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मुंबई बिजली कटौती संकट 80 साल पुराना केबल नेटवर्क हुआ फेल,

मुंबई बिजली कटौती संकट

मुंबई बिजली कटौती संकट देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, जो अपनी ‘नेवर स्लीपिंग’ लाइफस्टाइल और निर्बाध बिजली आपूर्ति (Uninterrupted Power Supply) के लिए जानी जाती है, इस समय एक अभूतपूर्व और गंभीर ऊर्जा संकट की कगार पर खड़ी है। बेतहाशा बढ़ती गर्मी, उमस का चढ़ता पारा, रियल एस्टेट का अंधाधुंध विस्तार और इन सबके बीच करीब आठ दशक पुराना हो चुका जर्जर अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क—इन सभी कारणों ने मिलकर मायानगरी के पावर ग्रिड को घुटनों पर ला दिया है।

स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई को बिजली सप्लाई करने वाली प्रमुख संस्था ‘बेस्ट’ (BEST Underbaking) महीनों से केबल कंक्रीटीकरण और तकनीकी दिक्कतों से जुड़ी 2,500 से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतों को हल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

यह संकट अब केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक कछुआ चाल और दूरदर्शिता की कमी का नतीजा बनता जा रहा है, जिससे उन वीआईपी और संभ्रांत इलाकों में भी घंटों बत्तियां गुल हो रही हैं, जहां इतिहास में कभी बिजली कटौती नहीं देखी गई थी।

दक्षिण मुंबई का खस्ताहाल तंत्र: 3.5 लाख उपभोक्ताओं पर सिर्फ एक फ्यूज रूम

इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील और चिंताजनक केंद्र दक्षिण मुंबई (South Mumbai) बना हुआ है। वार्ड A, B, C, D और E के अंतर्गत आने वाले काल्बादेवी, ज़वेरी बाज़ार, मस्जिद, भिंडी बाज़ार और भुलेश्वर जैसे घनी आबादी और व्यापारिक गढ़ वाले इलाकों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है।

इस पूरे बेल्ट में करीब 3,50,000 उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी आपातकालीन समस्याओं को संभालने के लिए बेस्ट के पास महज़ एक सिंगल फ्यूज कंट्रोल रूम काम कर रहा है।

सड़क के नीचे दबे केबल ब्रिटिश काल के हैं या बेहद पुराने हो चुके हैं, जो बढ़ती मांग का लोड झेलने में सक्षम नहीं हैं। बेस्ट के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अकेले वर्ष 2025 में संस्थान को 7,500 गंभीर शिकायतें मिली थीं, जो पिछले साल (2024) के मुकाबले 1,000 अधिक थीं।

लोड बढ़ने का एक और बड़ा कारण कर्मचारियों की भारी कमी है। तकनीकी विभागों में स्वीकृत पदों की तुलना में ग्राउंड स्टाफ और इंजीनियरों की संख्या 50% से 70% तक घट गई है, जिससे फॉल्ट ढूंढने और उसे ठीक करने में अमले को पसीने छूट रहे हैं।

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BMC बनाम BEST: कंक्रीट की सड़कें और लालफीताशाही का खेल

केबल सुधार और बिजली बहाली में होने वाली देरी के पीछे मुंबई नगर निगम (BMC) और बेस्ट के बीच कूटनीतिक व प्रशासनिक खींचतान भी एक बड़ी वजह रही है।

बेस्ट के अधिकारियों के मुताबिक, बीएमसी ने लंबे समय से कंक्रीट की आधुनिक सड़कों को खोदने (टेंचिंग) की अनुमति देने पर सख्त पाबंदी लगा रखी थी। डामर की सड़कों के मुकाबले सीमेंट-कंक्रीट की सड़कों को काटना और वहां फॉल्ट लोकेट करना बेहद जटिल और समय लेने वाला काम है।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

“जब मुख्य लाइन में खराबी आती है, तो हम अस्थाई समाधान (जुगाड़) के तहत पास के दूसरे सबस्टेशन से ओवरलोड लाइन खींचकर बिजली बहाल कर देते हैं। लेकिन यह शॉर्ट-कट दूसरी चालू केबलों पर क्षमता से अधिक दबाव डालता है, जिससे वे भी कुछ दिनों में ट्रिप या बर्न हो जाती हैं।”

