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ओडिशा में मॉब लिंचिंग: हिन्दू एजेंडा और ‘घर वापसी’ का सच

ओडिशा में मॉब लिंचिंग

ओडिशा में मॉब लिंचिंग की आग ने जैसे राज्य को भस्म करने का बीड़ा उठा लिया है, यह सवाल अब हर तरफ गूँज रहा है। भाजपा की सत्ता आते ही राज्य की कानून-व्यवस्था भीड़ की दया पर निर्भर हो गई है, और पुलिस? वह तो बस मूक दर्शक बनी बैठी है, जैसे कोई सर्कस का तमाशा हो रहा हो। क्या यह वही ओडिशा है जो कभी सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल था? भाजपा ने तो इसे नफरत की प्रयोगशाला बना दिया!

जून 2024 से अब तक दर्जनों घटनाएं सामने आई हैं, जहां कई अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों और ईसाइयों को गौ-रक्षा के नाम पर पीट-पीटकर मार डाला गया। बालासोर में बकरीद पर सांप्रदायिक दंगे हुए, जहां कर्फ्यू लगाना पड़ा। देवगढ़ में दलित किशोर चमार की हत्या, जहां भीड़ ने उसे गाय काटने के संदेह में जिंदा जला दिया, ये सब भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे की काली छाया का परिणाम हैं।

ध्यान रहे कि 1999 में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा ओडिशा के क्योंझर जिले में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की जघन्य हत्या कर दी गयी थी। यानि इनके निशाने पर ईसाई बहुत पहले से थे, लेकिन अब जब इनकी सरकार बन गई है, तो इन्हें जैसे खुला हैंड मिल गया है। ओडिशा में मॉब लिंचिंग अब राज्य के माथे पर एक गहरा दाग बन चुका है।

ईसाई-मुक्त ओडिशा का खाका और ‘घर वापसी’ का नाटक

ईसाइयों पर हमलों का सिलसिला तो मानो भाजपा के सत्ता के शपथ ग्रहण का स्वागत समारोह था। मलकानगिरी में 21 जून 2025 को 400 हिंदू कट्टरपंथियों ने 20 ईसाई परिवारों पर कुल्हाड़ियों से हमला किया, जबकि वे दोपहर का खाना खा रहे थे। इस हमले में 30 लोग घायल हुए, कइयों को गंभीर चोटें आईं।

गजपति, रायगढ़ा, जाजपुर में चर्चों पर धावा बोलना, ईसाई पुजारियों-पुजारिनों को पीटना, और बेघर करना, ये सब 2024 में 40 से ज्यादा हमलों का हिस्सा हैं। ओडिशा की सत्ता में आते ही भाजपा की सरकार ने तो जैसे ‘ईसाई-मुक्त’ ओडिशा का खाका खींच लिया है, और बजरंग दल जैसे संगठन खुले आम घूम रहे हैं, क्योंकि सत्ता का आशीर्वाद तो मिला ही है। यह धार्मिक स्वतंत्रता का कत्लेआम है, संविधान का अपमान!

‘घर वापसी’ का ये नाटक तो सबसे बड़ा धोखा है। आदिवासियों को ईसाई बनने की मजबूरी में ढकेलने के बाद अब जबरन हिंदू बनाने का अभियान चल रहा है। कोरापुट में अगस्त 2024 में 120 आदिवासी ईसाइयों को जबरन हिंदू बनाया गया, और खनिज सम्पन्न क्योंझर जिले में सितंबर 2025 में 40 सदस्यों वाली छह परिवारों ने ‘घर वापसी’ करायी गयी।

यह कोई स्वैच्छिक वापसी नहीं, बल्कि दबाव, धमकी और आर्थिक लालच का खेल है। हिंदुत्ववादी संगठन आदिवासियों की संस्कृति को निगल रहे हैं, जबकि असल में यह उनकी पहचान को मिटाने की साजिश है। भाजपा की सरकार चुप क्यों है? क्योंकि ये उनका ही एजेंडा है, एक राष्ट्र, एक धर्म!

