नया आयकर नियम 2026: PAN सीमा और ITR में बदलाव
आयकर विभाग ने करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए नियमों को और अधिक सरल और सुसंगत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नया आयकर नियम 2026 आगामी 1 अप्रैल से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत वित्तीय निवेश और दैनिक भत्तों की सीमाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
शनिवार को सार्वजनिक फीडबैक के लिए जारी किए गए ड्राफ्ट नियम अब पहले के मुकाबले काफी संक्षिप्त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव न केवल करदाताओं के लिए फायदेमंद होंगे, बल्कि टैक्स बेस को भी गहराई प्रदान करेंगे। नए नियमों के तहत अब करदाताओं से केवल प्रासंगिक जानकारी ही मांगी जाएगी, जिससे अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।
म्यूचुअल फंड और बैंक जमा के लिए PAN की सीमा में भारी बढ़ोतरी
वित्तीय निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी खबर यह है कि अब म्यूचुअल फंड और बैंक जमा के लिए स्थायी खाता संख्या (PAN) देने की सीमा को बढ़ा दिया गया है। नया आयकर नियम 2026 के अनुसार, म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए अब ₹50,000 की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर ₹200,000 कर दिया गया है।
यानी अब ₹2 लाख से अधिक के निवेश पर ही PAN की अनिवार्यता होगी। इसी तरह, बैंकों में नकद जमा के मामले में भी बड़े बदलाव हुए हैं।
वर्तमान में एक दिन में ₹50,000 से ज्यादा जमा करने पर पैन की आवश्यकता होती है, लेकिन नए नियमों के तहत पैन तभी अनिवार्य होगा जब एक फाइनेंशियल ईयर में कुल नकद जमा ₹10 लाख से ज्यादा हो। यह बदलाव छोटे बचतकर्ताओं और मध्यम वर्ग के निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
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भोजन भत्ते और अन्य अनुलाभों का हुआ युक्तिकरण
नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले भत्तों में भी बाजार की वास्तविकताओं के अनुसार सुधार किया गया है। टैक्स-फ्री प्रति-भोजन की सीमा को ₹50 से बढ़ाकर अब ₹200 कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संशोधित स्तर तक नियोक्ता द्वारा भुगतान की गई राशि को अनुलाभ (Perquisite) के रूप में नहीं गिना जाएगा।
इसके अतिरिक्त, बच्चों की शिक्षा और व्यक्तिगत खर्च भत्तों को भी तर्कसंगत बनाया गया है। आयकर नियम 15 के तहत विभिन्न 15 अनुलाभों के लिए नई सीमाओं और शर्तों को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इसमें नियोक्ता से प्राप्त उपहार और परिवार के सदस्यों के लिए मुफ्त या रियायती शिक्षा सुविधाओं के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और बचत पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम और 2027 से ‘वन-क्लिक’ ITR
सरकार का लक्ष्य कर प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है। नया आयकर नियम 2026 आगामी 1 अप्रैल से प्रभावी होगा, लेकिन असेसमेंट ईयर 2027-28 (FY 2026-27 के लिए) से ITR फाइल करना और भी आसान हो जाएगा।
विभाग उपलब्ध डेटा के आधार पर ज्यादातर ITR को पहले से भरने (Pre-filled) की योजना बना रहा है। करदाता केवल विवरणों को सत्यापित करेंगे और यदि सब कुछ सही है, तो एक क्लिक से रिटर्न सबमिट कर सकेंगे।
हालांकि, FY26 में अर्जित आय के लिए करदाताओं को अपना रिटर्न दाखिल करते समय मौजूदा फॉर्म का ही उपयोग करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 22 फरवरी, 2026 तक प्राप्त फीडबैक के आधार पर मार्च के पहले सप्ताह तक इन नियमों को अंतिम रूप देकर अधिसूचित कर दिया जाएगा।
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क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स का खुलासा अब होगा अनिवार्य
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने डिजिटल संपत्तियों पर भी शिकंजा कसा है। वर्ष 2027 में फाइल किए जाने वाले ITR से क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया गया है। आयकर विभाग आने वाले वित्तीय वर्ष से क्रिप्टो एक्सचेंजों से लेनदेन का पूरा विवरण इकट्ठा करना शुरू कर देगा।
इसका मतलब है कि अब करदाताओं को अपनी प्रत्येक क्रिप्टो एसेट की रिपोर्ट ITR में देनी होगी। यह कदम हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन और नई संपत्तियों की मॉनिटरिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि नया आयकर नियम 2026 और इसके साथ आने वाले फॉर्म्स को आधा कर दिया गया है, ताकि केवल जरूरी और इस्तेमाल योग्य जानकारी ही मांगी जाए।
प्रॉपर्टी, वाहन और होटल बिलों पर PAN नियमों में बदलाव
अचल संपत्ति और लग्जरी खर्चों पर भी पैन की आवश्यकताओं को संशोधित किया गया है। अब ₹20 लाख से ज्यादा कीमत वाली प्रॉपर्टी की खरीद पर ही पैन का खुलासा करना होगा, जिसकी वर्तमान सीमा ₹10 लाख है।
मोटर वाहनों के मामले में, अब केवल ₹5 लाख से अधिक कीमत वाली कारों के लिए पैन आवश्यक होगा, जबकि पहले यह हर कीमत की कार के लिए अनिवार्य था।
इसके अलावा, होटल, बैंक्वेट या रेस्टोरेंट के बिलों के लिए पैन की अनिवार्यता तभी होगी जब बिल ₹1 लाख से अधिक का हो। विभाग का मानना है कि उन्नत तकनीक और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से आय को ट्रैक करना अब आसान है, इसलिए करदाताओं पर गैर-जरूरी रिपोर्टिंग का बोझ कम किया जा रहा है।
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HRA छूट के लिए मेट्रो शहरों का विस्तार और वाहन भत्ता
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों में भी भौगोलिक विस्तार किया गया है। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के साथ-साथ हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे और अहमदाबाद को भी मेट्रोपॉलिटन शहर माना जाएगा, जिससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को अधिक HRA छूट का लाभ मिल सकेगा।
वाहन भत्ते की बात करें तो, मासिक कन्वेंस अलाउंस 1600 cc तक की गाड़ियों के लिए ₹8,000 प्रति माह और 1600 cc से अधिक क्षमता वाली गाड़ियों के लिए ₹10,000 प्रति माह तक टैक्स-फ्री रहेगा। विभाग ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDT) को भी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के एक मान्य तरीके के तौर पर शामिल किया है, जो डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूती देता है।
नियमों में भारी कटौती: 511 से घटकर रह गए सिर्फ 333 नियम
CBDT के सूत्रों के अनुसार, नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। पुराने आयकर नियम 1962 की जगह लेने वाले इन नए नियमों में कुल संख्या को 511 से घटाकर केवल 333 कर दिया गया है। यह लगभग 35% की कमी है, जो सिस्टम की जटिलता को कम करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
विभाग ने कहा है कि अब तक 1.1 करोड़ से ज्यादा अपडेटेड और रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किए गए हैं, जहाँ करदाताओं ने कम आय बताई थी लेकिन बाद में विभाग की जांच में पकड़े गए। प्रस्तावित बदलावों से पेपरवर्क कम होगा, सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग तेज होगी और डेटा-ड्रिवन फैसलों से करदाताओं को बेहतर सेवा मिल सकेगी।
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