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मणिपुर में कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा नियम अधिसूचित!

कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा
कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा

मणिपुर ने बढ़ाई कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा

मणिपुर सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने फैक्ट्रियों में महिलाओं की रात्रि पाली सुरक्षा हेतु नए नियम अधिसूचित किए हैं। ये नियम तुरंत प्रभावी हो गए हैं। कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया। इनका उद्देश्य महिला कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।

रात्रि पाली हेतु सख्त सुरक्षा उपाय

अधिसूचना के अनुसार, महिलाओं को रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच काम करने की सख्त मनाही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी महिला को किसी भी परिस्थिति में शाम 7 बजे के बाद काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कई अनिवार्य कदम उठाए गए हैं।

यदि कोई महिला उस समय के बाद काम करना चाहती है, तो उसकी लिखित सहमति प्राप्त करनी होगी,जिससे स्वैच्छिक भागीदारी और कानूनी दस्तावेज सुनिश्चित हो सकें। फैक्ट्री परिसर के अंदर और बाहर उचित प्रकाश व्यवस्था करनी होगी।

साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी लगाने होंगे। यह निरंतर निगरानी के लिए आवश्यक है। रात्रि पाली में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन का प्रबंध करना होगा। उन्हें शिफ्ट के बाद घर तक सुरक्षित पहुंचाना जरूरी है।

सम्मानजनक कार्य वातावरण का सृजन

सरकार ने सिर्फ शारीरिक सुरक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया है। एक स्वस्थ और सम्मानजनक काम का माहौल भी जरूरी है। नई अधिसूचना में इस पर विशेष जोर दिया गया है। कार्यस्थल की स्थितियां महिलाओं के स्वास्थ्य के अनुकूल होनी चाहिए।

उनकी स्वच्छता और व्यक्तिगत गरिमा का सम्मान होना चाहिए। किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण व्यवहार पर रोक लगाई जानी चाहिए। महिला सुरक्षा के लिए यह मानसिक पहलू भी अहम है।

सभी फैक्ट्रियों को यौन उत्पीड़न विरोधी अधिनियम (POSH), 2013 का कड़ाई से पालन करना होगा। प्रत्येक फैक्ट्री में एक औपचारिक यौन उत्पीड़न विरोधी नीति लागू करनी होगी। साथ ही, एक समर्पित शिकायत अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है। यह अधिकारी महिलाओं की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निवारण सुनिश्चित करेगा। इससे कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा में विश्वास बढ़ेगा।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए विशेष प्रावधान हैं। उन्हें सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक काम करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रावधान मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के अनुरूप है।

इसका उद्देश्य उनके स्वास्थ्य और शिशु के कल्याण की रक्षा करना है। अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग बाजपेई ने कहा कि यह उपाय राज्य की प्रतिबद्धता दर्शाता है। यह कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी देता है।

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भारत में कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा: संदर्भ और चुनौतियाँ

मणिपुर का यह कदम भारत में व्यापक चर्चा को दर्शाता है। कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा है। महिला श्रमिकों को अक्सर सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ता है। ये चिंताएँ विशेष रूप से रात की शिफ्ट या एकांत स्थानों में अधिक होती हैं। दुर्भाग्यवश, उत्पीड़न और असुरक्षा की घटनाएँ आम हैं। यह महिलाओं की कार्यभागिता और कैरियर विकास में बाधक है।

भारत में कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई कानून मौजूद हैं। POSH अधिनियम 2013 इसका मुख्य आधार है। यह अधिनियम कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को परिभाषित करता है। साथ ही, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का निर्देश देता है।

फिर भी, कानून के प्रभावी कार्यान्वयन में अक्सर कमी रह जाती है। कई संगठन आंतरिक समितियाँ (IC) गठित करने में चूक करते हैं। कर्मचारी अक्सर अपनी शिकायतें दर्ज कराने से डरते हैं।

कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा की चुनौतियाँ बहुआयामी हैं। इनमें सांस्कृतिक पूर्वाग्रह और लैंगिक रूढ़ियाँ शामिल हैं। पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन की अनुपलब्धता प्रमुख बाधा है।

इसके अलावा, पर्याप्त जागरूकता की कमी भी नुकसानदेह है। महिलाएँ अक्सर अपने अधिकारों से अनभिज्ञ रहती हैं। नियोक्ता भी कानूनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेते।

सुरक्षित भविष्य की ओर

मणिपुर के नए नियम एक सकारात्मक दिशा दिखाते हैं। ये कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। लिखित सहमति का प्रावधान महिलाओं को सशक्त बनाता है। सीसीटीवी और प्रकाश व्यवस्था जैसे उपाय ठोस सुरक्षा प्रदान करते हैं।

सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था आवागमन को जोखिममुक्त करती है। ये कदम अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम कर सकते हैं।

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महिला सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

भारत में कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। नियोक्ताओं को सुरक्षा उपायों में निवेश बढ़ाना होगा। कानूनों के सख्त अनुपालन पर नजर रखी जानी चाहिए। महिला कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

समाज को लैंगिक समानता और सम्मान का संस्कृति विकसित करनी होगी। केवल तभी सच्चे अर्थों में सुरक्षित कार्य वातावरण का निर्माण संभव होगा। मणिपुर की पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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