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जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल हो कांग्रेस की PM मोदी से बड़ी मांग

जम्मू-कश्मीर दर्जा बहाल

जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल हो – यह मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने आगामी संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा लौटाने की अपील की है। उन्होंने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की भी मांग की है, जो आदिवासी क्षेत्रों को स्वशासन प्रदान करती है। इस कदम का उद्देश्य लद्दाख के लोगों की सांस्कृतिक, विकासात्मक और राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी भूमि तथा पहचान की रक्षा करना है।

  • केंद्र शासित प्रदेशों को राज्यों में अपग्रेड करने के उदाहरण रहे हैं।
  • लेकिन जम्मू-कश्मीर का मामला स्वतंत्र भारत में अभूतपूर्व है।

यह पहली बार है जब किसी राज्य को विभाजन के बाद केंद्र शासित प्रदेश में डाउनग्रेड किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री को उनके उन सार्वजनिक बयानों की याद दिलाई जिनमें उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। इनमें मई 2024 में भुवनेश्वर और सितंबर 2024 में श्रीनगर में दिए गए उनके बयान शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और केंद्र के वादे

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में बदलाव को बरकरार रखा था। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को “जल्द से जल्द” राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया था। अनुच्छेद 370 मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को भी यही आश्वासन दिया था। इन वादों और आश्वासनों को देखते हुए, कांग्रेस का मानना है कि अब समय आ गया है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए। यह पत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आया है।

  • जम्मू-कश्मीर के लोग पिछले पांच सालों से लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा मांग रहे हैं।
  • यह मांग उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों में निहित है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल हो के मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा है कि राज्य का दर्जा मिलने पर वह विधानसभा भंग करने के लिए उपराज्यपाल से कहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का दर्जा उनका अधिकार है और वे इसकी मांग करते हैं।

राजनीतिक तनाव और अधिकार क्षेत्र के मुद्दे

श्रीनगर में राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। हाल ही में, प्रशासन द्वारा उमर अब्दुल्ला को शहीदों के कब्रिस्तान जाने से रोकने की घटना ने इस तनाव को और बढ़ा दिया। अब्दुल्ला ने “अनिर्वाचित लोगों के अत्याचार” की निंदा की। यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और लोगों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा कितना महत्वपूर्ण हो गया है।

  • अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से उसका विशेष दर्जा छीन लिया गया था।
  • तब से, केंद्र ने राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

कांग्रेस लगातार अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग को लेकर मुखर रही है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद, पार्टी अब राज्य का दर्जा बहाल करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। खड़गे और राहुल गांधी ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल हो एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और लोकतांत्रिक आवश्यकता है।

लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा की भी मांग

जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ, कांग्रेस ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक गारंटी देने का भी आग्रह किया है। यह पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों को स्वायत्तता और स्वशासन प्रदान करती है। इस कदम से लद्दाख के लोगों की सांस्कृतिक और विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, साथ ही उनकी भूमि और पहचान की भी रक्षा होगी। यह पत्र आगामी संसद सत्र में जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाने का संकेत भी माना जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि सरकार अपने वादों को पूरा करे और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करे।

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