नवाब मलिक और गठबंधन धर्म पर महायुति में दरार, क्या टूटेगा गठबंधन?
नवाब मलिक गठबंधन धर्म महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति गठबंधन की दरारें अब इतनी चौड़ी हो चुकी हैं कि यह एक जर्जर पुल की तरह लगता है, जो कभी भी गिर सकता है। दिसंबर 2025 तक की नवीनतम रिपोर्ट्स से साफ है कि BMC चुनावों के लिए BJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सीट-शेयरिंग की बातचीत तेज कर दी है, जहां BJP 140-150 सीटों की मांग रही है जबकि शिंदे गुट 80-90 या इससे ज्यादा पर अड़ा है।
लेकिन अजित पवार की NCP को मुंबई में पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया है। नवाब मलिक और गठबंधन धर्म के मुद्दे पर NCP से गठबंधन के लिए BJP ने साफ इनकार कर दिया है क्योंकि मलिक के D कंपनी से कथित संबंधों को लेकर पार्टी कोई समझौता नहीं करना चाहती। आलम यह है कि महत्वपूर्ण बैठकें भी अब बिना NCP के ही आयोजित की जा रही हैं।
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पुणे-पिंपरी में ‘फ्रेंडली फाइट’ या NCP को खत्म करने की साजिश?
पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में तो ‘फ्रेंडली फाइट’ का आधिकारिक ऐलान हो चुका है, जो असल में NCP के कोर वोट बैंक को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति है। यह सब दर्शाता है कि BJP का अहंकार अब चरम पर है, जहां सहयोगी दल अब सिर्फ इस्तेमाल की वस्तु बनकर रह गए हैं। गठबंधन की एकता अब सिर्फ एक दिखावा मात्र रह गई है।
BJP और NCP के बीच का विवाद अब किसी से छिपा नहीं है। पुणे जैसे NCP के पुराने गढ़ में BJP का अलग चुनाव लड़ना अजित पवार के लिए बड़ा झटका है, जबकि उन्हें मुंबई की 50 सीटों पर अकेले तैयारी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
नवाब मलिक का मुद्दा और BJP की दो टूक चेतावनी
नवाब मलिक को NCP की मुंबई कमान सौंपकर अजित पवार ने BJP को चुनौती देने की कोशिश की है, लेकिन इसके परिणाम विपरीत नजर आ रहे हैं। नवाब मलिक और गठबंधन धर्म पर सवाल उठाते हुए BJP ने स्पष्ट कर दिया है कि मलिक के साथ किसी भी प्रकार का चुनावी तालमेल नामुमकिन है।
यहां ‘फ्रेंडली कॉन्टेस्ट’ जैसा कुछ भी नहीं है, बल्कि यह NCP को सांगठनिक रूप से पंगु बनाने का एक सुनियोजित प्लान है। जानकारों का मानना है कि इससे सेकुलर वोट बंटेंगे और सीधा फायदा BJP-शिंदे गुट को होगा। हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में भी महायुति के घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते नजर आए।
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कैबिनेट में तनाव और शिंदे गुट की बढ़ती नाराजगी
गठबंधन के भीतर स्थिति इतनी खराब है कि शिंदे गुट के मंत्रियों ने हाल ही में कैबिनेट मीटिंग का बॉयकोट किया और BJP पर सीधे पोचिंग (नेताओं को तोड़ने) के गंभीर आरोप लगाए। अजित पवार अब पूरी तरह अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, और राजनीतिक गलियारों में उनकी पार्टी के शरद पवार गुट से दोबारा हाथ मिलाने (रीकॉन्सिलेशन) की अफवाहें तेज हो गई हैं।
यह सब BJP की ‘डिवाइड एंड रूल’ नीति का ही नतीजा माना जा रहा है। दो डिप्टी चीफ मिनिस्टर्स, एकनाथ शिंदे और अजित पवार की देवेंद्र फडणवीस से पटरी नहीं बैठ रही, यह अब एक खुली किताब बन चुकी है।
अमित शाह तक पहुंची पोचिंग की शिकायत और सत्ता का संघर्ष
एकनाथ शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लिखित शिकायत की है कि BJP उनके नेताओं को गुपचुप तरीके से अपनी ओर खींच रही है। ठाणे जैसे शिंदे के अभेद्य गढ़ में BJP पैरलल पावर सेंटर बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि फडणवीस ने ‘नो पोचिंग पैक्ट’ का भरोसा दिया था, लेकिन जमीन पर इसका उल्लंघन जारी है।
अंबरनाथ और डोंबिवली जैसे इलाकों में शिंदे के निष्ठावान कार्यकर्ता लगातार BJP में शामिल हो रहे हैं। शिंदे ने सार्वजनिक मंचों से ‘कोअलिशन धर्म’ की याद दिलाई, जबकि अजित पवार को महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों से लगातार बाहर रखा जा रहा है।
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हिंसक झड़पें और अवसरवाद की राजनीति का चरम
महायुति में अब हिंसक झड़पें और पोचिंग की घटनाएं आम हो गई हैं। स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण में बीड, रायगढ़ और बदलापुर में कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई। ठाणे में गणेश नाईक का जनता दरबार मुख्यमंत्री शिंदे को नागवार गुजरा, तो वहीं पुणे में धनकड़ बनाम मोहोल की व्यक्तिगत लड़ाई ने गठबंधन की गरिमा को तार-तार कर दिया।
नवाब मलिक और गठबंधन धर्म की दुहाई देने वाली BJP ने शिंदे के कई कद्दावर स्थानीय नेताओं को अपने पाले में कर लिया है। फडणवीस की ‘डेवलपमेंट’ की बातें अब खोखली लगने लगी हैं, क्योंकि उनके सहयोगी ही एक-दूसरे की जड़ें काट रहे हैं।
MVA की मजबूती और महायुति के लिए हार का पूर्वानुमान
इस मार्जिनलाइजेशन पॉलिसी के कारण महायुति कमजोर हो रही है, जिसका सीधा लाभ MVA (महा विकास अघाड़ी) को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संभावित एकजुटता मुंबई में मराठी वोटों को एकजुट कर सकती है। वहीं कांग्रेस ने अजित पवार को MVA में शामिल करने की अफवाहें उड़ाकर NCP खेमे में खलबली मचा दी है।
BMC का 74,000 करोड़ का भारी-भरकम बजट दांव पर है, और अगर महायुति इसी तरह बिखरी रही, तो उद्धव की शिवसेना (UBT) की सत्ता में वापसी तय मानी जा रही है। 15 जनवरी 2026 के BMC चुनावों में NCP को बाहर रखने की रणनीति महायुति के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है।
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क्या 2026 तक टिक पाएगा यह गठबंधन?
बड़ा सवाल यह है कि क्या महायुति टूट सकती है? मौजूदा तनाव को देखते हुए इसका जवाब ‘हां’ में नजर आता है। शिंदे ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि ‘मुझे हल्के में न लें’, जबकि पवार अपनी अलग जमीन तलाश रहे हैं। नवाब मलिक और गठबंधन धर्म के नाम पर हो रही खींचतान विद्रोह को न्योता दे रही है।
अफवाहें हैं कि अजित पवार जल्द ही शरद पवार से मुलाकात कर सकते हैं। यह गठबंधन सिर्फ सत्ता के लालच पर टिका है, लेकिन सीट शेयरिंग का विवाद एक ऐसी चिंगारी साबित हो सकता है जो 2026 तक NDA के कुनबे को महाराष्ट्र में पूरी तरह बिखेर देगी।



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