देश जी-20 के साथ-साथ दुनिया भर के कई प्रभावशाली मंचों पर भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ऐसे में, दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय दुनिया को शांति और स्थिरता की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कनाडा-भारत संबंधों के संदर्भ में, एक सीमित व्यापार समझौते पर बातचीत 2023 में कनाडा द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में भारत पर एक सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाने से ठीक पहले टूट गई थी।

कार्नी के नेतृत्व में, कनाडा ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कदम उठाए हैं, दोनों देशों ने नए राजदूत नियुक्त किए हैं और सीमा पार अपराधों पर खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एक ढांचा स्थापित किया है।

आनंद ने कहा कि 2023 में संबंध स्थिर थे, “अब हम दो साल बाद, अक्टूबर 2025 में हैं, और हमारे पास उच्चायुक्त हैं और मैं मंत्री जयशंकर से मिलने जा रही हूँ,” उन्होंने साक्षात्कार में कहा।

कनाडा भी हर देश के साथ अपने कर्मचारियों और व्यवसाय को प्राथमिकता देने के समान दृष्टिकोण का पालन कर रहा है, जो प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है, जिन्होंने अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

ब्लूमबर्ग के साथ एक साक्षात्कार में, जब उनसे पूछा गया कि कनाडा अमेरिका और चीन के साथ अपने संबंधों को कैसे संतुलित कर सकता है, तो आनंद ने कहा, “यह एक संप्रभु देश होने की ओर वापस जाता है।” आनंद ने कहा कि इस भू-राजनीतिक माहौल में एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक खिलाड़ी के साथ स्थिर संबंध होना बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा, “कनाडा चीन के साथ संबंधों को एक सिद्धांत के आधार पर आगे बढ़ाएगा, जो कनाडाई लोगों के सर्वोत्तम हित में कार्य करना है।”

कार्नी के तहत, कनाडा ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कदम उठाए हैं, दोनों देशों ने नए राजदूतों की नियुक्ति की है और सीमा पार अपराधों पर खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एक ढांचा स्थापित किया है। कनाडा भारत और चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, क्योंकि यह अमेरिकी प्रशासन के साथ व्यापार वार्ता जारी रखता है, जिसने बीजिंग के साथ टैरिफ युद्ध को बढ़ा दिया है।

कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन और भारत के अपने समकक्षों के साथ बैठक कर रही हैं और उन्होंने सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। नई दिल्ली के अलावा, आनंद इस सप्ताह मुंबई, सिंगापुर और चीन में हांगझोउ की यात्रा कर रही हैं।

तनाव कम करने के इन प्रयासों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जवाबी कार्रवाई से बचने के लिए सावधानीपूर्वक किए जाने की आवश्यकता है।

इस मोदी-आनंद मुलाकात में देश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की योजना पर सहमति बनी। सरकार ने महिंद्रा समूह से ग्रामीण विकास और ई-वाहन उत्पादन में सहयोग की अपेक्षा जताई।
आनंद महिंद्रा ने कहा कि भारत में उद्योग जगत के लिए नीतिगत स्थिरता सबसे बड़ी ताकत है।

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