Loading Now

महाविकास अघाड़ी में फूट: बजट सत्र से पहले बिखरा विपक्ष

महाविकास अघाड़ी में फूट

महाविकास अघाड़ी में फूट की खबरों ने आज महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है, जब बजट सत्र की पूर्व संध्या पर बुलाई गई महत्वपूर्ण विपक्षी बैठक से एनसीपी (शरद पवार गुट) नदारद रही। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को मुंबई में हुई इस घटना ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।

विपक्ष जहाँ एक तरफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा था, वहीं अपने ही कुनबे में मची इस खलबली ने अघाड़ी को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।

शरद पवार के निधन के बाद उपजे नेतृत्व संकट और पार्टी के भविष्य को लेकर मची रार अब सड़कों से निकलकर बंद कमरों की बैठकों तक पहुँच गई है। इस अनुपस्थिति ने न केवल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) को हैरान कर दिया है, बल्कि सरकार को भी हमला करने का एक सुनहरा मौका दे दिया है।

संजय राउत का तीखा हमला: ‘जब सदन भीड़तंत्र से चले, तो लोकतंत्र कहाँ है?’

इस राजनीतिक ड्रामे के बीच शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महाविकास अघाड़ी में फूट के संकेतों के बीच एक बड़ा बयान दिया है। राउत ने आरोप लगाया कि वर्तमान विधानसभा को नियम-कायदों से नहीं बल्कि एक ‘भीड़’ द्वारा चलाया जा रहा है।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष (LoP) की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सरकार और स्पीकर पर निशाना साधते हुए कहा कि यह संवैधानिक मूल्यों की हत्या है।

राउत इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने घोषणा की कि विपक्ष अब स्पीकर के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाने की तैयारी कर रहा है। राउत का यह आक्रामक रुख असल में विपक्षी एकता के बिखरते धागों को फिर से जोड़ने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन अपनों का साथ न मिलना उनके दावों को कमजोर कर रहा है।

इसे भी पढ़े : पवार-अडानी का पुराना रिश्ता: राहुल गांधी के विरोध और गठबंधन की मजबूरी

फडणवीस की चाय पार्टी का बहिष्कार: विपक्ष ने गिनाए विरोध के बड़े कारण

महाराष्ट्र की संसदीय परंपरा के अनुसार बजट सत्र से पहले मुख्यमंत्री द्वारा दी जाने वाली ‘हाई-टी’ (चाय पार्टी) का विपक्ष ने सामूहिक बहिष्कार करने का फैसला किया है। विपक्षी नेता अंबादास दानवे और विजय वडेट्टीवार ने संयुक्त रूप से कहा कि वे ऐसी सरकार के साथ चाय नहीं पी सकते जो जनता के मुद्दों के प्रति संवेदनशील नहीं है।

विपक्ष ने बहिष्कार के पीछे भारत-यूएस डील के प्रभाव और शरद पवार की दुखद मृत्यु के बाद उत्पन्न स्थितियों को मुख्य कारण बताया है।

उनका तर्क है कि राज्य में किसान संकट और बेरोजगारी चरम पर है, ऐसे में सरकार का उत्सव मनाना तर्कसंगत नहीं है। हालांकि, इस बहिष्कार के पीछे की एकजुटता तब संदिग्ध लगने लगी जब यह स्पष्ट हुआ कि गठबंधन के सभी घटक दल इस फैसले पर एकमत नहीं थे।

एनसीपी (SP) की रहस्यमयी अनुपस्थिति: क्या विलय की तैयारी में है शरद पवार की विरासत?

बजट सत्र से पहले की सबसे बड़ी सुर्खी महाविकास अघाड़ी में फूट तब बनी जब एनसीपी (SP) का कोई भी प्रतिनिधि विपक्षी समन्वय बैठक में नहीं पहुँचा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पार्टी के भीतर अब अजीत पवार गुट के साथ फिर से जुड़ने या पूरी तरह विलय करने की बातचीत चल रही है।

शरद पवार की मृत्यु के बाद पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी का एक बड़ा धड़ा चाहता है कि सत्ता के करीब रहकर ही अस्तित्व को बचाया जा सकता है।

बैठक से इस तरह का किनारा करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि एमवीए के भीतर अब भरोसे की भारी कमी हो गई है, जिससे आने वाले चुनाव और बजट सत्र में विपक्ष की ताकत आधी रह जाएगी।

इसे भी पढ़े : मुंबई की बर्बादी का डर: क्या भाजपा महाराष्ट्र की राजनीति में भिखारी बना देगी?

