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भारत मालदीव रणनीतिक साझेदारी द्विपक्षीय संबंध पटरी पर लौट रहे हैं।

भारत मालदीव रणनीतिक साझेदारी

भारत मालदीव रणनीतिक साझेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मालदीव यात्रा ने दोनों देशों के बीच 60 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा दी। भारत और मालदीव ने 4,850 करोड़ रुपये की क्रेडिट सहायता, 4 समझौता ज्ञापनों और 3 प्रमुख समझौतों के ज़रिए इस यात्रा को ऐतिहासिक बना दिया।

मुख्य बिंदु :

  1. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने भारत मालदीव संबंधों को नई दिशा और रणनीतिक ऊर्जा प्रदान की।
  2. ₹4,850 करोड़ की ऋण सहायता और मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता की शुरुआत हुई।
  3. राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने भारत को मालदीव का सबसे भरोसेमंद साझेदार करार दिया।
  4. प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं से भी मुलाकात कर बहुपक्षीय संवाद को बल दिया।
  5. माले में रक्षा मंत्रालय भवन का उद्घाटन और संसदीय मैत्री समूह का गठन हुआ।
  6. पर्यटन सहयोग को बढ़ावा देने के लिए UPI पेमेंट समझौते से भारतीयों को सुविधा मिलेगी।
  7. भारत-मालदीव 60 वर्षों की राजनयिक साझेदारी का जश्न और विशेष डाक टिकट जारी किया गया।

इंडिया आउट’ से ‘भारत सबसे करीबी मित्र’ तक

यह यात्रा ऐसे समय पर हुई जब हाल तक मालदीव में भारत के खिलाफ ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया गया था। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय सेना की उपस्थिति पर सवाल उठाए थे और चीन से सैन्य सहयोग को प्राथमिकता दी थी। लेकिन अब माले में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत से यह संकेत मिला कि भारत मालदीव रणनीतिक साझेदारी को लेकर नए दृष्टिकोण के तहत द्विपक्षीय संबंध पटरी पर लौट रहे हैं।

यात्रा की मुख्य उपलब्धियाँ

  • 4,850 करोड़ रुपये की भारत द्वारा ऋण सहायता (LoC)
  • रक्षा मंत्रालय भवन का उद्घाटन
  • मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा की शुरुआत
  • 4 समझौता ज्ञापन और 3 समझौते पर हस्ताक्षर
  • भारत-मालदीव संसदीय मैत्री समूह की स्थापना
  • 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति

कूटनीतिक संकेत और भू-राजनीतिक संदेश

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ऐसे समय पर हुई जब चीन मालदीव में अपने प्रभाव को लगातार बढ़ा रहा है। मुइज़्ज़ू का शुरू में बीजिंग और अंकारा की यात्रा करना पारंपरिक भारत-प्रथम नीति से हटकर कदम माना गया था।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

  • प्रधानमंत्री मोदी:
    “हमारा सहयोग बुनियादी ढाँचे, तकनीक, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाएगा।”
  • राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू:
    “प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पर्यटन में वृद्धि होगी और भारत मालदीव का सबसे भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।”
  • पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद:
    “यह यात्रा बताती है कि सभी राजनीतिक दल भारत के महत्व को समझते हैं।”

हिंद महासागर में भारत की रणनीति

भारत की ‘पड़ोसी पहले नीति’ और महासागर नीति’ का एक अहम पहलू है मालदीव जैसे द्वीपीय देशों को स्थिरता और विकास का साझेदार बनाना। इस संदर्भ में यह यात्रा एक रणनीतिक पुनर्संतुलन की तरह रही।

भारतीय उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम ने को बताया कि UPI समझौते से भारतीय पर्यटकों की संख्या में 10–15% की वृद्धि होगी।

पर्यटन को मिलेगा नया बल

A) भारत, मालदीव के लिए प्रमुख पर्यटक स्रोत देश है। B)UPI समझौते से भारतीयों को सीधे रुपये से भुगतान की सुविधा मिलेगी। C) मालदीव सरकार ने 2025 तक 23 लाख पर्यटकों का लक्ष्य रखा है, जिसमें 10 लाख भारतीयों की अपेक्षा है।

सांस्कृतिक और जन-जन संबंधों पर ज़ोर

प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव के भारतीय समुदाय से भी मुलाकात की और उन्हें भारत-मालदीव संबंधों का स्थायी स्तंभ बताया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस बातचीत को “जन-जन की मित्रता” का प्रतीक कहा।

ऐतिहासिक महत्व: 60 साल की दोस्ती

इस वर्ष भारत-मालदीव राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगाँठ है। इस अवसर पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से उन संबंधों की मजबूती को दर्शाता है जो दशकों से समुद्र की लहरों की तरह समय के साथ बढ़ते रहे हैं।

रणनीति, मैत्री और भविष्य

प्रधानमंत्री मोदी की मालदीव यात्रा केवल औपचारिकता नहीं थी, यह भारत मालदीव रणनीतिक साझेदारी को एक नए युग में ले जाने की कोशिश थी। चीन के प्रभाव के बीच भारत की ‘पहलकर्ता’ भूमिका को मज़बूती मिली है। आने वाले वर्षों में भारत और मालदीव के बीच व्यापार, पर्यटन, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग और भी गहराएगा — और यह यात्रा उसी भविष्य की बुनियाद बनती दिख रही है।

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