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रायपुर वनडे: कोहली और गायकवाड़ के शतक पर फिरा पानी, भारत की हार

रायपुर वनडे

रायपुर वनडे में भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ एक दिल तोड़ने वाली हार का सामना करना पड़ा। 2019 के बाद यह दूसरी बार हुआ है जब विराट कोहली के शतक के बावजूद भारत कोई वनडे मैच हार गया हो। बुधवार को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने 359 रनों के विशाल लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करते हुए चार विकेट से जीत दर्ज की और तीन मैचों की सीरीज को 1-1 से बराबर कर दिया।

विराट कोहली ने 93 गेंदों में शानदार 102 रन बनाए, जिसमें सात चौके और दो छक्के शामिल थे, और उनका स्ट्राइक रेट 109 से ज्यादा था। उनके साथ रुतुराज गायकवाड़ ने भी अपने करियर का पहला वनडे शतक जमाते हुए 83 गेंदों में 105 रन की बेहतरीन पारी खेली। लेकिन एडेन मार्करम की 98 गेंदों में 110 रन की तूफानी पारी और मैथ्यू ब्रीट्ज़के व डेवाल्ड ब्रेविस के अर्धशतकों ने भारतीय उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यह वनडे इतिहास में भारत के खिलाफ सबसे बड़ा रन चेज भी बन गया।

कोहली और गायकवाड़ की रिकॉर्ड साझेदारी

मैच की शुरुआत भारत के लिए मिली-जुली रही। साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया, जो वनडे में भारत की लगातार 20वीं टॉस हार थी। रोहित शर्मा (14) और यशस्वी जायसवाल (22) के जल्दी आउट होने के बाद मेजबान टीम का स्कोर 10वें ओवर में 62/2 था। इसके बाद विराट कोहली और रुतुराज गायकवाड़ ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 195 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की, जिसने 2018 में डरबन में कोहली और अजिंक्य रहाणे द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

गायकवाड़ ने अपनी पारी में 12 चौके और दो छक्के लगाए और स्पिनरों खासकर केशव महाराज के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। वहीं, कोहली ने अपनी क्लासिक शैली में खेलते हुए पारी को संवारा और अपना 53वां वनडे शतक पूरा किया। यह 6 साल और 9 महीने बाद हुआ जब कोहली के शतक के बावजूद भारत हारा। इससे पहले मार्च 2019 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसा हुआ था जब कोहली के 123 रन के बावजूद टीम हारी थी।

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डेथ ओवर्स में भारत की धीमी गति और राहुल का प्रयास

कोहली के आउट होने के बाद भारतीय पारी की गति थोड़ी धीमी पड़ गई। अगले 9.5 ओवर में टीम सिर्फ 56 रन बना सकी। रवींद्र जडेजा संघर्ष करते दिखे और 27 गेंदों में सिर्फ 24 रन ही बना सके, जिसके लिए उनकी काफी आलोचना भी हुई। हालांकि, केएल राहुल ने अंतिम ओवरों में तेजी दिखाते हुए 43 गेंदों में नाबाद 66 रन बनाए, जिसमें सात चौके और दो छक्के शामिल थे। जडेजा और राहुल ने छठे विकेट के लिए 69 रनों की साझेदारी की, जिससे भारत 358/5 के मजबूत स्कोर तक पहुंच सका।

फिर भी, विश्लेषकों का मानना है कि डेथ ओवर्स में धीमी बल्लेबाजी की वजह से भारत कम से कम 20 रन पीछे रह गया, जो अंततः रायपुर वनडे के नतीजे में निर्णायक साबित हुआ। अगर जडेजा ने थोड़ा और तेज खेला होता तो स्कोर 380 के पार जा सकता था।

