“भैरव कमांडो बटालियन” 77वां गणतंत्र दिवस और सूर्यास्त्र का पराक्रम
भैरव कमांडो बटालियन और सूर्यास्त्र की गूँज से इस बार कर्तव्य पथ थर्राने वाला है। भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस नई दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर एक भव्य परेड के साथ मनाने जा रहा है, जिसमें देश की बदलती सैन्य शक्ति और स्वदेशी तकनीक का बेजोड़ संगम दिखाई देगा।
इस साल के समारोह की सबसे बड़ी हाईलाइट ‘सूर्यास्त्र’ नामक नया रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और हाल ही में गठित भैरव कमांडो बटालियन (भैरव लाइट कमांडो बटालियन) होने वाली है।
यह बटालियन पहली बार गणतंत्र दिवस के मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर दुनिया को भारत की नई युद्ध नीति का परिचय देगी। परेड की कमान दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार के हाथों में होगी, जबकि करीब 6,000 रक्षा कर्मी इस सैन्य गौरव का हिस्सा बनेंगे।
यूरोपियन लीडरशिप बनेगी भारत के गौरव की साक्षी
इस गौरवशाली अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की झलक भी देखने को मिलेगी। इस वर्ष परेड के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा शामिल होंगे। विशेष बात यह है कि इस बार परेड में यूरोपियन यूनियन (EU) की एक मिलिट्री टुकड़ी भी मार्च करती नजर आएगी।
इस टुकड़ी में तीन गाड़ियों पर चार झंडे लहराए जाएंगे, जिनमें EU का झंडा, EU मिलिट्री स्टाफ, इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा का नेतृत्व करने वाली ‘EU नेवल फोर्स अटलांटा’ और लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की रक्षा करने वाले ‘EU नेवल फोर्स एस्पाइड्स’ के ध्वज शामिल होंगे। यह भारत और यूरोप के मजबूत होते रक्षा संबंधों का एक जीवंत प्रतीक बनेगा।
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सूर्यास्त्र और स्वदेशी हथियारों का महाशक्ति प्रदर्शन
रक्षा उपकरणों की बात करें तो कर्तव्य पथ पर स्वदेशी हथियारों का एक विशाल जखीरा प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें 300 किमी की मारक क्षमता वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (URLS) ‘सूर्यास्त्र’ आकर्षण का केंद्र होगा, जो जमीन से जमीन पर सटीक हमला करने में सक्षम है।
इसके साथ ही ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश मिसाइल सिस्टम, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM), और एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) अपनी ताकत दिखाएंगे।
धनुष आर्टिलरी गन और शक्तिबान रेजिमेंट के ड्रोन व काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी पहली बार इस परेड का हिस्सा बनेंगे। शक्तिबान रेजिमेंट आर्टिलरी में एक नई इकाई है जो लोइटरिंग म्यूनिशन जैसी आधुनिक तकनीक से लैस है।
भैरव कमांडो बटालियन और पहली बार शामिल होने वाले दस्ते
अक्टूबर 2025 के आसपास गठित हुई भैरव कमांडो बटालियन को नियमित पैदल सेना और स्पेशल फोर्स के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया है। 15 जनवरी को जयपुर में आर्मी डे परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखने के बाद अब यह दस्ता कर्तव्य पथ पर अपनी कॉम्बैट स्किल दिखाएगा।
परेड में कुछ अन्य अनोखे तत्व भी पहली बार जुड़ेंगे, जिनमें रिमाउंट वेटेरिनरी कोर (RVC) की कैप्टन हर्षिता राघव के नेतृत्व में चार ज़ांस्कर टट्टू, दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार रैप्टर (पतंगें) और आर्मी डॉग्स शामिल हैं। साथ ही, भारी थर्मल कपड़े पहने एक मिक्स्ड स्काउट्स टुकड़ी भी अपना डेब्यू करने जा रही है।
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बैटल ऐरे फॉर्मेशन और युद्ध गियर में 61 कैवेलरी