विपक्ष का चेहरा लाल: बजट सत्र में सरकार को घेरने की योजना हुई फेल

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष की इस रणनीतिक विफलता ने एमवीए को ‘रेड-फेस्ड’ यानी शर्मिंदा कर दिया है। सरकार पहले से ही बजट सत्र में कई लुभावनी योजनाओं की घोषणा करने की तैयारी में है, और विपक्ष को उम्मीद थी कि वे बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरेंगे।

लेकिन महाविकास अघाड़ी में फूट ने उनकी धार को कुंद कर दिया है। सत्ता पक्ष अब इस फूट का फायदा उठाते हुए विपक्ष पर पलटवार कर रहा है कि जो दल खुद को नहीं संभाल सकते, वे राज्य क्या संभालेंगे।

रणनीतिकारों का मानना है कि अगर सत्र के दौरान भी यह बिखराव जारी रहा, तो फडणवीस सरकार बिना किसी बड़ी बाधा के अपना बजट पास करा लेगी, जो विपक्ष के लिए एक बड़ी नैतिक हार होगी।

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: संवैधानिक संकट या राजनीतिक दांव?

संजय राउत द्वारा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया कानूनी मोड़ जोड़ दिया है। विपक्ष का कहना है कि स्पीकर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन चला रहे हैं और विपक्षी सदस्यों की आवाज को दबाया जा रहा है।

हालांकि, कानून के जानकारों का मानना है कि विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा सरकार के पास होने के कारण इस प्रस्ताव का गिरना तय है। इसके बावजूद, विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर ‘विक्टिम कार्ड’ खेलना चाहता है।

महाविकास अघाड़ी में फूट के बावजूद, राउत इस कोशिश में हैं कि कम से कम सदन के भीतर तो सभी विपक्षी दल एक सुर में बोलें, ताकि संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग का संदेश राज्य भर में जाए।

जेन-जी और मिलेनियल्स का नजरिया: ‘राजनीति का डेली सोप’ देख थके युवा

महाराष्ट्र की इस भागदौड़ भरी राजनीति को सोशल मीडिया पर मौजूद युवा पीढ़ी एक ‘अंतहीन डेली सोप’ के रूप में देख रही है। इंस्टाग्राम रील्स और ट्विटर (X) पर युवा पूछ रहे हैं कि क्या कभी असली मुद्दों जैसे फीस वृद्धि, नौकरियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ऐसी ही ‘इमरजेंसी मीटिंग्स’ होंगी?

महाविकास अघाड़ी में फूट की खबरें युवाओं के लिए कोई नई बात नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने पिछले 4-5 सालों में कई बार पार्टियों को टूटते और जुड़ते देखा है।

इस राजनीतिक अस्थिरता ने युवाओं में लोकतंत्र के प्रति एक तरह की उदासीनता पैदा कर दी है। वे सत्ता और विपक्ष के बीच के इस ‘म्यूजिकल चेयर’ खेल से ऊब चुके हैं और सत्र के दौरान ठोस परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं, न कि केवल आरोप-प्रत्यारोप की।

इसे भी पढ़े : देवेंद्र फडणवीस AI टूल्स: महाराष्ट्र में शिक्षा साथी और खेती में नई क्रांति

महाराष्ट्र की सत्ता का भविष्य और विपक्ष की साख पर सवाल

अंततः, महाविकास अघाड़ी में फूट केवल एक गठबंधन का टूटना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र के उन करोड़ों वोटर्स के विश्वास के साथ खिलवाड़ है जिन्होंने एक मजबूत विपक्ष की उम्मीद की थी। शरद पवार जैसे दिग्गज नेता की कमी अब साफ खलने लगी है, जो मतभेदों के बावजूद सबको एक मेज पर लाने की क्षमता रखते थे।

बजट सत्र यह तय करेगा कि क्या उद्धव ठाकरे और कांग्रेस इस डूबती नैया को बचा पाएंगे या फिर महाराष्ट्र में एक नई राजनीतिक धुरी का उदय होगा। एक वरिष्ठ पत्रकार के नाते मेरा मानना है कि राजनीति में संवाद के रास्ते कभी बंद नहीं होने चाहिए, लेकिन एमवीए के भीतर संवाद की यह कमी उन्हें विनाश की ओर ले जा रही है।

इसे भी पढ़े : NCP गुटों का विलय: अजित पवार के निधन के बाद फडणवीस से मिले नेता

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed