पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड ‘हाशिम मूसा मारा गया’ घाटी में बड़ी सफलता
पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा मारा गया, जिसने 22 अप्रैल, 2025 को 26 नागरिकों की जान ले ली थी। भारतीय सेना के विशेष बलों ने सोमवार को उसे मार गिराया। यह घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए एक बड़ी सफलता है।
- पूर्व पाक एसएसजी कमांडो से लश्कर हैंडलर बना मूसा।
- 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के पीछे माना जा रहा था।
- भारतीय सेना के विशेष बलों ने हाशिम मूसा को मार गिराया।
यह मुठभेड़ श्रीनगर के शहर केंद्र से लगभग 20 किलोमीटर दूर हरवान के घने जंगलों में हुई। सेना की चिनार कोर ने इसकी पुष्टि की है।
मूसा: पूर्व एसएसजी कमांडो से लश्कर का चेहरा
हाशिम मूसा, जिसे सुलेमान मूसा भी कहा जाता है, पहले पाकिस्तान के विशेष सेवा समूह (SSG) का हिस्सा था। वह पाकिस्तानी सेना की एक विशिष्ट कमांडो शाखा से जुड़ा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मूसा बाद में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया।
- पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान ने उसे लश्कर को “उधार” दिया।
- मूसा को सीमा पार अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
- पूर्व विशेष बल कर्मियों का आतंकी समूहों में शामिल होना एक चलन है।
सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि उसे अपनी परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए शामिल किया गया था। यह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की एक रणनीति रही है।
कश्मीर में मूसा की घुसपैठ और खौफनाक गतिविधियाँ
मूसा ने सितंबर 2023 के आसपास अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की थी। उसने कठुआ-सांबा सेक्टर के रास्ते भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया। जम्मू-कश्मीर में आने के बाद, वह कई जिलों में सक्रिय हो गया।
- बडगाम, बारामूला, राजौरी, पुंछ, गंदेरबल में सक्रिय रहा।
- खुफिया आकलन और OGW पूछताछ से गतिविधियों का पता चला।
- मूसा 2024 के तीन अन्य हमलों से भी जुड़ा था।
उसकी मौजूदगी की पुष्टि डिजिटल और मानवीय इनपुट से हुई थी। वह सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाता रहा।
पहलगाम हमला और ऑपरेशन महादेव
22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी क्षेत्र में हमला हुआ। भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी। हमलावर M4 राइफलों से लैस थे, जिससे मूसा हमले का मुख्य सूत्रधार माना गया।
- पहलगाम नरसंहार के दोषियों की तलाश तेज कर दी गई थी।
- खुफिया जानकारी मिली कि हमलावर हरवान-दाचीगाम क्षेत्र में छिपे थे।
- ऑपरेशन महादेव इसी सूचना पर शुरू किया गया था।
सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने “ऑपरेशन महादेव” चलाया। इस दौरान हाशिम मूसा मारा गया, साथ ही दो अन्य आतंकवादी अबू हमजा और यासिर भी ढेर हुए।
ऑपरेशन महादेव: एक सफल संयुक्त अभियान
ऑपरेशन महादेव 15 दिनों की खुफिया सूचनाओं पर आधारित था। 11 जुलाई, 2025 को एक चीनी सैटेलाइट फोन का पता चला। स्थानीय खानाबदोशों ने दाचीगाम के जंगलों में आतंकवादी गतिविधियों की पुष्टि की।
- ड्रोन निगरानी और इंटरसेप्टेड संचार से इनपुट मिले।
- सुबह 11:30 बजे सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को घेरा।
- उन्हें मुलनार चोटी पर एक तंबू में मार गिराया गया।
सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार बरामद किए। इसमें M4 कार्बाइन, AK-47 राइफलें, और IED शामिल थे।
आईएसआई की साजिश और पाकिस्तान की भूमिका का पर्दाफाश
पहलगाम हमले की जाँच से आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका स्पष्ट हो गई। सुलेमान (हाशिम मूसा) एक उच्च प्रशिक्षित आतंकवादी था। उसे हमले की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया था।
- हमले में केवल पाकिस्तानी आतंकवादियों को शामिल किया गया था।
- साजिद जट्ट को पाकिस्तानी लड़ाकों को तैनात करने का काम सौंपा गया।
- मूसा 2022 से घाटी में था, लश्कर के मुरीदके कैंप में प्रशिक्षित।
इनाम और आगे के अभियान
पहलगाम नरसंहार के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मूसा सहित तीन संदिग्धों के स्केच जारी किए। सूचना देने पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। कम से कम 15 सक्रिय कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।
- सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, मुरीदके पर हमला किया।
- लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने सेना को बधाई दी।
- चिनार कोर ने एक्स पर ऑपरेशन की जानकारी दी।
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