Loading Now

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन

सत्यपाल मलिक का निधन

सत्यपाल मलिक का निधन, जिसने एक लंबी राजनीतिक यात्रा को विराम दिया, मंगलवार को हुआ। वे 79 वर्ष के थे और उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट के माध्यम से सामने आई, जिसमें लिखा था, “पूर्व राज्यपाल सत्यपाल सिंह मलिक जी अब नहीं रहे।”

  • मलिक का निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ है।
  • वे 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे थे।
  • उनके कार्यकाल में ही अनुच्छेद 370 हटाया गया था।

स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ और निधन का कारण

मलिक को मधुमेह, गुर्दे की बीमारी और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियां थीं। उन्हें 11 मई 2025 को जटिल मूत्र मार्ग संक्रमण के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई उपचारों के बावजूद, उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और 5 अगस्त 2025 को दोपहर 1:12 बजे उनका निधन हो गया।

  • उन्हें क्रोनिक किडनी रोग और निमोनिया भी हो गया था।
  • जून में, उन्होंने अपनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की पुष्टि की थी।

राजनीतिक यात्रा और विवादों का सामना

अपने लंबे राजनीतिक करियर में, मलिक ने गोवा, बिहार, मेघालय और ओडिशा के राज्यपाल के रूप में भी सेवा की। वे लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रहे, और उन्होंने अपने मुखर स्वभाव के लिए सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के तरीके पर सवाल उठाए और दावा किया कि उनसे इस बारे में सलाह नहीं ली गई थी।

  • सीबीआई ने मलिक और छह अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
  • यह चार्जशीट किश्तवाड़ की कीरू जलविद्युत परियोजना में भ्रष्टाचार से संबंधित है।

राजनेताओं ने व्यक्त किया शोक

सत्यपाल मलिक का निधन भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर दुख जताया, “श्री सत्यपाल मलिक जी के निधन से दुखी हूँ।” कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें “किसान हितैषी नेता” बताया, वहीं राहुल गांधी ने उन्हें “निडर होकर सच बोलने वाला” व्यक्ति कहा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया।

  • मलिक ने किसान आंदोलन के दौरान किसानों का समर्थन किया था।
  • अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि मलिक ने सिखों के लिए आवाज उठाई।

बढ़ती उम्र में पुरुषों में गुर्दे के स्वास्थ्य का जोखिम

सत्यपाल मलिक का निधन एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या पर ध्यान दिलाता है: बढ़ती उम्र के पुरुषों में गुर्दे का स्वास्थ्य। इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के अनुसार, 17% भारतीय आबादी गुर्दे की बीमारी से पीड़ित है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में यह जोखिम अधिक होता है, जिसके कारण उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होती हैं।

  • नियमित जाँच, हाइड्रेटेड रहना, और स्वस्थ आहार लेना आवश्यक है।
  • दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है।
Spread the love

Post Comment

You May Have Missed