विजन IAS पर जुर्माना: भ्रामक विज्ञापनों के लिए CCPA की बड़ी कार्रवाई
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने एड-टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विजन IAS पर जुर्माना लगाते हुए ₹11 लाख का दंड आरोपित किया है। न्यूज़ एजेंसी PTI की 25 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई UPSC परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन के बारे में गुमराह करने वाले विज्ञापनों के कारण की गई है।
अथॉरिटी ने अपनी विस्तृत जांच में पाया कि कोचिंग संस्थान ने कथित तौर पर इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाया कि सफल उम्मीदवारों ने वास्तव में किन विशिष्ट कोर्स में प्रवेश लिया था। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच यह गलत धारणा बनी कि परीक्षा के टॉपर्स ने संस्थान के महंगे फाउंडेशन कोर्स का लाभ उठाया था।
बार-बार अपराध करने पर कार्रवाई का यह पहला मामला
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विजन IAS पर यह जुर्माना भारत के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत बार-बार अपराध करने पर लगाया गया पहला जुर्माना है। CCPA की चीफ कमिश्नर और उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने स्पष्ट किया कि यह दूसरे अपराध पर दंड का पहला उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि नियामक दखल और पूर्व में दी गई सख्त चेतावनियों के बावजूद, संस्थान ने अपने बाद के विज्ञापनों में भी इसी तरह के भ्रामक दावे करना जारी रखा। यह व्यवहार संस्थान की ओर से उचित सावधानी और रेगुलेटरी नियमों के पालन के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
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टॉपर्स के नाम पर विज्ञापनों में किए गए बड़े दावे
अजयविजन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड, जो विजन IAS के नाम से संचालित है, ने विज्ञापनों के माध्यम से बड़े दावे किए थे। संस्थान ने प्रचारित किया था कि उसके छात्रों ने “CSE 2023 में टॉप 10 में 7 और टॉप 100 में 79 सिलेक्शन” हासिल किए हैं। इसी तरह “CSE 2022 में टॉप 50 में 39 सिलेक्शन” का भी दावा किया गया था।
इन विज्ञापनों में सफल उम्मीदवारों की तस्वीरें, उनके नाम और उनकी रैंक को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था ताकि संभावित उम्मीदवारों को आकर्षित किया जा सके।
CCPA की जांच में उजागर हुआ दावों का खोखलापन
जब CCPA ने इन दावों की गहराई से जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि UPSC CSE 2022 और 2023 के लिए विजन IAS द्वारा जिन 119 से अधिक सफल उम्मीदवारों का दावा किया गया था, उनमें से केवल तीन ने ही उनके वास्तविक फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन लिया था, जिसकी फीस लाखों रुपये है।
बाकी 116 छात्रों ने केवल टेस्ट सीरीज़, वन-टाइम अभ्यास टेस्ट और मॉक इंटरव्यू प्रोग्राम जैसी आंशिक सेवाओं का ही विकल्प चुना था। विजन IAS पर जुर्माना लगाने का मुख्य आधार यही बना कि संस्थान ने इन सेवाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट नहीं किया।
शुभम कुमार (AIR 1) के मामले का चुनिंदा खुलासा
अथॉरिटी ने पाया कि संस्थान ने जानकारी का इस्तेमाल अपनी सुविधा के अनुसार किया। उदाहरण के लिए, UPSC CSE 2020 में AIR 1 प्राप्त करने वाले शुभम कुमार के मामले में कंपनी ने बताया था कि उन्होंने GS फाउंडेशन बैच में क्लासरूम स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन लिया था।
लेकिन अन्य उम्मीदवारों के मामले में ऐसी पारदर्शी जानकारी छिपाई गई, जिससे एक गलत प्रभाव (Impression) बना। CCPA के आधिकारिक बयान के अनुसार, उल्लंघन की बार-बार होने वाली प्रकृति को देखते हुए इसे ‘बाद का उल्लंघन’ माना गया और उपभोक्ताओं के हित में भारी जुर्माना लगाना आवश्यक हो गया।
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डिजिटल युग में गुमराह करने वाले दावों का गंभीर प्रभाव
CCPA ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रिंट मीडिया की तुलना में वेबसाइटों पर मौजूद जानकारी अधिक प्रभावी होती है क्योंकि वे लंबे समय तक विश्व स्तर पर उपलब्ध रहती हैं। डिजिटल दौर में छात्र संस्थानों पर शोध करने के लिए इन्हीं प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं।
छात्रों की उचित सहमति या अनुमति के बिना उनके परिणामों को अपने मुख्य कोर्स की सफलता के रूप में पेश करना विज्ञापनों की भ्रामक प्रकृति को और अधिक बढ़ा देता है। विशेषकर UPSC जैसी कठिन परीक्षाओं में, जहाँ छात्र अपना कीमती समय और पैसा लगाते हैं, ऐसी अधूरी जानकारी झूठी उम्मीदें पैदा करती है।
कोचिंग इंडस्ट्री पर नियामकीय नकेल और नोटिस की झड़ी
विजन IAS पर जुर्माना इसी कड़ी का एक हिस्सा है जिसके तहत अब तक CCPA ने गुमराह करने वाले विज्ञापनों के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी किए हैं। वर्तमान में 28 संस्थानों पर कुल ₹1.09 करोड़ (विशेष रूप से ₹1,09,60,000) का जुर्माना लगाया जा चुका है।
अथॉरिटी ने इन सभी संस्थानों को ऐसे भ्रामक दावों को तुरंत बंद करने का सख्त निर्देश दिया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा के क्षेत्र में व्यापारिक नैतिकता बनी रहे और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
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पारदर्शी खुलासे की अनिवार्यता और भविष्य की राह
अंततः, CCPA ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सभी कोचिंग संस्थानों के लिए अपने विज्ञापनों में जानकारी का सच्चा और पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य है। यह इसलिए आवश्यक है ताकि छात्र किसी भी संस्थान के प्रोग्राम की प्रभावशीलता का सही आकलन कर सकें और निष्पक्ष एवं सोच-समझकर अपने शैक्षणिक भविष्य का फैसला ले सकें।
विजन IAS पर जुर्माना यह संकेत देता है कि अब केवल परिणामों का श्रेय लेना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उस सफलता में संस्थान की वास्तविक भूमिका को भी स्पष्ट करना होगा।
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