नए साल पर डिलीवरी संकट: गिग वर्कर्स की देशव्यापी बड़ी हड़ताल
नए साल की पूर्व संध्या, जो आमतौर पर जश्न और उत्सव का समय होती है, इस बार नए साल पर डिलीवरी संकट की आहट लेकर आई है। देश के हजारों गिग वर्कर्स ने ज़ोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स से लॉग-ऑफ करने का फैसला किया है।
यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कम वेतन, सुरक्षा चिंताओं और एल्गोरिदम के कठोर नियंत्रण के विरोध में डिलीवरी पार्टनर्स इस सबसे व्यस्त रात को काम ठप रखेंगे।
यह हड़ताल न केवल डिलीवरी सेवाओं को प्रभावित करेगी, बल्कि सुविधा वाली इकॉनमी और इसके पीछे छिपे लेबर फोर्स के वेलफेयर के बीच के असंतुलन को भी उजागर करती है।
वायरल राइडर बेंजामिन रयान गौतम और एंकर्स के बीच तीखी बहस
इस विरोध के बीच ब्लिंकिट के मशहूर डिलीवरी पार्टनर और ‘गेट रेडी विद मी’ वीडियो के लिए वायरल हुए कंटेंट क्रिएटर बेंजामिन रयान गौतम ने अपनी बात रखी है। एक विशेष प्रोग्राम में, जहाँ एंकर्स ‘सैलरी’ और ‘सुरक्षा’ जैसे गंभीर ढांचागत मुद्दों पर सवाल उठा रहे थे, वहीं बेंजामिन ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया।
उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ कि पेमेंट में कोई दिक्कत नहीं है,” हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि 10 मिनट की डिलीवरी का दबाव एक वास्तविक चुनौती है। यह इंटरव्यू दिखाता है कि कैसे एक ही प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले वर्कर के अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन दबाव हर जगह मौजूद है।
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मिनी माथुर का समर्थन: “10 मिनट की इमरजेंसी खुद संभालें”
प्रसिद्ध अभिनेत्री और टेलीविजन होस्ट मिनी माथुर ने गिग वर्कर्स की इस देशव्यापी हड़ताल का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि भारत की गिग इकॉनमी में मानवीय तरीकों की सख्त जरूरत है। मिनी ने यूज़र्स से अपील की कि वे थके हुए वर्कर्स के प्रति सहानुभूति दिखाएं।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “अपनी प्लानिंग की कमी और दबाव को एक वर्कर पर डालना निर्दयी है। उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य मायने रखता है।
जाओ अपनी 10 मिनट की इमरजेंसी की चीज़ें खुद खरीदो दोस्तों।” उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर नए साल पर डिलीवरी संकट और वर्कर्स की गरिमा पर नई बहस छेड़ दी है।
हड़ताल भड़काने के आरोप में आईडी ब्लॉक: वर्कर्स का गंभीर आरोप
जैसे-जैसे विरोध तेज हो रहा है, एग्रीगेटर कंपनियों की दमनकारी कार्रवाई भी सामने आ रही है। बेंगलुरु के लगभग 20 डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स ने आरोप लगाया है कि 25 दिसंबर की हड़ताल में शामिल होने के बाद उनकी आईडी ब्लॉक कर दी गई हैं।
एक वर्कर और सपोर्ट टीम के बीच बातचीत के स्क्रीनशॉट से खुलासा हुआ है कि आईडी को ‘हड़ताल भड़काने वाला’ (Strike Inciter) होने के कारण खत्म किया गया है।
यह सीधे तौर पर कर्नाटक प्लेटफॉर्म-बेस्ड गिग वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) एक्ट का उल्लंघन है, जो कहता है कि बिना 14 दिन के नोटिस और लिखित कारण के किसी को डीएक्टिवेट नहीं किया जा सकता।
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भुगतान रोका गया और पुलिस स्टेशन में रखने की धमकी
महीबूब पाशा जैसे डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के बाद उनकी आईडी ब्लॉक कर दी गई और लगभग ₹5,000 का साप्ताहिक भुगतान भी रोक दिया गया है। पाशा का आरोप है कि 25 दिसंबर को शांतिपूर्ण विरोध के बाद मैनेजरों की शिकायत पर उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाया गया और छह घंटे तक बैठाए रखा गया।
अब उन्हें अज्ञात कॉल आ रहे हैं, जिसमें खुद को पुलिस बताकर भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की धमकी दी जा रही है। वर्कर्स का कहना है कि वे केवल पारदर्शी वेतन, आराम के ब्रेक और मनमानी आईडी ब्लॉकिंग को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
कानून का उल्लंघन और श्रम विभाग की सक्रियता
कर्नाटक ऐप-बेस्ड वर्कर्स यूनियन ने इस आईडी-ब्लॉकिंग के खिलाफ श्रम विभाग को पत्र सौंपा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई भारतीय संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों और राज्य के नए गिग वर्कर्स कानून के खिलाफ है। यूनियन ने प्रमाण के तौर पर ज़ोमैटो वर्कर की डीएक्टिवेट आईडी के स्क्रीनशॉट भी दिए हैं।
नए साल पर डिलीवरी संकट के बीच, श्रम विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामला उनके संज्ञान में है और वे इस अवैध कार्रवाई की गहन जांच करेंगे।
31 दिसंबर की तैयारी: 40,000 वर्कर्स के जुड़ने की उम्मीद
यूनियन नेताओं के अनुसार, 25 दिसंबर को लगभग 40,000 वर्कर्स ने एकजुटता दिखाई थी, और अब 31 दिसंबर को इसे और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना है। कर्नाटक ऐप-बेस्ड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष मोहम्मद इनायत अली का कहना है कि कंपनियां डराने वाली रणनीति अपना रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां थर्ड-पार्टी एजेंसियों और इंसेंटिव के लालच से हड़ताल तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। अली ने दो टूक कहा कि वे असुरक्षित ’10-मिनट डिलीवरी’ मॉडल और सामाजिक सुरक्षा से इनकार को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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कंपनियों की जवाबी रणनीति और सुरक्षा उपाय
इस बड़े विरोध को देखते हुए ज़ोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसी कंपनियाँ भी अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रही हैं। नए साल की पूर्व संध्या पर संभावित नए साल पर डिलीवरी संकट को रोकने के लिए कंपनियाँ डिलीवरी पार्टनर्स से संपर्क कर रही हैं।
ब्लिंकिट और ज़ोमैटो (इटरनल) के सूत्रों के अनुसार, वे स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि जो पार्टनर्स काम करना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षा दी जा सके।
हालांकि, यूनियनों का मानना है कि इस व्यस्त दिन पर हड़ताल होने से कंपनियां उनकी जायज मांगों पर गौर करने के लिए मजबूर होंगी।
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