निफ्टी IT इंडेक्स क्रैश: एंथ्रोपिक AI टूल से सॉफ्टवेयर शेयरों में कोहराम
भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा, जहां निफ्टी IT इंडेक्स क्रैश ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को लाल निशान में धकेल दिया। शुरुआती ट्रेडिंग घंटों में इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत गिरकर 36,393.70 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा अपने क्लाउड AI चैटबॉट के लिए एक नया ‘लीगल टूल’ लॉन्च करना है, जिसने सॉफ्टवेयर निर्माताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में 4 फरवरी को यह गिरावट ग्लोबल कंपनियों में आई बिकवाली के साथ तालमेल बिठाते हुए देखी गई, क्योंकि अब यह डर सताने लगा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक सॉफ्टवेयर और पेशेवर सेवाओं के उद्योग में भारी व्यवधान पैदा कर सकता है।
इंफोसिस, TCS और विप्रो जैसे दिग्गजों में 6% तक की गिरावट
जैसे ही बाजार खुला, भारी-भरकम IT शेयरों ने बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींचना शुरू कर दिया। परसिस्टेंट सिस्टम्स, LTIMindtree और कोफोर्ज के शेयरों में 7.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि इंफोसिस के शेयर 6.2 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इसके अलावा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टेक महिंद्रा, Mphasis और HCL टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भी लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विप्रो के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक नीचे थे। निफ्टी IT इंडेक्स क्रैश होने के कारण यह फिलहाल बाजारों में सबसे ज्यादा नुकसान वाला सेक्टोरल इंडेक्स बना हुआ है। नौकरी.कॉम की मूल कंपनी इन्फो एज में भी उद्योग में नौकरियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सुबह के कारोबार में 5 प्रतिशत की गिरावट आई।
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एंथ्रोपिक के ‘कोवर्क एजेंट’ ने वॉल स्ट्रीट पर पैदा की घबराहट
इस गिरावट का असली कारण दुनिया के दूसरी तरफ वॉल स्ट्रीट पर शुरू हुआ, जब एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड कोवर्क एजेंट के लिए नए प्लग-इन्स लॉन्च किए। ये टूल्स कानूनी, बिक्री, मार्केटिंग और डेटा विश्लेषण में उन कार्यों को स्वचालित कर सकते हैं जिन्हें पहले AI युग के प्रमुख लाभार्थी के रूप में देखा जाता था। एंथ्रोपिक का यह नया सिस्टम कानूनी दस्तावेजों की समीक्षा, कंप्लायंस चेक, वित्तीय मिलान और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन जैसे जटिल कार्य स्वतंत्र रूप से करने में सक्षम है। मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत है, जिससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वैश्विक टेक दिग्गजों के शेयरों में भी मची बिकवाली
एंथ्रोपिक की इस घोषणा के बाद नैस्डैक 1.43% गिरकर 23,255.19 पर बंद हुआ, जबकि डॉव जोन्स में 0.34% की गिरावट रही। AI दिग्गज Nvidia और Microsoft के शेयर की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की कमी आई। Alphabet और Amazon के शेयरों में भी उनके नतीजों से पहले गिरावट देखी गई। विशेष रूप से, Salesforce और Adobe के शेयर लगभग 7 प्रतिशत गिर गए। गोल्डमैन सैक्स द्वारा ट्रैक किए गए अमेरिकी सॉफ्टवेयर शेयरों के एक समूह में एक ही दिन में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे बाजार मूल्य में लगभग $285 बिलियन का नुकसान हुआ। इसी वैश्विक मंदी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा और निफ्टी IT इंडेक्स क्रैश की स्थिति बनी।
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भारतीय बाजार में तेजी पर लगा ब्रेक और विशेषज्ञों की चेतावनी
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका में IT शेयरों में गिरावट से भारतीय IT इंडेक्स नीचे आएगा, जिससे घरेलू बाजार की तेजी पर रोक लगेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि वैल्यूएशन अभी भी ज्यादा हैं, इसलिए लगातार तेजी के लिए कोई मजबूत फंडामेंटल सपोर्ट मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि 6 फरवरी को होने वाली मौद्रिक नीति (MPC) से किसी विशेष समर्थन की उम्मीद नहीं है, क्योंकि दरों और रुख के अपरिवर्तित रहने की संभावना है। रणनीति के अनुसार, बुधवार की बढ़ोतरी मुख्य रूप से FII की शॉर्ट कवरिंग के कारण थी, न कि किसी वास्तविक मजबूती के कारण।
क्या AI टूल्स पारंपरिक सॉफ्टवेयर की जगह ले लेंगे?
बाजार में अब एक नई अनिश्चितता फैल गई है जिसे विश्लेषक “SaaSpocalypse” कह रहे हैं। निवेशकों को चिंता है कि एंथ्रोपिक द्वारा पेश किए गए ऑटोमेशन प्लग-इन्स उन कार्यों को संभाल लेंगे जो पहले अलग-अलग सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन की मांग करते थे। डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग, ऑपरेशनल एनालिसिस और बैक-ऑफिस फंक्शन अब पहले से कहीं ज्यादा ऑटोमेटेड हो गए हैं। एनालिस्ट इसे एक ऐसे भविष्य के रूप में देख रहे हैं जहां AI सिस्टम पूरी सॉफ्टवेयर श्रेणियों को ही बदल सकते हैं। निफ्टी IT इंडेक्स क्रैश इसी डर का प्रतिबिंब है कि क्या भारतीय IT कंपनियाँ इस नए AI युग में खुद को पर्याप्त तेजी से ढाल पाएंगी।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से मिली थोड़ी सकारात्मकता
इतनी नकारात्मकता के बावजूद, घरेलू प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए कुछ उम्मीदें बनी हुई हैं। ICICI सिक्योरिटीज के अनुसार, अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते से रणनीतिक तालमेल मजबूत हुआ है। हालांकि IT सेवाएं सीधे टैरिफ से जुड़ी नहीं हैं, लेकिन बेहतर व्यापार संबंध और डेटा रेगुलेशन पर सकारात्मक रुख भविष्य में राहत दे सकता है। साथ ही, 2026 के केंद्रीय बजट में डेटा सेंटर के निवेश को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स छूट का प्रस्ताव दिया गया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इन नीतियों से अमेरिकी कंपनियों को भारत में टेक खर्च बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है, भले ही तत्काल राजस्व में तेजी न आए।
भविष्य की चुनौतियां और बाजार की दिशा
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स का मानना है कि जब तक प्रमुख स्तर नहीं टूटते, निफ्टी में सीमित गिरावट दिख सकती है। हालांकि, एंथ्रोपिक का नया AI टूल अब सिर्फ एक ‘बज़वर्ड’ नहीं बल्कि वास्तविक आर्थिक कारक बन गया है जो स्टॉक की कीमतों को प्रभावित कर रहा है। भारतीय IT कंपनियों के पास AI को अपनी सेवाओं में एकीकृत करने के लिए टैलेंट और स्केल तो है, लेकिन उन्हें अब निवेशकों को यह भरोसा दिलाना होगा कि AI कोई खतरा नहीं बल्कि एक अवसर है। फिलहाल, सेक्टर-विशिष्ट दबाव और मिले-जुले वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
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