‘बॉम्बे स्टाइल’ में वैन रोकने वाली “रिया अहीर मुंबई पुलिस ” का बयान:
रिया अहीर मुंबई पुलिस वैन राजधानी दिल्ली से लेकर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक फैले नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा विवाद और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्र आंदोलन के बीच कई ऐसी अनसुनी और साहसिक तस्वीरें उभरी हैं, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा है।
मुंबई के दादर और शिवाजी पार्क इलाके में तेज बारिश के बीच पुलिस वैन के सामने हाथ फैलाकर 40 मिनट तक डटी रहने वाली 27 वर्षीय मॉडल व अभिनेत्री रिया अहीर अचानक इस नागरिक आंदोलन का एक बड़ा चेहरा बन गई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में संसद में पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कठोर कानूनी सजा का प्रावधान लाने की घोषणा पर रिया अहीर ने प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की पहल का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल वादों से नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन (Implementation) से ही पीड़ित छात्रों और देश की जनता का विश्वास बहाल होगा।
“सिर्फ घोषणाओं से भरोसा नहीं लौटता”: पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया
एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए रिया अहीर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन सख्त कार्रवाइयों और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन की बात कही है, वह दरअसल उन लाखों छात्रों की ही मांग थी जो महीनों से सड़कों पर रो रहे हैं।
रिया ने अतीत की प्रशासनिक ढिलाई का हवाला देते हुए आगाह किया:
“मैं प्रधानमंत्री की बात से सहमत हूँ कि पेपर लीक के आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कहना एक बात है और जमीनी स्तर पर उसे लागू करना दूसरी बात।
2024 के पेपर लीक मामलों का मुख्य साजिशकर्ता जमानत पर बाहर आ गया और बरी हो गया। हमें उम्मीद है कि इस बार फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से न्याय मिलेगा और दोषियों को सख्त सजा होगी।”
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सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति और सीजेपी-सरकार वार्ता का समर्थन
केंद्र सरकार के साथ वार्ता के बाद लद्दाखी शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों का अनशन समाप्त करने पर खुशी जताते हुए रिया ने कहा कि किसी की जान और स्वास्थ्य सबसे पहले आता है।
उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि सोनम वांगचुक जी ने अपना उपवास तोड़ा है, लेकिन मांगों के प्रति उनका और देश के युवाओं का समर्पण कायम है। सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच जारी बातचीत एक सकारात्मक कदम है।
जितने अधिक लोग इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होंगे, उतना ही बेहतर होगा। हालांकि, इस बातचीत का कोई न कोई ठोस परिणाम निकलना चाहिए।”
‘बॉम्बे वाला अंदाज’: जब दादर की सड़क पर रुकी पुलिस वैन
रिया अहीर ने उस नाटकीय घटनाक्रम को याद किया जिसने उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बुधवार शाम जब वह शिवाजी पार्क में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लेने जा रही थीं, तो दादर ट्रैफिक में उन्हें हिरासत में लिए गए छात्रों से भरी एक पुलिस वैन दिखी।
रिया ने बताया:
“मैंने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि वे बिना किसी वारंट या ठोस वजह के छात्रों को क्यों ले जा रहे हैं। जब उन्होंने वैन आगे बढ़ानी चाही, तो मैंने तुरंत ‘बॉम्बे वाला अंदाज’ अपनाया और सीधे वैन के सामने खड़ी हो गई।
बारिश हो रही थी, 40 मिनट तक तनातनी चली। पुलिस अपनी जगह अड़ी थी, मैं अपनी जगह। आखिरकार जब ट्रैफिक जाम बढ़ने लगा तो पुलिस को हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करना पड़ा।”
सोशल मीडिया पर ‘पैट्रियट बैडी’ (Patriot Baddie) के नाम से चर्चित हो रही रिया ने उन आरोपों को खारिज किया कि उन्होंने यह सब पब्लिसिटी या शोहरत के लिए किया था। उन्होंने कहा, “मैंने हुडी और कैप पहनी हुई थी। मैं क्रेडिट नहीं चाहती। अगर मैं उस दिन उस वैन के सामने से हट जाती, तो एक नागरिक के रूप में खुद को हारा हुआ मानती।”
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छात्रों से भावुक अपील: “जिंदगी कीमती है, आत्महत्या कोई हल नहीं”
प्रदर्शनकारी रिया अहीर ने देशभर के व्यथित नीट (NEET-UG 2026) परीक्षार्थियों से धैर्य बनाए रखने और अहिंसक मार्ग पर चलने का आग्रह किया।
उन्होंने छात्रों को संदेश देते हुए कहा:
“आपकी जिंदगी बेहद कीमती है। कृपया कोई भी खौफनाक कदम न उठाएं, आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं हो सकता। हमें अपनी आवाज उठाने के लिए लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करना होगा।
ईमेल भेजिए, अधिकारियों से जवाबदेही मांगिए।
में सबसे महत्वपूर्ण शब्द ‘शांतिपूर्ण’ है। खुद भी शांत रहें और व्यवस्था को जवाबदेह बनाएं।”
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संपादकीय दृष्टिकोण:
मुंबई की सड़कों पर रिया अहीर जैसे आम नागरिकों का स्वतःस्फूर्त रूप से सामने आना इस बात का प्रमाण है कि नीट परीक्षा विवाद केवल परीक्षार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद अब केंद्र सरकार की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह प्रस्तावित एंटी-पेपर लीक कानून को शीघ्र लागू करे ताकि युवाओं का देश की परीक्षा प्रणाली पर विश्वास पुनः बहाल हो सके।
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