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सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ पंजीकरण की UMEED पोर्टल समय सीमा सहमति दी

UMEED पोर्टल समय सीमा

वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की UMEED पोर्टल समय सीमा बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति जता दी है। यह याचिका AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के वकील निज़ाम पाशा द्वारा दायर की गई थी। इस अर्जी में UMEED पोर्टल के तहत ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ (User by Waqf) संपत्तियों को शामिल करने का मुद्दा उठाया गया है।

केंद्र सरकार ने 6 जून को UMEED पोर्टल लॉन्च किया था, जिसके माध्यम से देशभर की सभी वक्फ संपत्तियों की जियो-टैगिंग और पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यह कदम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पंजीकरण के लिए छह महीने की समय सीमा दी गई थी, जिसके भीतर संपत्तियों का विवरण अपलोड करना अनिवार्य था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि अब पंजीकरण की अवधि में केवल 1 महीना ही शेष बचा है।

AIMPLB ने मांगी थी दो साल की मोहलत, ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियों का मुद्दा

इस पृष्ठभूमि में, AIMPLB (ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने पंजीकरण की समय सीमा को दो साल तक बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने सभी मुतवल्लियों (वक्फ संपत्ति के प्रबंधकों) से शीघ्र पंजीकरण की अपील की और इसे कानूनी बाध्यता बताया।

फरंगी महली ने जानकारी दी कि अकेले उत्तर प्रदेश में ही लगभग 1.5 लाख वक्फ हैं, लेकिन अब तक UMEED पोर्टल पर केवल 250 वक्फ ही दर्ज हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियाँ होने के कारण पंजीकरण का कार्य कठिन है। सुप्रीम कोर्ट की इस सहमति से कई राज्य प्रभावित हो सकते हैं, जहाँ पंजीकरण की रफ्तार धीमी है।

तेलंगाना में शुरू हुई प्रक्रिया, मुतवल्लियों को मिल रहा है प्रशिक्षण

UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने की प्रक्रिया तेलंगाना में आरंभ हो चुकी है। इसके लिए बेंगलुरु में आईटी पेशेवरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने इस कार्यशाला में भाग लिया। वक्फ बोर्ड मुतवल्लियों को पोर्टल उपयोग में मार्गदर्शन देगा और बुजुर्ग मुतवल्लियों के लिए तकनीकी सहायता अभियान भी चलाया जाएगा।

प्रशिक्षण के बाद वक्फ बोर्ड अब देशभर में पोर्टल पंजीकरण का प्रचार-प्रसार करेगा और अभियान चलाकर विवरण अपलोड करवाएगा। इसी क्रम में, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया, ईदगाह लखनऊ में भी कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने मुतवल्लियों को पोर्टल का प्रशिक्षण दिया।

इसका उद्देश्य सभी वक्फ संपत्तियों का शीघ्र पंजीकरण सुनिश्चित करना है, क्योंकि पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना कानूनी अनिवार्यता है। सही प्रशिक्षण से तकनीकी अड़चनें दूर होंगी और पंजीकरण से पारदर्शिता और नियंत्रण संभव होगा।

“उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ” प्रावधान पर अदालती रुख

जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताई है, उसमें ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ (User by Waqf) संपत्तियाँ भी शामिल हैं। ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ उस प्रथा को कहते हैं जिसमें संपत्ति का धार्मिक उपयोग आधार बनता है। इसमें मालिक द्वारा औपचारिक घोषणा जरूरी नहीं होती।

केंद्र सरकार ने संशोधित अधिनियम में इस प्रावधान को हटा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि याचिका को सूचीबद्ध करने का मतलब अनुमति देना नहीं है; यह केवल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

वक्फ अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर अंतरिम रोक

इस पूरे कानूनी घटनाक्रम के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को वक्फ अधिनियम, 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाई थी। इसमें वह खंड शामिल था जो केवल पिछले 5 वर्षों से इस्लाम मानने वालों को वक्फ बनाने की अनुमति देता था। हालांकि, अदालत ने संवैधानिकता की धारणा को ध्यान में रखते हुए पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

अदालत को ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ प्रावधान हटाना प्रथम दृष्टया उचित लगा था। इसके अलावा, सरकार द्वारा वक्फ भूमि हड़पने के तर्क को अदालत ने “अमान्य” बताया था। यह अंतरिम फैसला वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की कानूनी आवश्यकता को बरकरार रखता है, जिसकी UMEED पोर्टल समय सीमा बढ़ाने पर अब विचार किया जा रहा है।

यह ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताने का यह निर्णय इसी कानूनी पृष्ठभूमि में आया है, और जल्द ही इस पर अगली सुनवाई होने की संभावना है। वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों के लिए यह समय अनिवार्य पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने का है, भले ही UMEED पोर्टल समय सीमा बढ़ाने की उम्मीद जगी हो।

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