साइड बिजनेस की असलियत: नोएडा के शख्स का स्टार्टअप क्यों फेल हुआ?
साइड बिजनेस की असलियत से जुड़ा यह वायरल वीडियो उन सभी के लिए एक ‘आई ओपनर’ है जो 9-से-5 की डेस्क जॉब छोड़कर या उसके साथ एक्स्ट्रा इनकम के सपने देख रहे हैं।
अक्सर हमें लगता है कि सड़क किनारे चाय या जूस का स्टॉल खोलना बेहद आसान और मुनाफे का सौदा है, लेकिन नोएडा के एक प्रोफेशनल विश्वास वर्मा का अनुभव इसके बिल्कुल उलट रहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने “फेल हुए बिजनेस” की ईमानदारी से कहानी साझा की है, जो अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है
कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए ‘वेक-अप कॉल’
आजकल कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले कई युवा बेहतर कमाई और आजादी के लिए अपने खुद के स्टार्टअप या सड़क किनारे स्टॉल खोलने का सपना देखते हैं। विश्वास वर्मा की यह कहानी उन्हीं लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
उन्होंने इंस्टाग्राम पर ‘gptnlife’ हैंडल से एक रील शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे “दूसरे की थाली में घी हमेशा ज्यादा लगता है” वाली कहावत उन पर सटीक बैठी। उनके मुताबिक, जो काम बाहर से देखने में आसान और ‘क्विक प्रॉफिट’ वाला लगता है, उसकी जमीनी हकीकत बहुत जटिल होती है।
इसे भी पढ़े : ग्रेटर नोएडा छात्र सुसाइड: पिता की डांट के बाद बीटेक छात्र ने दी जान
जिम के पास छोटी दुकान और 10,000 का किराया
विश्वास वर्मा का यह एंटरप्रेन्योरियल एक्सपेरिमेंट तब शुरू हुआ जब उन्होंने अपने जिम के पास एक खाली दुकान देखी। यह दुकान जिम के बेसमेंट में ही स्थित थी। दुकान का किराया सिर्फ 10,000 रुपये था, जो उन्हें और उनके पार्टनर को काफी कम लगा।
उनके पास नौकरी से कुछ एक्स्ट्रा इनकम थी, इसलिए उन्होंने बिना सोचे-समझे और बिना किसी गहन मार्केट रिसर्च के इस काम में कदम रख दिया। उन्हें लगा कि जिम के बाहर हेल्थ फूड का कॉन्सेप्ट सुपरहिट होगा, लेकिन यहीं उनसे साइड बिजनेस की असलियत समझने में चूक हो गई।
जूस के धंधे में लागत और मुनाफे का बिगड़ा गणित
शुरुआत में उन्होंने अनानास (पाइनएप्पल) का जूस बेचना शुरू किया। उन्होंने एक महंगी कोल्ड-प्रेस मशीन भी खरीदी ताकि ज्यादा जूस निकाल सकें। लेकिन मुश्किल तब आई जब उन्हें पता चला कि अनानास के रेट बाजार में रोज बदलते हैं। वे अपने जूस की कीमत तय नहीं कर पा रहे थे।
90 रुपये प्रति गिलास बेचने के बावजूद उन्हें एहसास हुआ कि वे बिना किसी प्रॉफिट के सिर्फ कॉस्ट प्राइस पर जूस बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह थी कि एक पूरे अनानास से मुश्किल से एक गिलास जूस निकलता था, जिससे मार्जिन पूरी तरह खत्म हो गया।
अंडे और मैगी बेचने में भी हाथ लगी नाकामी
जूस के बाद उन्होंने अंडे बेचने का मन बनाया। उन्होंने गणित लगाया था कि अंडा 5 रुपये में खरीदकर 10 रुपये में उबालकर बेचेंगे, जिससे सीधा 50% मुनाफा होगा। लेकिन साइड बिजनेस की असलियत तब सामने आई जब बाजार में अंडे 7 से 8 रुपये के मिले।
ऊपर से अंडे उबालते समय 3-4 अंडे रोजाना टूट या खराब हो जाते थे। इतना ही नहीं, उन्होंने 11 रुपये वाली मैगी को 30 रुपये में बेचा, लेकिन स्टाफ की सैलरी, बिजली और किराए का हिसाब जोड़ने के बाद वहां भी कोई बचत नहीं हुई।
कम किराए के पीछे का असल राज
विश्वास को बाद में समझ आया कि उस दुकान का किराया 10,000 रुपये जैसा कम क्यों था। असल में उस इलाके में जिम जाने वालों के अलावा कोई दूसरा ग्राहक आता ही नहीं था। टारगेट ऑडियंस बहुत सीमित थी और फुटफॉल (ग्राहकों की आवाजाही) न के बराबर थी।
उन्होंने स्वीकार किया कि सिर्फ ऊपरी कैलकुलेशन और ‘आसान पैसा’ कमाने की चाहत ने उन्हें जमीनी हकीकत से दूर रखा था। यह रील उन्होंने किसी को डराने के लिए नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभव से मिली सीख साझा करने के लिए बनाई थी।
इसे भी पढ़े : नोएडा एयरपोर्ट: योगी आदित्यनाथ निरीक्षण के बाद उद्घाटन में क्यों लगी देरी?
नेटिजन्स की प्रतिक्रिया और इंटरनेट का फैसला
विश्वास का वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। कुछ लोगों ने उन्हें बेहतर रिसर्च न करने के लिए जिम्मेदार ठहराया, तो कुछ ने कहा कि “धंधा एथिक्स पर नहीं चलता, उसमें थोड़ी मिलावट और चालाकी जरूरी है।” एक यूजर ने लिखा कि 90% फूड आउटलेट्स पहले साल में ही बंद हो जाते हैं।
वहीं कुछ ने सलाह दी कि दुकान के बजाय ठेला लगाना बेहतर होता क्योंकि वहां किराया बच जाता है। लोगों ने यह भी कहा कि चाय जैसा स्टेबल प्रोडक्ट चुनना चाहिए था जिसकी लागत कम और डिमांड ज्यादा होती है।
इसे भी पढ़े : “नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: दिवाली बाद उड़ानें और भविष्य की योजना”
अनुभव से मिली सबसे बड़ी सीख
विश्वास वर्मा के इस पूरे सफर का निचोड़ यह है कि हर छोटे बिजनेस को समझने, गहराई से रिसर्च करने और असल दुनिया के अनुभव की जरूरत होती है। साइड बिजनेस की असलियत यह है कि यह केवल कागजों पर किए गए हिसाब-किताब से नहीं चलता।
उन्होंने नोएडा और अन्य शहरों के 9-to-5 कर्मचारियों को सलाह दी है कि किसी भी साइड हसल में पैसा लगाने से पहले दो बार सोचें और मार्केट की पूरी जानकारी जुटाएं, वरना यह फायदे के बजाय बड़ा नुकसान का सौदा साबित हो सकता है।
इसे भी पढ़े : मेधा रूपम बनीं नोएडा की पहली महिला डीएम



Post Comment