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राहुल गांधी बर्लिन संबोधन भाजपा पर संविधान खत्म करने का आरोप

राहुल गांधी बर्लिन संबोधन

राहुल गांधी का बर्लिन संबोधन भारत और वैश्विक लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक चेतावनी के रूप में उभरकर सामने आया है। जर्मनी की पांच दिवसीय यात्रा पर गए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बर्लिन के हर्टी स्कूल में छात्रों और प्रबुद्ध जनों को संबोधित करते हुए केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भारत के संविधान को खत्म करने का प्रस्ताव दे रही है, जो देश के हर नागरिक को समानता की गारंटी देता है। गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि भारत के उस मूल विजन को बचाने की है जिसे संविधान ने गढ़ा था।

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बीजेपी का ‘संविधान और समानता’ विरोधी एजेंडा

हर्टी स्कूल में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा की विचारधारा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि “बीजेपी असल में जो प्रस्ताव दे रही है, वह संविधान को खत्म करना है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल राज्यों, भाषाओं और धर्मों के बीच की समानता को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है।

गांधी के अनुसार, संविधान का केंद्रीय विचार यह है कि हर व्यक्ति का मूल्य समान होगा, लेकिन वर्तमान सरकार इस मूल भावना पर ही प्रहार कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में आज दो विचारधाराओं का टकराव है—एक जो विविधता और बातचीत में विश्वास रखती है, और दूसरी जो एक व्यक्ति की मनमर्जी से शासन चलाना चाहती है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर ‘कब्जे’ और ‘हथियार’ बनाने का आरोप

कांग्रेस नेता ने अपने भाषण में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि भारत का संस्थागत ढांचा अब स्वतंत्र नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, “हमारे संस्थागत ढांचे पर बड़े पैमाने पर कब्जा हो रहा है।” राहुल गांधी ने खुफिया एजेंसियों, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन्हें ‘हथियार’ बना लिया गया है।

राहुल गांधी का बर्लिन संबोधन इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि इन एजेंसियों के पास भाजपा के खिलाफ कोई मामला नहीं है, जबकि विपक्ष के खिलाफ मामलों की भरमार है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया हमला करार दिया।

चुनावी मशीनरी और निष्पक्षता पर सवाल

चुनावों की पवित्रता पर चर्चा करते हुए गांधी ने दावा किया कि भारत की चुनावी मशीनरी में मौलिक रूप से समस्याएं आ गई हैं। उन्होंने हरियाणा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से वहां जीत हासिल की थी, लेकिन परिणाम कुछ और रहे। इसी तरह, उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) जैसी संस्थाओं पर भी आरएसएस का प्रभाव बढ़ रहा है, जो देश की संस्थाओं पर कब्जा करने की उनकी व्यापक परियोजना का हिस्सा है। गांधी के अनुसार, जब संस्थाएं अपनी निर्धारित भूमिका नहीं निभातीं, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।

कॉरपोरेट फंडिंग और वित्तीय असमानता का खेल

आर्थिक पक्ष पर प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने एक ‘लेन-देन’ के मॉडल का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत में व्यवसायी विपक्षी दलों के बजाय भाजपा को समर्थन देने के लिए मजबूर हैं। अगर कोई व्यवसायी कांग्रेस का समर्थन करने की कोशिश करता है, तो उसे एजेंसियों के माध्यम से धमकाया जाता है।

उन्होंने भाजपा और विपक्ष के पास उपलब्ध धन की तुलना करने की बात कहते हुए कहा कि भाजपा संस्थागत ढांचे का उपयोग राजनीतिक शक्ति और आर्थिक संसाधन जुटाने के एक उपकरण के रूप में कर रही है। गांधी ने चेतावनी दी कि यह असंतुलन लोकतंत्र के लिए घातक है।

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‘मेड इन चाइना’ और मैन्युफैक्चरिंग का गिरता स्तर

जर्मनी के म्यूनिख में बीएमडब्ल्यू वर्ल्ड म्यूजियम के दौरे और हर्टी स्कूल के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने आर्थिक विजन पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि भारत और पश्चिम ने उत्पादन का काम चीन को “सौंप दिया है”, जिससे लोकतंत्रों में रोजगार सृजन पंगु हो गया है।

राहुल गांधी का बर्लिन संबोधन इस बात को रेखांकित करता है कि ‘मेड इन चाइना’ सामानों ने भारत, अमेरिका और यूरोप में राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास क्षमता, आबादी और लागत ढांचा होने के बावजूद हम उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। उनके अनुसार, पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह के मॉडल को ही आगे बढ़ाया है जो अब पूरी तरह ‘जाम’ हो चुका है।

वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में भारतीय लोकतंत्र

राहुल गांधी ने वैश्विक समुदाय को याद दिलाया कि भारतीय लोकतंत्र सिर्फ भारत की संपत्ति नहीं है, बल्कि एक “वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति” है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और जटिल लोकतंत्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए, जब भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला होता है, तो यह वास्तव में वैश्विक लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला है।

उन्होंने भारत की तुलना यूरोपीय संघ से करते हुए कहा कि भारत ने 1947 में संविधान के आधार पर एक सफल आर्थिक और राजनीतिक संघ बनाया था, जिसे अब कमजोर किया जा रहा है।

INDIA गठबंधन की एकजुटता और आरएसएस का विरोध

गठबंधन की राजनीति पर बोलते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि INDIA गठबंधन की पार्टियां स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती हैं, लेकिन वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा के खिलाफ पूरी तरह एकजुट हैं।

उन्होंने कहा कि “हम संसद में एकजुट हैं और उन सभी कानूनों का मुकाबला करेंगे जिनसे हम असहमत हैं।” गांधी के अनुसार, यह लड़ाई चुनावों से कहीं अधिक गहरी है और विपक्ष जल्द ही एक ऐसी ‘प्रतिरोध की प्रणाली’ तैयार करेगा जो भाजपा के इस संस्थागत कब्जे को चुनौती देने में सफल होगी।

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भाजपा का पलटवार और सोरोस लिंक के आरोप

राहुल गांधी के इन आरोपों पर भाजपा ने भी कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि गांधी जर्मनी में “भारत विरोधी ताकतों” और “भारत के दुश्मनों” से मिले। भाजपा ने हर्टी स्कूल की प्रेसिडेंट कॉर्नेलिया वोल के साथ गांधी की तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि उनके संबंध जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से हैं।

भाजपा ने इसे भारत की विकास गाथा के खिलाफ “फर्जी खबर” फैलाने की साजिश बताया और इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हुई मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ के आंकड़े पेश किए। हालांकि, राहुल गांधी का बर्लिन संबोधन राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ चुका है कि क्या वास्तव में भारतीय लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे में बदलाव की कोशिश की जा रही है।

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