खेडकर परिवार विवाद: पिता पर अपहरण का आरोप, माँ ने पुलिस को रोका
खेडकर परिवार विवाद एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार, पूर्व आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर और उनके अंगरक्षक प्रफुल सालुंखे पर एक ट्रक ड्राइवर का अपहरण करने का आरोप लगा है। यह घटना शनिवार शाम को नवी मुंबई के मुलुंड-ऐरोली रोड पर हुई। 22 वर्षीय ट्रक ड्राइवर प्रह्लाद कुमार का कंक्रीट मिक्सर ट्रक कथित तौर पर दिलीप खेडकर की लैंड क्रूजर एसयूवी से टकरा गया।
इस मामूली टक्कर के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। बहस इतनी बढ़ गई कि दिलीप खेडकर और सालुंखे ने कुमार को जबरन अपनी एसयूवी में बिठाया और उसे पुणे स्थित अपने पारिवारिक बंगले में ले गए। यह घटना एक सामान्य रोड रेज से कहीं आगे निकल गई, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया।
पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन और माँ का अड़ियल रवैया
रबाले पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करते हुए एसयूवी का पता लगाया। रविवार को, अपहरण के कुछ ही घंटों के भीतर, कुमार को पुणे में पूजा खेडकर के घर से सुरक्षित बचा लिया गया। लेकिन यह ऑपरेशन आसान नहीं था। जब पुलिस टीम बंगले पर पहुँची, तो पूजा की माँ मनोरमा खेडकर ने उन्हें अंदर घुसने से रोकने की कोशिश की।
उन्होंने गेट खोलने से इनकार कर दिया और पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह दोनों आरोपियों को दोपहर 3 बजे तक चतुश्रृंगी पुलिस स्टेशन ले आएंगी। पुलिस ने उनकी बात मानकर उन्हें समय दिया, लेकिन जब दोपहर 3 बजे के करीब पुलिस ने उन्हें फोन किया, तो मनोरमा ने आने से साफ इनकार कर दिया और पुलिस को ‘जो चाहें वो करने’ की चुनौती दी।
इस दौरान, मनोरमा ने कथित तौर पर एफआईआर की तस्वीर ली और उसे अपने वकील को भेज दिया। आरोप है कि उन्होंने पुलिस को डराने के लिए गेट के अंदर दो कुत्ते भी छोड़ दिए। इसके बावजूद, पुलिस टीम ने हार नहीं मानी। चतुश्रृंगी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक उत्तम भजनवाले ने बताया कि मुख्य द्वार नहीं खुलने पर पुलिसकर्मी लोहे के गेट को फांदकर परिसर में घुस गए। उन्होंने कुमार को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन मनोरमा खेडकर अंदर नहीं मिलीं।
यह खेडकर परिवार विवाद ने एक और मोड़ ले लिया जब पुलिस को पता चला कि बंगले से अपराध में शामिल एसयूवी भी गायब हो चुकी थी।
आपराधिक मामले और परिवार का इतिहास
इस घटना के बाद, नवी मुंबई पुलिस ने दिलीप खेडकर और उनके अंगरक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया है। वहीं, पुणे पुलिस ने मनोरमा खेडकर के खिलाफ लोक सेवकों के काम में बाधा डालने का एक अलग मामला दर्ज किया है।
अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, हालाँकि एफआईआर में दिलीप खेडकर और प्रफुल सालुंखे का नाम जोड़ा जाना तय है।
यह पहला मौका नहीं है जब खेडकर परिवार विवादों में फँसा है। पूजा खेडकर पर यूपीएससी 2022 सिविल सेवा परीक्षा के आवेदन में गलत तथ्यों को प्रस्तुत करके ओबीसी और विकलांगता कोटा का लाभ गलत तरीके से प्राप्त करने का आरोप लगा है।
उन्हें आईएएस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था और संघ लोक सेवा आयोग ने उन्हें जीवन भर के लिए परीक्षा देने से रोक दिया है। दिल्ली पुलिस ने भी उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है।
पिछले साल, मनोरमा खेडकर तब भी सुर्खियों में आई थीं जब एक वीडियो में वह एक किसान को पिस्तौल से धमकाती दिखाई दी थीं। उस मामले में भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। दिलीप खेडकर, जो महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, के खिलाफ भी 2022 में एक महिला पर हमला करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था।
उन्होंने वंचित बहुजन अघाड़ी के टिकट पर 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गए। यह खेडकर परिवार विवाद उनके लिए कोई नया नहीं है, बल्कि एक लंबी फेहरिस्त का हिस्सा है। आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार के अनुसार, इस परिवार को लगता है कि कोई उन्हें छू नहीं पाएगा, और यही वजह है कि वे लगातार विवादों में उलझे रहते हैं।



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