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केरल CM रेस पर महामंथन:दिल्ली में फंसा पेंच वेणुगोपाल सतीशन चेन्निथला?

केरल CM रेस

केरल CM रेस केरल विधानसभा चुनावों में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की शानदार जीत को एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन ‘ईश्वर के अपने देश’ (God’s Own Country) का अगला नेतृत्व कौन करेगा, इस पर सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

दिल्ली के सत्ता गलियारों में मैराथन बैठकों और गहन विचार-विमर्श के बावजूद कांग्रेस हाईकमान फिलहाल किसी एक नाम पर मुहर लगाने में विफल रहा है। 140 में से 102 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल करने वाला गठबंधन अब ‘नेतृत्व के संकट’ से जूझ रहा है।

दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन और हाईकमान की दुविधा

शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई तीन घंटे की लंबी बैठक में राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला जैसे दिग्गज शामिल हुए।

सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और गुटबाजी के बीच संतुलन बनाना हाईकमान के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। जहाँ एक ओर संगठनात्मक ताकत रखने वाले के.सी. वेणुगोपाल को नवनिर्वाचित विधायकों के बड़े धड़े का समर्थन प्राप्त है, वहीं वी.डी. सतीशन को जनता और युवाओं के बीच ‘लोकप्रिय पसंद’ के रूप में देखा जा रहा है।

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तीन दावेदार और रोटेशन फॉर्मूले का डर

केरल की राजनीति के इस त्रिकोणीय मुकाबले ने राहुल गांधी के सामने नई चुनौती पेश की है।

के.सी. वेणुगोपाल राहुल गांधी के करीबी और संगठन पर मजबूत पकड़।वी.डी. सतीशन निवर्तमान विपक्ष के नेता, जिनकी छवि एक जुझारू नेता की है।रमेश चेन्निथला पार्टी के वरिष्ठ चेहरे और अनुभवी रणनीतिकार।

    राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि कांग्रेस का पिछला ‘रोटेशन फॉर्मूला’ (बारी-बारी से मुख्यमंत्री) मध्य प्रदेश और राजस्थान में आत्मघाती साबित हुआ था। केरल में तीन दावेदार होने के कारण यह फॉर्मूला लागू करना और भी मुश्किल है। कांग्रेस को डर है कि कहीं किसी एक को चुनने की प्रक्रिया दूसरे गुट की बगावत का कारण न बन जाए।

    विपक्ष का तंज और सहयोगियों की बेचैनी

    इस देरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को हमले का मौका दे दिया है। कर्नाटक में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस जनसेवा के बजाय आपसी झगड़ों में उलझी हुई है। उन्होंने राजस्थान और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस अपने ही नेताओं को धोखा देने के लिए जानी जाती है।

    दूसरी ओर, गठबंधन के प्रमुख साथी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) और ‘केरल कांग्रेस’ (KEC) के भीतर भी बेचैनी बढ़ रही है। 23 मई को वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, ऐसे में सरकार गठन में हो रही देरी प्रशासन को ठप कर सकती है।

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    अतीत की गलतियों से सबक?

    इतिहास गवाह है कि 2017 में गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री तय करने में देरी की थी, जिसका फायदा उठाकर भाजपा ने सरकार बना ली थी।

    हालांकि केरल में संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में है, लेकिन अनिर्णय की यह स्थिति कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित कर रही है। तिरुवनंतपुरम और दिल्ली की सड़कों पर समर्थकों के बीच जारी ‘पोस्टर वॉर’ ने हाईकमान की चिंता और बढ़ा दी है।

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    क्या होगा अगला कदम?

    पार्टी ने अब के. मुरलीधरन और तिरुवनचूर राधाकृष्णन जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी दिल्ली तलब किया है। मुरलीधरन का दावा है कि अगले 48 घंटों में धुंध छंट जाएगी। कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता का चयन केवल एक व्यक्ति का चुनाव नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी की दिशा तय करने वाला फैसला होगा।

    केरल की जनता ने कांग्रेस को शासन करने का स्पष्ट जनादेश दिया है, न कि आंतरिक कलह देखने का। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वे अपनी ‘अनिर्णायक राजनीति’ की छवि को तोड़ते हुए एक ऐसा नेतृत्व प्रदान करें जो गठबंधन और जनता, दोनों को स्वीकार्य हो। केरल CM रेस में हलचल कौन जीतेगा केरल CM रेस?

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