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 “आठ विपक्षी सांसद निलंबित”बजट सत्र 2026: लोकसभा में हंगामा,

आठ विपक्षी सांसद निलंबित

संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली, जिसके तहत आठ विपक्षी सांसद निलंबित कर दिए गए हैं। इन सांसदों पर सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा डालने और आसन (चेयर) की ओर कागज फेंकने के गंभीर आरोप हैं।

विपक्षी बेंचों से हो रही भारी नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच यह निलंबन बजट सत्र की शेष अवधि के लिए किया गया है। सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले इस ‘अमर्यादित व्यवहार’ के कारण पीठासीन अधिकारी को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

इन सांसदों पर गिरी गाज: कांग्रेस के 8 सदस्यों का निलंबन

लोकसभा की कार्यवाही से निलंबित किए गए सभी आठ सांसद कांग्रेस पार्टी के हैं। इनके नाम अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, सी. किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत यादवराव पाडोले, एस. वेंकटेश और डीन कुरियाकोस हैं।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में इन सदस्यों के निलंबन का प्रस्ताव पेश किया था। रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय शुरू हुई जब सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी और विपक्षी सदस्यों ने अपना विरोध जताते हुए अमर्यादित आचरण किया।

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संसदीय परंपराओं का उल्लंघन और चेयर का सख्त रुख

फैसला सुनाते हुए उस समय चेयर पर बैठे दिलीप सैकिया ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विपक्ष को मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन सदन को ठप करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “सदन सबका है और यहाँ चर्चा होनी चाहिए। विरोध के नाम पर कार्यवाही को पूरी तरह बाधित करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

” जैसे ही दोपहर 3 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई, पीठासीन अधिकारी ने आठों कांग्रेस सदस्यों का नाम लिया। इसके तुरंत बाद आठ विपक्षी सांसद निलंबित करने का प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया, जिसके बाद सदन को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा।

राहुल गांधी के भाषण और नरवणे के संस्मरण पर विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ सोमवार को शुरू हुई थी, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोल रहे थे। गांधी ने 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के एक अप्रकाशित ‘संस्मरण’ के अंशों का हवाला देने का प्रयास किया।

जब उन्हें इस अप्रकाशित सामग्री को उद्धृत करने से रोका गया, तो सदन में हंगामा बढ़ गया। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके विरोध में मंगलवार को सांसदों ने कागज फाड़े और उन्हें चेयर की ओर फेंका। इसी अमर्यादित व्यवहार के चलते आठ विपक्षी सांसद निलंबित किए गए।

संसद परिसर के बाहर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन

निलंबन की कार्रवाई के बाद संसद के बाहर सियासी पारा चढ़ गया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने अपने सहयोगियों के निलंबन के खिलाफ संसद भवन के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। निलंबित सांसद हिबी ईडन ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह के ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए हैं, विपक्ष उसका विरोध जारी रखेगा।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस कार्रवाई को ‘हास्यास्पद’ बताया और कहा कि लोकतंत्र में हर सदस्य की आवाज सुनी जानी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि वे सदन के अंदर और बाहर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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NDA सांसदों ने की विपक्षी व्यवहार की कड़ी निंदा

दूसरी ओर, सत्तापक्ष यानी NDA के सांसदों ने विपक्षी आचरण की जमकर आलोचना की है। BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी का एकमात्र मकसद भारतीय सैनिकों का अपमान करना था।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “जब विपक्ष ने देखा कि एक शानदार बजट पेश किया गया है और उनके पास कहने को कुछ नहीं बचा, तो उन्होंने कागज फाड़कर चेयर पर फेंके।” LJP (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने भी कहा कि विरोध करने का एक तरीका होता है, आप स्पीकर पर कागज नहीं फेंक सकते। उन्होंने इसे एक परिवार और पार्टी का घमंड करार दिया।

पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने बयां की अफरा-तफरी

तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद कृष्णा प्रसाद टेनेटी, जिन्होंने हंगामे के दौरान कुछ समय के लिए सदन की अध्यक्षता की थी, ने उस समय की भयावह स्थिति के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि एक सदस्य ने चेयर को ‘यार’ कहकर संबोधित किया, जो कि बेहद आपत्तिजनक है। टेनेटी ने विस्तार से बताया कि कैसे सांसदों ने टेबल के पास आकर कागज फाड़े और उन्हें आसन की ओर फेंका। उन्होंने इसे पीठासीन अधिकारी को नीचा दिखाने की कोशिश बताया और सदस्यों से आग्रह किया कि वे स्पीकर के पिछले फैसलों का सम्मान करें।

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2 अप्रैल तक लागू रहेगा निलंबन का फैसला

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, आठ विपक्षी सांसद निलंबित होने के कारण अब 2 अप्रैल तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। 2 अप्रैल को ही बजट सत्र का समापन होना है।

वर्तमान में सरकार और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है। जहाँ एक तरफ सरकार इसे सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रहा है। संसद में हुई इस अभूतपूर्व अफरा-तफरी ने देश के विधायी कामकाज पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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