मृतकों का अपमान और राष्ट्रीय मीडिया की चुप्पी

अंतिम संस्कार के नाम पर जो अमानवीयता हो रही है, वह तो रोंगटे खड़े कर देती है। नबरंगपुर में 2022 से 2025 तक कम से कम आठ मामले दर्ज हैं, जहां ईसाई आदिवासियों को शव दफनाने से रोका गया, और हिंदू धर्म अपनाने की शर्त पर ही अनुमति दी गई।

बालासोर के रायबनिया में बुधिया मुर्मू का शव दफनाने से इनकार, या फिर चिंद वाड़ा जैसी घटनाओं का सिलसिला, ये सब मृतकों का अपमान है। परिवारों को जंगल में रात गुजारनी पड़ रही है, क्योंकि गांव वाले ‘घर वापसी’ की मांग करते हैं। यह क्या न्याय है? यह तो मध्ययुगीन जंगलीपन है, जो भाजपा के राज में फल-फूल रहा!

राष्ट्रीय मीडिया की चुप्पी तो सबसे बड़ा अपराध है, जैसे कोई सेंसरशिप का जाल बिछा दिया गया हो। द हिंदू या इंडिया टुडे में छिटपुट खबरें आती हैं, लेकिन ‘घर वापसी’ की तारीफ में तो पूरे पेज भरे जाते हैं। दूसरी तरफ, ओडिशा के लोकल अखबार जैसे सम्बाद या ध्रुव जैसे मीडियम हमलों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज दबा दी जा रही है। भाजपा की सरकार ने तो मीडिया को भी हिंदुत्व का प्रचारक बना दिया है, सच्चाई की हत्या हो रही है, और राष्ट्रवाद के नाम पर!

खनिज संपदा पर पूंजीपतियों की नज़र और संवैधानिक हमला

भाजपा के हिंदुत्व एजेंडा ओडिशा को तोड़ रहा है, आदिवासी संस्कृति को कुचल रहा है, अल्पसंख्यकों को भयभीत कर रहा है, और कानून को भीड़ के हवाले कर रहा है। 2024 में पूरे भारत में 59 सांप्रदायिक दंगे हुए, जिनमें ओडिशा का बड़ा हिस्सा है, 13 मॉब लिंचिंग में 11 मौतें। यह राज्य अब नफरत का अड्डा बन गया है, जहां विकास के नाम पर सिर्फ ध्रुवीकरण हो रहा।

नवीन पटनायक की सरकार में शांति थी, लेकिन भाजपा ने तो आग लगा दी है। यह लोकतंत्र का कत्ल है, और सत्ता की लालच में सब कुछ बिक गया! यह सब संविधान पर सीधा हमला है, अनुच्छेद 25 की धार्मिक स्वतंत्रता को कुचलना, और SC/ST एक्ट को ताक पर रख दिया गया है। ओडिशा में मॉब लिंचिंग की बढ़ती संख्या सीधे तौर पर राज्य के सामाजिक ताने-बाने को फाड़ रही है।

दरसल, ओडिशा में नरेंद्र मोदी के पूंजीपति मित्रों की नज़र है, क्योंकि वहां की अपार खनिज संपदा पर है, जिसपर आदिवासी बैठे हैं। ओडिशा में मॉब लिंचिंग की आड़ में आदिवासियों को विस्थापित करने की साजिशें चल रही हैं। ओडिशा के कई जिलों में भारी मात्रा में खनिज पाए जाते हैं, जिनमें क्योंझर, सुंदरगढ़, मयूरभंज, जाजपुर, कालाहांडी, कोरापुट और रायगड़ा प्रमुख हैं, जहाँ लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट, क्रोमाइट और कोयला जैसे महत्वपूर्ण खनिज मिलते हैं।

इसके अतिरिक्त, क्योंझर जैसे जिलों में सोने का भी भंडार है, और जाजपुर के सुकिंदा घाटी में क्रोमाइट मिलता है। यही खनिज RSS और बीजेपी समर्थित पूंजीपतियों को चाहिए, इसलिए यह एजेंडा चल रहा है।

ओडिशा के लोग जागो! भाजपा का हिंदुत्व नफरत का जहर है, जो आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को निगल जाएगा। अगर अब भी चुप रहे, तो कल कोई नहीं बचेगा। न्याय की मांग करो, सड़कों पर उतरो, और इस तानाशाही को उखाड़ फेंको, वरना ओडिशा की मिट्टी खून से लाल हो जाएगी!

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