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किरेन रिजिजू अमित शाह बयान पर अड़ा विपक्ष, जवाब से न भागे कांग्रेस”

किरेन रिजिजू अमित शाह

किरेन रिजिजू अमित शाह बयान संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने में महज तीन दिन का समय शेष रह गया है, लेकिन 20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई, कथित पैलेट गन के इस्तेमाल और राम मंदिर दान विवाद को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध और गहरा गया है।

सोमवार (10 अगस्त 2026) को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर संसद में विस्तृत बहस कराने और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हर बिंदु का उत्तर देने के लिए तैयार है।

हालांकि, कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज करते हुए गृह मंत्री के सीधे और स्पष्ट जवाब तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की।

किरेन रिजिजू का बयान: “सरकार पूरी बहस को तैयार, गृह मंत्री का जवाब सुने विपक्ष”

दोपहर 2 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े हर मुद्दे पर खुली चर्चा चाहती है।

अमित शाह के भाषण का आश्वासन: बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक का हवाला देते हुए रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित रहकर विपक्ष के हर सवाल का विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं।

विपक्ष पर तंज: रिजिजू ने कहा, “कांग्रेस और राहुल गांधी सत्र के पहले दिन से गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे थे। अब जब सरकार तैयार है, तो विपक्ष को डरकर भागना नहीं चाहिए और सदन में हंगामा किए बिना गृह मंत्री का भाषण शांति से सुनना चाहिए।”

राम मंदिर मुद्दे पर राज्य की कार्रवाई: राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी के सवाल पर रिजिजू ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले की जांच कर रही है और इसे संसदीय बहस से जोड़कर गतिरोध पैदा करना उचित नहीं है।

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राहुल गांधी का तीखा हमला: “गोली चलाने का आदेश किसने दिया? जवाब दें या पद छोड़ें शाह”

किरेन रिजिजू के वक्तव्य के तुरंत बाद कांग्रेस मुख्यालय में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर तीखा जुबानी हमला बोला।

सामान्य भाषण में रुचि नहीं: राहुल गांधी ने कहा कि देश को संसद में गृह मंत्री के “सामान्य विषयों” पर भाषण सुनने में कोई रुचि नहीं है। सवाल यह है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था?

जिम्मेदारी तय करने की मांग: राहुल गांधी ने कहा, “अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। यदि उन्होंने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था तो वे दोषी हैं, और यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी तो वे अक्षम हैं। दोनों ही स्थितियों में उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।”

प्रधानमंत्री की माफी और राम मंदिर विवाद: राहुल गांधी ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मासूम छात्रों पर हुए पुलिस अत्याचार के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं पर भी पृथक बहस कराई जानी चाहिए।

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जे.पी. नड्डा का पलटवार: “रोज मांगें बदलकर देश को गुमराह कर रहे हैं राहुल गांधी”

राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पलटवार किया और कांग्रेस पर जानबूझकर संसद ठप करने का आरोप लगाया।

गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार का आरोप: नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी पिछले 15 दिनों से लगातार अपनी मांगें बदलकर संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। जब सरकार गृह मंत्री का बयान कराने पर सहमत हुई, तो विपक्ष ने राम मंदिर का नया मुद्दा खड़ा कर दिया।

संसदीय मर्यादा का उल्लंघन: बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि सरकार हर लोकतांत्रिक बहस के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य विधायी कार्यों को रोकना और देश को गुमराह करना है।

विधायी संकट और ‘जेन जी’ तक पहुंचने की संघ-बीजेपी की योजना

संसद में जारी इस अभूतपूर्व गतिरोध के कारण मानसून सत्र के अंतिम तीन दिनों में कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य अधर में लटक गए हैं:

अधूरी विधायी प्रक्रिया: परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) और महिला आरक्षण से जुड़े नए कानूनी संशोधनों पर चर्चा का समय बेहद कम बचा है। इसके अलावा विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA) को संसदीय समिति के पास भेजे जाने की संभावना है।

संघ परिवार की ‘Gen Z’ रणनीति: संसदीय गतिरोध के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी ने युवाओं (Gen Z) से जुड़ने के लिए एक बड़े अभियान की रूपरेखा तैयार की है। 19 से 21 अगस्त तक विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाली सालाना समन्वय बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबोले की अध्यक्षता में युवा मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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    संपादकीय दृष्टिकोण:

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद का मुख्य दायित्व जनहित के ज्वलंत विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित करना और कानून बनाना है। 20 जुलाई की घटना और छात्रों से जुड़े विषय अत्यंत संवेदनशील हैं, जिन पर गृह मंत्री के आधिकारिक वक्तव्य और विस्तृत बहस की आवश्यकता है।

    सत्र के अंतिम दिनों में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर बजटीय व विधायी उत्तरदायित्वों को पूरा करना चाहिए, ताकि संसदीय गरिमा बनी रहे। विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच संसद में छाया किरेन रिजिजू अमित शाह बयान

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