डिंपल यादव अपमानजनक टिप्पणी में मौलाना रशीदी को पड़ा थप्पड़!
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव अपमानजनक टिप्पणी को लेकर अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी को मंगलवार को थप्पड़ों का सामना करना पड़ा। यह घटना उस समय हुई जब रशीदी टीवी स्टूडियो में अपने बयान का बचाव कर रहे थे, जहां समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव कुलदीप भाटी ने अचानक उन पर हमला कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर राजनीति में महिलाओं के प्रति अभद्र टिप्पणियों का मुद्दा गर्मा दिया है। इस हमले के बाद मौलाना किसी तरह भागकर छिपे और मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बचाया। उन्होंने बाद में कुलदीप भाटी और मोहित नागर के खिलाफ सेक्टर-126 थाने में शिकायत भी दर्ज कराई।
मौलाना की आपत्तिजनक टिप्पणी का बचाव और विवाद
- मौलाना ने डिंपल की पीठ को “नंगी” बताया था।
- उनका कहना था कि यह उनके समाज में आम बोलचाल है।
- रशीदी ने कहा, “मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा।”
उन्होंने IANS से बात करते हुए कहा, “यह इतना बुरा शब्द नहीं है। यहां अगर हम लड़कियों को बिना सिर ढके घूमते देखते हैं, तो हम उनसे कहते हैं, ‘अपना सिर ढक लो। तुम नंगी क्यों घूम रही हो?'”
राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया और प्रदर्शन
मौलाना की डिंपल यादव अपमान टिप्पणी के खिलाफ देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सांसदों ने संसद परिसर में मौलवी की स्त्री-द्वेषी टिप्पणी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इस टिप्पणी को “शर्मनाक, अपमानजनक और अस्वीकार्य” बताया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डिंपल यादव ने कहा कि विरोध अच्छा है, लेकिन भाजपा नेताओं को मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हुई घटनाओं पर भी बोलना चाहिए था। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद भाजपा नेताओं द्वारा सशस्त्र बल अधिकारी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी का भी जिक्र किया।
- NDA सांसदों ने संसद में मौलाना की टिप्पणी का विरोध किया।
- टिप्पणी को “शर्मनाक, अपमानजनक और अस्वीकार्य” बताया गया।
- डिंपल यादव ने मणिपुर हिंसा पर भी ध्यान देने को कहा।
कानूनी शिकंजा और मौलाना का अड़ियल रुख
डिंपल यादव के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर रविवार देर शाम लखनऊ में मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया। प्रवेश यादव नामक व्यक्ति ने लखनऊ के विभूति खंड थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इनमें धारा 79 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द, हावभाव या कृत्य), 196 (धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे) शामिल हैं। इसके बावजूद, मौलाना साजिद रशीदी अपने बयान पर कायम रहे और कहा कि इसे बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं जिस समाज और जगह से आता हूँ, वहाँ अगर कोई महिला सिर पर घूँघट नहीं करती है, तो लोग कहते हैं, ‘वह बिना मुंडन के घूम रही है, उसने घूँघट क्यों नहीं किया?'”
- मौलाना पर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगीं।
- लखनऊ में प्रवेश यादव ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया।
- मौलाना अपने बयान पर अब भी कायम हैं।
महिला राजनेताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का बढ़ता चलन
यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी महिला राजनेता को इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी का सामना करना पड़ा हो। यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और स्त्री-द्वेषी भाषा का चलन बढ़ता जा रहा है, जो चिंता का विषय है।
- कैराना से सांसद इकरा हसन को भी पहले अपमानजनक टिप्पणी का सामना करना पड़ा।
- राजनीति में महिलाओं को अक्सर भाई-भतीजावाद का आरोप लगता है।
- यह चलन दिखाता है कि महिलाओं के प्रति सम्मान की कमी है।



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