प्रियंका गांधी का हमला: पहलगाम सुरक्षा और युद्धविराम पर सरकार से सवाल ?
केंद्र सरकार पर प्रियंका गांधी का हमला : कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को लोकसभा में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। जिसमें उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार इस सुरम्य क्षेत्र में सुरक्षा तैनात करने में विफल रही। यहाँ हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, फिर भी सुरक्षा में लापरवाही बरती गई। एक पीड़ित की पत्नी के हवाले से, प्रियंका गांधी ने कहा कि उसने गोलीबारी के दौरान एक भी सुरक्षाकर्मी को नहीं देखा। उन्होंने पूछा, “जब एक घंटे तक नागरिक मारे जा रहे थे, वहाँ एक भी सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं था?”
- पहलगाम में सुरक्षाकर्मियों की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए।
- पीड़ितों को “अनाथों की तरह” छोड़ने का आरोप लगाया गया।
- सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की गई।
मुख्य बिंदु:
1. प्रियंका गांधी ने पहलगाम हमले पर सुरक्षा चूक को लेकर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की।
2. उन्होंने पीड़ितों को “अनाथों की तरह छोड़ने” का आरोप लगाते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
3. शुभम द्विवेदी की पत्नी की आपबीती के जरिए हमले के दौरान सुरक्षाकर्मियों की अनुपस्थिति को उजागर किया।
4. ऑपरेशन सिंदूर पर भी निशाना, ट्रंप के युद्धविराम ऐलान को कूटनीतिक विफलता बताया गया।
5. प्रियंका गांधी ने कहा- “नेतृत्व का मतलब श्रेय नहीं, विफलताओं की जिम्मेदारी लेना होता है।”
6. संसद में भावनात्मक अपील करते हुए, पीड़ितों के दर्द को ‘भारतीयों का दुःख’ बताया गया।
7. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल, पाकिस्तान का यूएन समिति प्रमुख बनना बताया झटका।
सुरक्षा चूक की कहानी: पीड़ितों की जुबानी
पहलगाम आतंकी हमले के 26 पीड़ितों में से एक शुभम द्विवेदी की पत्नी ने अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि कैसे गोलीबारी के दौरान उसने कोई सुरक्षाकर्मी नहीं देखा। प्रियंका गांधी ने कहा, “मैंने अपनी आँखों के सामने अपनी दुनिया खत्म होते देखी।”
- पहलगाम हमले में 26 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
- सरकार को पर्यटकों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए था।
- हमला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ था।
प्रियंका ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को पता था कि यह रास्ता जंगल से होकर जाता है और लोग यहाँ रोजाना आते-जाते हैं। उन्होंने पूछा, “वहाँ सुरक्षा क्यों नहीं थी? कोई सिपाही क्यों नहीं था?”
ऑपरेशन सिंदूर और ट्रंप की घोषणा: कूटनीतिक विफलता?
प्रियंका गांधी हमला सिर्फ पहलगाम तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “गैरज़िम्मेदारी” का प्रतीक बताया। प्रियंका ने लोकसभा में कहा, “हमारे देश के इतिहास में पहली बार युद्ध रुका है।”
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्धविराम की घोषणा की थी, सरकार ने नहीं।
- यह घटना भारतीय कूटनीति की विफलता को दर्शाती है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं किया था।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था, तभी ट्रंप ने युद्धविराम का दावा किया। हालांकि, भारत का कहना था कि यह दोनों सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था।
जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रियंका का तीखा प्रश्न
प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि नेतृत्व का मतलब सिर्फ श्रेय लेना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेना भी है। उन्होंने सरकार पर “सवालों से बचने” और “देश के नागरिकों के प्रति कोई जवाबदेही न रखने” का आरोप लगाया। प्रियंका गांधी हमला जारी रखते हुए, उन्होंने कहा, “उनके लिए, सब कुछ राजनीति और प्रचार है।”
