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SMHS अस्पताल हमला: कश्मीर में चिकित्सा और मीडिया दोनों असुरक्षित?

SMHS अस्पताल हमला

श्रीनगर के SMHS अस्पताल में हुए हमले ने पूरे जम्मू-कश्मीर को झकझोर दिया है। एक मरीज की मौत के बाद डॉक्टर पर हमला हुआ, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने पत्रकारों को भी निशाना बनाया। यह घटनाएँ स्वास्थ्य सेवा और पत्रकारिता दोनों के लिए गंभीर चिंताएँ खड़ी करती हैं।

  • एक मरीज की मौत पर अटेंडेंट ने डॉक्टर को थप्पड़ मारा।
  • डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों पर हमला हुआ।
  • यह घटनाएँ समाज में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति दर्शाती हैं।

प्रशासन ने दोनों मामलों में उचित कार्रवाई का वादा किया है, लेकिन सवाल उठता है कि ऐसी घटनाओं को रोका कैसे जाए।

डॉक्टर पर हमले की दर्दनाक कहानी

यह SMHS अस्पताल हमला 23 जुलाई को रात करीब 12:15 बजे हुआ। उत्तर प्रदेश के निवासी डॉ. शाहनवाज को एक मरीज के परिवार के सदस्य ने थप्पड़ मारा। मरीज को आपातकालीन वार्ड में लाया गया था। डॉक्टर ने बताया कि मरीज के महत्वपूर्ण अंग ‘रिकॉर्ड करने योग्य नहीं’ थे। उसे कुछ ही मिनटों में ट्राएज में भेजा गया।

  • मरीज की पुनर्जीवन के दौरान 10-15 मिनट में मौत हो गई।
  • अटेंडेंट आबिद हसन भट ने डॉक्टर पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
  • भट ने कहा डॉक्टर ने मरीज को ऑक्सीजन देने से इनकार किया।

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जम्मू के जीएमसी में भी हाल ही में ऐसा ही हमला हुआ था।

चिकित्सा बिरादरी में गहरा आक्रोश

इस SMHS अस्पताल हमला के बाद जीएमसी श्रीनगर के रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने हमलावर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। कॉलेज ने संबंधित पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज कराई है।

  • जम्मू और कश्मीर छात्र संघ ने हमले की कड़ी निंदा की।
  • मीर जुबैर ने इसे स्वास्थ्य सेवा पर बेशर्म हमला बताया।
  • उन्होंने श्रीनगर पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

नासिर असलम वानी, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार, ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।

पत्रकारों पर हमला: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार

SMHS अस्पताल हमला कवर कर रहे पत्रकारों को भी विरोध प्रदर्शन के दौरान निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कथित तौर पर पत्रकारों को परेशान किया और धक्का-मुक्की की। कई महिला पत्रकारों ने भी बदसलूकी और धमकी का आरोप लगाया है।

  • पत्रकारों ने प्रेस परिषद को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
  • एडिटर्स गिल्ड और नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया को भी भेजा पत्र।
  • शिकायत में “मीडियाकर्मियों के लिए शत्रुतापूर्ण माहौल” का जिक्र है।

यह हमला “लिंग-भेदभावपूर्ण” प्रतीत होता है और महिला पत्रकारों की गरिमा पर सीधा प्रहार है।

प्रेस क्लब की कड़ी निंदा और मांगें

प्रेस क्लब ऑफ कश्मीर ने पत्रकारों पर हुए इस SMHS अस्पताल हमला की कड़ी निंदा की है। क्लब के अध्यक्ष एम. सलीम पंडित ने इसे पूरी पत्रकार बिरादरी पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि इसकी जाँच होनी चाहिए कि हमलावर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे या उकसावे पर।

  • पंडित ने जीएमसी प्रिंसिपल से घटना की जाँच की मांग की।
  • पत्रकारों पर हमला करने वाले डॉक्टरों को दंडित करने की मांग की।
  • उच्च-तनाव कवरेज के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा का ढाँचा माँगा।

पंडित ने चेतावनी दी कि यदि प्रिंसिपल स्थिति को संभालने में विफल रहते हैं, तो वे उच्च अधिकारियों तक पहुँचेंगे।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष और आगे का रास्ता

जीएमसी श्रीनगर के प्रशासक मोहम्मद अशरफ हकक ने कहा कि डॉक्टरों की हड़ताल के बाद “कोई सेवा बाधित नहीं हुई”। उन्होंने जोर दिया कि वरिष्ठ डॉक्टरों ने सभी मरीजों का अच्छी तरह ध्यान रखा। हकक ने यह भी कहा कि जूनियर डॉक्टरों की कोई हड़ताल नहीं थी।

  • कॉलेज ने “क्रूर हमले” की निंदा की और एफआईआर दर्ज कराई।
  • सोशल मीडिया पर जनता की भावनाएँ विभाजित दिख रही हैं।
  • कुछ मीडिया पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का आरोप लगा रहे हैं।

यह घटनाएँ समाज में बढ़ती हिंसा पर एक गंभीर चिंतन की मांग करती हैं।

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