भारत-EU व्यापार समझौता और कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) पर बड़ी खबर:
कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच चली लंबी बातचीत आखिरकार मुकम्मल हो गई है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने इस बड़ी उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के बीच डील फाइनल हो चुकी है और इसका आधिकारिक ऐलान कल होने की उम्मीद है। यह एग्रीमेंट न केवल भारत और EU के बीच आर्थिक एकीकरण को मजबूती देगा, बल्कि सभी क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार भी खोलेगा।
कॉमर्स सेक्रेटरी के अनुसार, डील के टेक्स्ट की लीगल जांच शुरू हो चुकी है, जिसमें अगले 5-6 महीने लगेंगे। इसके बाद यह एग्रीमेंट अगले साल की शुरुआत में कभी भी लागू हो सकता है। इसे एक “बैलेंस्ड और फॉरवर्ड-लुकिंग” समझौता माना जा रहा है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड और इन्वेस्टमेंट फ्लो में जबरदस्त उछाल आएगा।
ऐतिहासिक समझौते की रूपरेखा और दूरगामी लक्ष्य
कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने इस FTA को आपसी फायदे और भविष्य की सोच वाला करार दिया है। इस डील का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देना है।
अधिकारियों का मानना है कि इस बार की बातचीत की सफलता के पीछे मजबूत “पॉलिटिकल विल” यानी राजनीतिक इच्छाशक्ति रही है।
गौरतलब है कि भारत और EU के बीच FTA की बातचीत सबसे पहले 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन मार्केट एक्सेस, लेबर स्टैंडर्ड और रेगुलेटरी नियमों जैसे विवादों के कारण 2013 में इसे रोक दिया गया था। साल 2022 में यह प्रक्रिया फिर से शुरू हुई और वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों के बीच इसमें तेजी आई।
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नई दिल्ली में 16वां इंडिया-EU समिट और ग्लोबल लीडर्स की मौजूदगी
भारत की राजधानी नई दिल्ली इस समय कूटनीतिक हलचलों का केंद्र बनी हुई है। 16वें भारत-EU समिट के लिए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष एक “जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक एजेंडा” अपनाएंगे।
इस एजेंडे के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों—खुशहाली और सस्टेनेबिलिटी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, सिक्योरिटी और डिफेंस, और कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। समिट के दौरान सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिससे मैरीटाइम सिक्योरिटी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील और भारतीय बाजारों का खुलना
यूरोपीय संघ के ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफ्कोविक ने इस समझौते को “सभी डील्स में सबसे बड़ी” करार दिया है। उनके मुताबिक, भारत में कुछ क्षेत्रों में टैरिफ 150% तक ऊंचे हैं, जिससे यूरोपीय निर्यातकों के लिए बाजार बंद थे। अब इस डील के जरिए लगभग 2 बिलियन लोगों का एक साझा फ्री ट्रेड एरिया बनेगा, जिससे यूरोपीय सामानों पर से कई भारतीय कस्टम ड्यूटी हट जाएंगी।
वर्तमान में लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और पिछले एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह समझौता यूरोपीय कंपनियों को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में ‘फर्स्ट-मूवर’ होने का लाभ देगा।
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कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) का एजेंडा और भारत की चिंताएं
इस ऐतिहासिक समझौते के बीच कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) एक ऐसा मुद्दा है जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत सरकार इस मैकेनिज्म से छूट प्राप्त करने की कोशिश कर रही है क्योंकि यह स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट और फर्टिलाइजर जैसे प्रमुख निर्यातों पर असर डाल सकता है।
कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) एक ऐसी यूरोपीय नीति है जो कार्बन-इंटेंसिव सामानों के उत्पादन के दौरान होने वाले उत्सर्जन पर शुल्क लगाती है। इसका उद्देश्य “कार्बन लीकेज” को रोकना है। 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले इस नियम के कारण भारतीय निर्यात पर 20-35% लेवी लगने की संभावना है।
चूंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील और एल्युमीनियम उत्पादक है और हमारा 40% स्टील निर्यात EU को जाता है, इसलिए भारतीय उद्योगपतियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
यूरोपीय कारों पर शुल्क में कटौती और ऑटो सेक्टर को लाभ
इस डील की सबसे आकर्षक खबरों में से एक यूरोपीय कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में भारी कटौती का प्रस्ताव है। वर्तमान में पूरी तरह से तैयार (CBU) कारों पर 70% से 110% तक टैरिफ लगता है। प्रस्तावित योजना के तहत, 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली यूरोपीय कारों पर ड्यूटी तुरंत 40% तक कम की जा सकती है, जिसे समय के साथ घटाकर 10% तक लाया जाएगा।
इस कदम से फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसे प्रमुख यूरोपीय ऑटोमेकर्स को भारतीय बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह भारत के उच्च टैरिफ ढांचे में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसे लेकर यूरोपीय संघ लंबे समय से मांग कर रहा था।
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सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग
शिखर सम्मेलन का एक और महत्वपूर्ण पहलू रक्षा साझेदारी है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास ने भारत के साथ गहरे होते रिश्तों की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार EU के नेवल ऑपरेशन्स (अटलांटा और एस्पाइड्स) की टुकड़ी ने हिस्सा लिया, जो रक्षा सहयोग की मजबूती का प्रमाण है।
कल होने वाले समिट में दोनों पक्ष डिफेंस पार्टनरशिप पर साइन करेंगे, जिससे समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ठोस नतीजे देखने को मिलेंगे। यह रक्षा क्षेत्र में भारत और यूरोप के बीच बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
ग्लोबल स्टेबिलिटी के लिए “सफल भारत” की अनिवार्यता
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होकर इसे “जिंदगी का सम्मान” बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक “सफल भारत” पूरी दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है।
वॉन डेर लेयेन का यह दौरा और भारत मंडपम में होने वाले बिजनेस इवेंट्स यह स्पष्ट करते हैं कि यूरोपीय संघ अब भारत को केवल एक व्यापारिक साझीदार नहीं, बल्कि एक अनिवार्य वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है।
$135 बिलियन के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को यह FTA नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और ग्लोबल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा कवर करने वाला यह साझा बाजार इतिहास रचेगा।
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