भारतीय सेना इस बार पारंपरिक मार्चिंग के बजाय ‘फेज़्ड बैटल ऐरे फॉर्मेशन’ पेश करेगी, जो यह दिखाएगा कि असली लड़ाई के मैदान में सेनाएँ कैसे आगे बढ़ती हैं। इस फॉर्मेशन की शुरुआत टोही यूनिट्स से होगी, जिसके बाद लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट टीमें आएंगी।
ऐतिहासिक 61 कैवेलरी टुकड़ी, जो आमतौर पर अपनी सेरेमोनियल ड्रेस और हेडगियर के लिए जानी जाती है, इस साल पहली बार पूरे कॉम्बैट गियर और हथियारों के साथ ‘बैटल ऐरे’ में दिखाई देगी।
इसमें भारत का पहला स्वदेशी आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल (ALSV) भी शामिल होगा, जो सेना की हाई-मोबिलिटी रिकॉनिसेंस क्षमता को प्रदर्शित करेगा।
वंदे मातरम के 150 साल और सांस्कृतिक विरासत की झांकियां
परेड की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम के 150 साल’ रखी गई है, जिसे “आज़ादी का मंत्र – वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत” के रूप में झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। कुल 30 झांकियां कर्तव्य पथ पर निकलेंगी, जिनमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की भागीदारी होगी।
गुजरात और छत्तीसगढ़ की झांकियां आत्मनिर्भरता पर केंद्रित होंगी, जबकि केरल की झांकी वाटर मेट्रो और डिजिटल लिटरेसी को दिखाएगी। पश्चिम बंगाल की झांकी स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल के योगदान को जीवंत करेगी। संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘एक देश की आत्मा की पुकार’ थीम पर आधारित होगी और वेटरन्स की झांकी ‘युद्ध के जरिए राष्ट्र निर्माण’ का संदेश देगी।
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ऑपरेशन सिंदूर: तीनों सेनाओं का एकीकृत पराक्रम
परेड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा ‘ऑपरेशन सिंदूर: मिलकर जीत’ नामक तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी होगी। यह झांकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 के ‘विकसित भारत’ के विजन और भारत के ‘जॉइंट ऑपरेशन’ सिद्धांत को दर्शाएगी।
इसमें दिखाया जाएगा कि कैसे नेवी का समुद्री दबदबा, आर्मी के M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर और वायु सेना के राफेल व Su-30 MKI विमान मिलकर दुश्मन को नेस्तनाबूद करते हैं।
इस प्रदर्शन में HAROP लॉइटरिंग म्यूनिशन द्वारा दुश्मन के रडार को तबाह करना और S-400 सिस्टम द्वारा लंबी दूरी के खतरों को बेअसर करना भी शामिल है। यह झांकी स्पष्ट संदेश देगी कि भारत आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रखता है।
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आसमान में गर्जना: 29 एयरक्राफ्ट का भव्य फ्लाईपास्ट
परेड का समापन एक भव्य फ्लाईपास्ट के साथ होगा जिसमें कुल 29 एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे। इनमें 16 फाइटर जेट, 4 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 9 हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। फ्लाईपास्ट में राफेल, Su-30, MiG-29, और जगुआर विमान ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ में उड़ान भरेंगे।
इसके अलावा C-130, C-295, अपाचे, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) और ध्रुव हेलीकॉप्टर भी आसमान में भारत की ताकत का प्रदर्शन करेंगे।
77वें गणतंत्र दिवस का यह पूरा आयोजन न केवल भारत की सैन्य शक्ति बल्कि उसकी सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों का एक बेजोड़ दस्तावेज होगा। समारोह का अंत राष्ट्रगान और भैरव कमांडो बटालियन सहित सभी टुकड़ियों के सम्मान में वंदे मातरम के बैनर वाले गुब्बारे छोड़कर किया जाएगा।
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