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सेना, NDRF बचाव में: किश्तवाड़ बादल फटने से तबाही, 64 की मौत

सेना NDRF बचाव में

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने से मरने वालों की संख्या 64 हो गई है। 19 अगस्त, 2025 को चिसोती गांव में, जहां यह त्रासदी हुई, वहां खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है। सेना, NDRF बचाव में जुटी हुई है और साथ ही कई अन्य टीमें भी काम कर रही हैं। भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। 14 अगस्त को हुई इस घटना में, मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते पर स्थित चिसोती गांव में अचानक बाढ़ आ गई थी।सड़ी-गली हालत में एक महिला का शव मिला।यह शव नीचे की ओर बह गया था और उसे बरामद किया गया।

बचाव अभियान में तेजी

बचाव दल कई जगहों पर, खासकर सामुदायिक रसोई स्थल के पास, मलबा छान रहे हैं। खोजी कुत्तों ने भी एक ढहे हुए घर के मलबे के नीचे से एक और शरीर का निचला हिस्सा निकालने में मदद की। हालांकि, माना जाता है कि यह शव पहले दिन ही बरामद कर लिया गया था। मरने वालों में तीन सीआईएसएफ कर्मी और एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) भी शामिल हैं। कुल 167 लोगों को बचाया गया है, जबकि 39 लोग अभी भी लापता हैं। सेना, NDRF बचाव में लगी हुई है और हर संभव प्रयास कर रही है। एसडीआरएफ के पुलिस उपाधीक्षक मसूफ अहमद मिर्जा ने कहा कि टीम को निचले इलाकों की जांच के लिए भेजा गया है। बादल फटने का प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा है, इसलिए इसमें समय लग रहा है।बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।प्रशासन ने लापता लोगों की सूची संशोधित की।एक और शव मिलने से अभियान में तेजी आई।

व्हाइट नाइट कोर का योगदान

भारतीय सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर की पाँच राहत टुकड़ियाँ बचाव और राहत कार्यों में लगी हैं। अतिरिक्त चिकित्सा टीमों को भी तैनात कर दिया गया है। सेना, NDRF बचाव में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। बादल फटने से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। एक अस्थायी बाज़ार, लंगर स्थल, 16 घर, सरकारी इमारतें और तीन मंदिर नष्ट हो गए हैं। चार पनचक्कियां और एक 30 मीटर लंबा पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है, साथ ही एक दर्जन से अधिक वाहन भी बह गए। सेना के इंजीनियरों ने रविवार को बेली ब्रिज बनाया, जिससे गांव और मचैल माता मंदिर के बीच संपर्क स्थापित हो गया। सेना ने बचाव अभियान में तेजी लाने के लिए कुछ ऑल-टेरेन वाहन भी तैनात किए हैं।सेना ने चिसोती नाले पर एक बेली ब्रिज बनाया।ब्रिज बनने से गांव और मंदिर के बीच संपर्क बहाल हुआ।इससे बचाव कार्य में काफी मदद मिली है।

राहत और पुनर्वास कार्य

पुलिस, सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सीआईएसएफ, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और नागरिक प्रशासन की संयुक्त टीमें काम कर रही हैं। बचाव दल ने पिछले तीन दिनों में नियंत्रित विस्फोट करके विशाल पत्थरों को उड़ाया है। सेना, NDRF बचाव में और पुनर्वास में भी लगी हुई है। भाजपा के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष सत शर्मा को भी स्थिति की जानकारी दी गई है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीन पर रहकर राहत कार्यों में मदद करने का निर्देश दिया है। वार्षिक मचैल माता यात्रा 19 अगस्त को लगातार छठे दिन भी स्थगित रही। हालांकि, अधिकारियों ने जम्मू से छड़ी लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के एक समूह को अनुमति दी है। भाजपा अध्यक्ष ने पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री दी जा रही है।ओमर अब्दुल्ला ने कहा लापता लोगों को जीवित पाना असंभव।

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