हालांकि, चौतरफा दबाव के बाद बीएमसी ने हाल ही में एक्स्ट्रा-हाई वोल्टेज (EHV) लाइनों की मरम्मत के लिए कंक्रीट सड़कों को खोदने की सशर्त मंजूरी दी है।

बेस्ट ने तारदेव में दक्षिण मुंबई के पांच वार्डों की निगरानी के लिए एक एकीकृत नया कंट्रोल सेंटर बनाना शुरू किया है और 120 किलोमीटर लंबी जर्जर ईएचवी केबलों को बदलने का 50% काम पूरा कर लिया है, लेकिन बाकी बचे काम को पूरा होने में कम से कम दो साल और लगेंगे। तब तक मुंबईकरों को इस आंख-मिचौली से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

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दादर से अंधेरी तक ‘ब्लैकआउट’ का टॉर्चर: बिना सोए कट रही रातें

चिलचिलाती धूप और उमस के कारण पूरी मुंबई की बिजली मांग 4,570 मेगावाट (MW) के सर्वकालिक उच्च स्तर को पार कर गई है, जिसमें से करीब 1,000 मेगावाट की आपूर्ति अकेले बेस्ट के जिम्मे है। मुंबई अपनी कुल खपत का बहुत मामूली हिस्सा स्थानीय स्तर पर पैदा करता है, जबकि शेष 3,650 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड और ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए शहर में खींची जाती है।

इसी का परिणाम हाल ही में देखने को मिला जब दादर, शीतलादेवी और माटुंगा रोड इलाकों में करीब 3,000 उपभोक्ताओं को कई घंटों के लंबे ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा। शीतलादेवी रिसीविंग सबस्टेशन के 33 KV फीडर में आई खराबी के पीछे पास में चल रहे एक सिविल कंस्ट्रक्शन कार्य के दौरान भूमिगत केबल को पहुंचा नुकसान था।

ऐसा ही एक डरावना अनुभव पश्चिमी उपनगर के पॉश इलाके अंधेरी के ‘फोर बंगलो’ मार्केट और मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क क्षेत्र के निवासियों का रहा। शिवाजी पार्क के निवासी प्रमोद ज़ारेकर ने रोष जताते हुए कहा, “दोपहर की भीषण गर्मी में बिना किसी पूर्व सूचना के चार घंटे से ज्यादा बिजली कटी रही। बेस्ट के हेल्पलाइन नंबर या तो व्यस्त थे या कोई जवाब नहीं मिल रहा था।”

वहीं, फोर बंगलो इलाके की निवासी और पत्रकार मोहर बसु ने इस संकट को किसी बुरे सपने जैसा बताया। उन्होंने कहा, “शनिवार शाम 6:45 बजे गई बिजली अगले दिन सुबह 3:30 बजे वापस आई।

लिफ्ट बंद होने के कारण बुजुर्गों को हाफते हुए सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। रविवार सुबह फिर ‘मेंटेनेंस’ के नाम पर सप्लाई काट दी गई और बुधवार रात को भी यही कहानी दोहराई गई। यह मामूली तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि हमारे सब्र का इम्तिहान है।”

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संपादकीय दृष्टिकोण:

मुंबई का यह बिजली संकट इस बात की गंभीर चेतावनी है कि कंक्रीट के जंगल और चमचमाती गगनचुंबी इमारतें खड़ी करने से पहले जमीन के नीचे दबे बुनियादी ढांचे (Utility Infrastructure) को अपग्रेड करना कितना अनिवार्य है। बेस्ट और बीएमसी जैसी अमीर नागरिक संस्थाएं फंड की कमी का रोना नहीं रो सकतीं।

यदि वैश्विक स्तर की आर्थिक राजधानी में चौबीस घंटे निर्बाध बिजली देने का गौरवशाली ट्रैक रिकॉर्ड टूट रहा है, तो यह नीति निर्माताओं के लिए ‘वेक-अप कॉल’ है। जब तक पैचवर्क और तात्कालिक मरम्मत के बजाय पूरे नेटवर्क का व्यापक ओवरहॉल नहीं किया जाता, तब तक मुंबई की यह चमचमाती कलाई गर्मियों के हर सीजन में इसी तरह झुलसती रहेगी। मुंबई बिजली कटौती संकट को लेकर गर्मी बढ़ते ही गहराया मुंबई बिजली कटौती संकट

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