एडेन मार्करम का जवाबी हमला और भारतीय गेंदबाजी की विफलता

359 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत तेज रही, लेकिन अर्शदीप सिंह ने क्विंटन डी कॉक को जल्दी आउट कर दिया। इसके बाद कप्तान टेम्बा बावुमा (46) और एडेन मार्करम ने 101 रनों की साझेदारी कर पारी को संभाला। मार्करम ने अपना चौथा वनडे शतक और ओपनर के तौर पर पहला शतक लगाया। उन्होंने 98 गेंदों में 10 चौकों और चार छक्कों की मदद से 110 रन बनाए। मार्करम को 53 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला जब यशस्वी जायसवाल ने कुलदीप यादव की गेंद पर लॉन्ग-ऑन पर उनका आसान कैच छोड़ दिया।

भारतीय गेंदबाजों के लिए ओस एक बड़ी चुनौती साबित हुई। प्रसिद्ध कृष्णा ने 8.2 ओवर में 82 रन लुटाए, जो काफी महंगे साबित हुए। हर्षित राणा और कुलदीप यादव भी रनों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे। सिर्फ अर्शदीप सिंह (2/54) ही थोड़ा प्रभाव छोड़ पाए। खराब गेंदबाजी और फील्डिंग ने साउथ अफ्रीका के लिए चेज को आसान बना दिया।

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युवा ब्रिगेड: ब्रेविस और ब्रीट्ज़के ने पलटा मैच

मार्करम के आउट होने के बाद मैच फंसता हुआ दिख रहा था, लेकिन युवा मैथ्यू ब्रीट्ज़के (68) और डेवाल्ड ब्रेविस (54) ने शानदार खेल दिखाया। दोनों के बीच 92 रनों की साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह से प्रोटियाज़ के पक्ष में कर दिया। ब्रेविस ने अपनी पहली वनडे फिफ्टी सिर्फ 34 गेंदों में पूरी की, जिसमें पांच छक्के शामिल थे। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

अंत में, जब दोनों सेट बल्लेबाज आउट हो गए, तब भी साउथ अफ्रीका नहीं घबराया। नंद्रे बर्गर और टोनी डी ज़ोरज़ी चोट के कारण उपलब्ध नहीं थे, इसके बावजूद केशव महाराज (10*) और कॉर्बिन बॉश (25*) ने धैर्य बनाए रखा और चार गेंद शेष रहते अपनी टीम को चार विकेट से यादगार जीत दिला दी। यह रायपुर वनडे साउथ अफ्रीका के लिए एक ऐतिहासिक जीत बन गया।

टॉस का श्राप और गेंदबाजी की चिंताएं

इस मैच ने एक बार फिर भारतीय टीम की टॉस की किस्मत को उजागर किया। 2023 वर्ल्ड कप के बाद से भारत लगातार 20 वनडे मैचों में टॉस हार चुका है। हालांकि टीम जीतती रही है, लेकिन रायपुर वनडे में ओस के कारण बाद में गेंदबाजी करना बहुत मुश्किल हो गया। सपाट पिच और गीली गेंद ने भारतीय गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

इसके अलावा, 350 से ज्यादा का स्कोर डिफेंड न कर पाना भारतीय गेंदबाजी यूनिट के लिए चिंता का विषय है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी की अनुपस्थिति में युवा गेंदबाज दबाव में बिखरते हुए नजर आए। प्रसिद्ध कृष्णा और हर्षित राणा जैसे गेंदबाजों को अभी और अनुभव की जरूरत है।

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साउथ अफ्रीका का आत्मविश्वास और सीरीज का रोमांच

मैच के बाद साउथ अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने अपनी टीम के धैर्य की तारीफ की। उन्होंने कहा, “इस जीत से हमें काफी कॉन्फिडेंस मिलेगा। एडेन और ब्रीट्ज़के की साझेदारी शानदार थी और बॉश ने काफी मैच्योरिटी दिखाई।” मार्करम, जिन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, ने कहा कि पहले मैच की हार के बाद वह जिम्मेदारी लेना चाहते थे और उन्होंने ओस का पूरा फायदा उठाया।

इस जीत के साथ ही तीन मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर हो गई है। अब शनिवार को विशाखापत्तनम में होने वाला तीसरा और आखिरी मैच निर्णायक होगा। रायपुर वनडे की हार ने भारतीय टीम को अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है, खासकर अपनी गेंदबाजी और फील्डिंग को लेकर।

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