- सरकार अपनी विफलताओं की जिम्मेदारी लेने से बच रही है।
- यह खुफिया एजेंसियों की भी एक बड़ी नाकामी थी।
- वर्तमान स्थिति का जवाब देने की मांग की गई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की थी कि पहलगाम हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादी मारे गए हैं। फिर भी प्रियंका ने सुरक्षा की कमी पर सवाल उठाए।
मां के आंसू और पीड़ितों का दर्द: प्रियंका की भावनात्मक अपील
प्रियंका गांधी ने अमित शाह द्वारा उनकी मां सोनिया गांधी के आंसुओं का जिक्र करने पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां तब रोई थीं जब उनके पिता राजीव गांधी आतंकवादियों द्वारा शहीद हुए थे। प्रियंका गांधी का हमला व्यक्तिगत होते हुए भी पीड़ितों के दर्द को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “आज, मैं इस सदन में खड़ी हूँ और उन 26 लोगों के बारे में बात कर रही हूँ क्योंकि मैं उनका दर्द समझती हूँ।” उन्होंने खुफिया विफलता और भारतीय सशस्त्र बलों को हुए नुकसान की जिम्मेदारी लेने में केंद्र की असमर्थता पर भी सवाल उठाए।
- प्रियंका ने राजीव गांधी की शहादत का जिक्र किया।
- पहलगाम पीड़ितों के दर्द को समझने की बात कही।
- उन्होंने पीड़ितों को “भारतीय” बताया, किसी खेल का मोहरा नहीं।
अधूरा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और कूटनीतिक चुनौती
प्रियंका गांधी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रभावशीलता पर भी संदेह व्यक्त किया, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को सबक सिखाना था। उन्होंने कहा कि अगर इसका उद्देश्य आतंकवाद खत्म करना था, तो “एक पाकिस्तानी जनरल, जिसके हाथ खून से रंगे थे, अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ दोपहर का भोजन कर रहा था।” उन्होंने पूछा कि क्या सरकार को नहीं पता था कि इतना जघन्य आतंकी हमला होने वाला है और पाकिस्तान में इसकी साजिश रची जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि यह एक बड़ी विफलता है और इसकी जिम्मेदारी ली जानी चाहिए।
- ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवाद खत्म करना था।
- पाकिस्तान का संयुक्त राष्ट्र समिति का अध्यक्ष बनना एक झटका है।
- क्या प्रधानमंत्री इसकी जिम्मेदारी लेंगे, प्रियंका ने पूछा।
पहलगाम से ऑपरेशन सिंदूर तक — प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन
| क्रम | तारीख | घटना का नाम | घटनाक्रम का विवरण |
|---|---|---|---|
| 1 | 22 अप्रैल 2025 | पहलगाम आतंकवादी हमला | 3 हथियारबंद आतंकियों ने बैसारण घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाया; 26 नागरिकों की हत्या (25 पर्यटक‑भारतीय, 1 स्थानीय)। लश्कर‑ए‑तैयबा/टीआरएफ से संबन्ध स्पष्ट हुआ। |
| 2 | 23–24 अप्रैल 2025 | प्रतिसाद और प्रतिबंध | भारत ने इंडस जल संधि निलंबित की, वीज़ा सेवाएँ रोकीं, सीमा चौकियाँ घटाईं, और पाकिस्तान के कर्मचारी हटाए। LoC पर गोलाबारी बढ़ी। |
| 3 | 29 अप्रैल 2025 | सैन्य स्वतंत्रता और तैयारी | प्रधानमंत्री ने रक्षा अधिकारियों को स्वतंत्र निर्णय की शक्ति दी; वरिष्ठ सुरक्षा समीक्षा बैठक हुई; आपात तैयारी बढ़ाई गई। |
| 4 | 7 मई 2025 | ऑपरेशन सिंदूर शुरू | भारत ने पाकिस्तान व पीओके में 9 आतंकवादी ठिकानों पर निशाना साधा; ~25‑मिनट की सटीक मिसाइल/हवाई कार्रवाई में ~100 आतंकवादी मारे गए। नागरिक एवं सैन्य सुविधा निशाना नहीं बनी। |
| 5 | 8–10 मई 2025 | सीमा संघर्ष एवं युद्धविराम | पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और गोलाबारी; भारत ने लॉंचपैड्स, चौकियाँ ध्वस्त कीं, ड्रोन/मिसाइल इंटरसेप्ट किए। 10 मई को भारत–पाक सीमा विवाद पर युद्धविराम लागू हुआ। |



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