धर्मेंद्र प्रधान और सोनम वांगचुक का पुराना ट्वीट वायरल; ‘तारीफ’ से ‘तल्खी’ तक
भारतीय राजनीति और सामाजिक आंदोलनों में वक्त का पहिया कितनी तेजी से घूमता है, इसका जीवंत उदाहरण इस समय देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिल रहा है। मार्च 2023 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) पर नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर उनकी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करने वाले प्रख्यात लद्दाखी शिक्षाविद व क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक आज उन्हीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं।
जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा धांधली के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन के बीच, तीन साल पुराना वह सोशल मीडिया पोस्ट (ट्वीट) तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शिक्षा मंत्री और वांगचुक एक-दूसरे के विजन की सराहना करते नहीं थक रहे थे।
मार्च 2023 का वह वायरल पोस्ट: जब NEP पर एक थे सुर
मार्च 2023 में, सोनम वांगचुक अपनी पत्नी और सोशल एंटरप्रेन्योर गीतांजलि जे. आंग्मो के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिले थे। मुलाकात के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा था:
“श्री @Wangchuk66 और उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो जी के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। शिक्षा में बदलाव लाने, अनुभव-आधारित सीखने (Experiential Learning) को बढ़ावा देने और इनोवेशन व सस्टेनेबल डेवलपमेंट की संस्कृति विकसित करने के लिए उनके जुनून, विचारों और लगन की मैं सराहना करता हूँ।”
इसके जवाब में वांगचुक ने भी गर्मजोशी से लिखा था कि शिक्षा में नए विचारों के प्रति मंत्रीजी के खुलेपन से वे एनईपी (NEP) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए और अधिक प्रतिबद्ध महसूस कर रहे हैं। यहाँ तक कि संसद की एक स्थायी समिति ने 2025 में वांगचुक के संस्थान ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स’ (HIAL) के मॉडल की सराहना करते हुए इसे पूरे देश में लागू करने की सिफारिश की थी।
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सहयोग से टकराव तक का सफर: नीट (NEET-UG 2026) का मोड़
लेकिन तीन साल बाद, 2026 में परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। 12 मई 2026 को नीट परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक (“गेस पेपर्स”) के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने और फिर 21 जून को आयोजित री-टेस्ट के बीच देश के कई हिस्सों से परीक्षार्थियों की आत्महत्या की दुखद खबरें सामने आईं।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश के युवाओं में भारी असंतोष पैदा किया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले युवाओं ने जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल दिया। सोनम वांगचुक 28 जून से इस आंदोलन का मुख्य चेहरा बने हुए हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे व जवाबदेही की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं।
सफदरजंग से मेदांता अस्पताल स्थानांतरण; परिजनों ने लगाए आरोप
जंतर-मंतर से अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। हालांकि, वांगचुक और उनके परिजनों (पत्नी गीतांजलि आंग्मो) ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल में ‘गैर-कानूनी तरीके से पुलिस हिरासत’ में रखा गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप और मंजूरी के बाद अब सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है। अनशन के तीसरे हफ्ते में पहुंचने पर वांगचुक ने कहा:
“हो सकता है कि हमारे इस अनशन से तुरंत किसी का इस्तीफा न आए, लेकिन अगर इससे देश की जनता में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर जागरूकता आती है, तो हमारे इस प्रयास का मकसद पूरा हो जाएगा।”
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धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार: “विपक्ष कर रहा राजनीति”
दूसरी ओर, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए पुलिसिया एक्शन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 7, लोक कल्याण मार्ग पर किए गए प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी ‘X’ पर अपना रुख स्पष्ट किया। प्रधान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल छात्रों के संवेदनशील मुद्दों का समाधान ढूंढने के बजाय उन्हें राजनीतिक हथियार (Political Tool) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस बीच केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) मांगी है।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
नीट परीक्षा विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीतियां कितनी भी महत्वाकांक्षी क्यों न हों, यदि उनके क्रियान्वयन और परीक्षाओं की पवित्रता में खामी आती है, तो जनाक्रोश स्वाभाविक है। 2023 में एनईपी के मंच पर एक साथ खड़े दिखने वाले धर्मेंद्र प्रधान और सोनम वांगचुक का आज आमने-सामने होना भारतीय शिक्षा प्रणाली के भीतर गहराई से बैठी प्रशासनिक सुधारों की मांग को दर्शाता है।
सरकार को चाहिए कि वह छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आंदोलनकारियों से संवाद का रास्ता साफ करे ताकि गतिरोध समाप्त हो सके।
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