77वें गणतंत्र दिवस पर राहुल गांधी सीटिंग अरेंजमेंट पर मचा सियासी घमासान
77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड के दौरान राहुल गांधी सीटिंग अरेंजमेंट एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
कांग्रेस ने राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, कैबिनेट रैंक) और मल्लिकार्जुन खरगे (राज्यसभा में LoP और कांग्रेस अध्यक्ष) को शुरू में तीसरी पंक्ति में बिठाने को मोदी सरकार की तानाशाही और विपक्ष-विरोधी मानसिकता का घिनौना उदाहरण करार दिया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह लोकतंत्र की मूल भावना को कुचलने जैसा है।
कांग्रेस के अनुसार, इन दोनों नेताओं को VIP एनक्लोजर में फ्रंट रो में जगह मिलनी चाहिए थी, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य उच्च पदाधिकारी विराजमान थे।
संवैधानिक मर्यादा और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का दावा
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन और जानबूझकर किया गया अपमान बताया है। पार्टी का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष (LoP) की संवैधानिक हैसियत कैबिनेट मंत्री के स्तर की होती है और वे देश के 60% भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऐसे में उन्हें तीसरी रो में ‘ठूंसकर’ मोदी सरकार ने पूरे विपक्ष को नीचा दिखाने की कोशिश की है। हालांकि, परेड के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे को बाद में फ्रंट रो में शिफ्ट किया गया—संभवतः ओलंपिक मेडल विनर्स या अन्य अतिथियों के लिए जगह खाली होने के बाद—लेकिन राहुल गांधी को पूरे समय तीसरी रो में ही रखा गया।
कांग्रेस का मानना है कि यह कोई “गलती” नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार से प्रेरित एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश थी।
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कांग्रेस का पलटवार: 2014 की तुलना और ‘छोटी सोच’ का आरोप
इस विवाद पर कांग्रेस ने तुरंत मोर्चा खोलते हुए सरकार पर जोरदार हमला बोला। कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने इसे सरकार की “छोटी सोच” का परिणाम बताया, जबकि ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने बीजेपी पर “अपमानजनक व्यवहार” का सीधा आरोप लगाया।
पार्टी ने सोशल मीडिया पर 2014 की वह तस्वीर साझा की, जिसमें यूपीए सरकार के दौरान बीजेपी के तत्कालीन वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को फ्रंट रो में बिठाया गया था। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने हमेशा लोकतंत्र की गरिमा रखी, लेकिन वर्तमान सरकार इसे खत्म करने पर तुली है।
बलिदानों का अपमान और “एक पंक्ति, एक नेता” की नीति
गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू, फिरोज गांधी, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह और लाला लाजपत राय की कुर्बानियों को कोई नहीं भूल सकता।
उन्होंने तर्क दिया कि राहुल गांधी के परिवार ने देश के लिए दो जानें कुर्बान की हैं, और उनकी फैमिली को पीछे बिठाना देश का अपमान है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह कदम “एक राष्ट्र, एक चुनाव” जैसे एजेंडे से पहले “एक पंक्ति, एक नेता” थोपने जैसा है, जहां राष्ट्रीय उत्सव को भी महज सत्ता का प्रचार मंच बना दिया गया है।
बीजेपी का बचाव: राष्ट्रपति सचिवालय और प्रोटोकॉल का हवाला
दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। सरकारी सूत्रों और डिफेंस मिनिस्ट्री ने दावा किया कि राहुल गांधी सीटिंग अरेंजमेंट पूरी तरह से राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा तय प्रोटोकॉल और ‘टेबल ऑफ प्रीसिडेंस’ के अनुसार था।
बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर “सेंस ऑफ एंटाइटलमेंट” (विशेषाधिकार की भावना) का तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस परिवार को संविधान से ऊपर मानती है।
बीजेपी ने यह भी तर्क दिया कि कई सीनियर कैबिनेट मंत्री जैसे अर्जुन राम मेघवाल भी राहुल के आसपास या पीछे बैठे थे, इसलिए इसे अपमान कहना गलत है।
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डिफलेक्शन टैक्टिक्स और मोबाइल फोन का विवाद
विवाद तब और गहरा गया जब बीजेपी के प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे परेड के दौरान फोन स्क्रॉल करते नजर आ रहे थे। बीजेपी ने आरोप लगाया कि जब ब्रह्मोस मिसाइल का प्रदर्शन हो रहा था, तब राहुल गंभीर नहीं थे।
हालांकि, कांग्रेस ने इसे बीजेपी की ‘डिफलेक्शन टैक्टिक्स‘ (ध्यान भटकाने की रणनीति) करार दिया। कांग्रेस का सवाल है कि क्या फोन का इस्तेमाल करना उस संवैधानिक अपमान से बड़ा अपराध है, जो विपक्ष के नेता के साथ किया गया? कांग्रेस समर्थकों ने इसे “मोदी की असुरक्षा” और “तानाशाही” का प्रमाण बताया।
पुराना पैटर्न: 2018 और 2024 की घटनाओं का जिक्र
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी सीटिंग अरेंजमेंट पर बवाल हुआ हो। 2018 में भी राहुल को छठी रो में बिठाया गया था, जिसे कांग्रेस ने “सस्ती राजनीति” कहा था।
वहीं, 2024 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी उन्हें पीछे की कतारों में जगह मिली थी। पंजाब कांग्रेस चीफ अमरिंदर सिंह राजा वॉरिंग और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का दर्जा प्रधानमंत्री के ठीक बाद आता है और राष्ट्रीय एकता के दिन भी विपक्ष को अपमानित करना मोदी-शाह की जोड़ी की चुनाव-ओरिएंटेड मानसिकता को दर्शाता है।
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गणतंत्र की गरिमा और सत्ता का अहंकार
77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ का यह नज़ारा लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत दे गया। जहां एक तरफ यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में भारत की शक्ति देख रहे थे, वहीं अंदरूनी राजनीति में राहुल गांधी सीटिंग अरेंजमेंट ने सत्ता के अहंकार को उजागर कर दिया।
कांग्रेस MLC बीके हरिप्रसाद और सांसद मनिक्कम टैगोर ने इसे “शेम अलर्ट” बताते हुए कहा कि यह पेट्टी माइंडसेट का उदाहरण है। अंततः, यह घटना साबित करती है कि जब राष्ट्रीय गौरव के क्षणों को राजनीतिक स्कोर सेटल करने का मैदान बना दिया जाता है, तो वहां संविधान की भावना और राष्ट्र की गरिमा ही हारती है।
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